पैसे की हवस में कर दी मां-बाप की हत्या, फिर 4 साल तक लाशों संग एक ही छत के नीचे रही बेटी, ये कहानी सुन सिहर उठेगा दिल

36 साल की वर्जीनिया पर कर्ज का बोझ था और वह लगातार अपने माता-पिता के नाम से बैंक अकाउंट से पैसे निकाल रही थी. जून 2019 में इस डर ने उसे शैतान बना दिया और उसने न केवल दोनों को मौत के घाट उतारा, बल्कि कोविड महामारी का बहाना बनाकर सालों तक उनका हश्र दुनिया से छुपाए रखा.

Murdered his parents for money kept their bodies in the house for 4 years
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo: Freepik

ब्रिटेन से आई यह दिल दहला देने वाली घटना आपको सोचने पर मजबूर कर देगी कि क्या वाकई इंसानियत कहीं खो गई है? एक बेटी, जो कभी अपने माता-पिता की आंखों का तारा रही होगी, वही एक दिन उनकी जान की दुश्मन बन बैठी. सिर्फ पैसों की खातिर उसने अपने ही मां-बाप की बेरहमी से हत्या कर दी और फिर चार सालों तक उनके शव को घर में छिपाए रखा. मानो कुछ हुआ ही न हो!

क्या है पूरा मामला?

यह खौफनाक कहानी वर्जीनिया मैककुलॉ की है, जिसने अपने पिता जॉन और मां लोइस की जान सिर्फ इसलिए ली क्योंकि उसे डर था कि वे उसकी वित्तीय धोखाधड़ी का भांडा फोड़ देंगे. 36 साल की वर्जीनिया पर कर्ज का बोझ था और वह लगातार अपने माता-पिता के नाम से बैंक अकाउंट से पैसे निकाल रही थी. जून 2019 में इस डर ने उसे शैतान बना दिया और उसने न केवल दोनों को मौत के घाट उतारा, बल्कि कोविड महामारी का बहाना बनाकर सालों तक उनका हश्र दुनिया से छुपाए रखा.

मामला तब खुला जब वर्जीनिया की बहन लुईस हॉपकिंस ने सार्वजनिक रूप से अपने दुख और अपराधबोध की कहानी साझा की. लुईस ने बताया कि उसने अपनी छोटी बहन को माफ कर दिया है, लेकिन वह उससे कभी नहीं मिलेगी. उसे अफसोस है कि उसने परिवार से दूरी बना ली थी और शायद यही वजह है कि वह अपने माता-पिता की मौत नहीं रोक सकी.

कैसे दिया घटना को अंजाम

वर्जीनिया ने अपने पिता को नशे में दवाओं का कॉकटेल देकर मारा, और जब मां ने अगली सुबह कुछ शक किया तो उसने उन्हें भी हथौड़े और चाकू से मौत के घाट उतार दिया. शवों को उसने घर में ही छिपा दिया—एक “घरेलू मकबरे” में और दूसरे को अलमारी में प्लास्टिक शीट में लपेटकर. इसके बाद वह कई वर्षों तक खुद को सामान्य दिखाते हुए पेंशन लेती रही, बिल चुकाती रही और लोगों को भ्रम में रखती रही कि माता-पिता जीवित हैं.

कोर्ट ने सुनाई ये सजा

वर्जीनिया को अदालत ने दोषी ठहराते हुए न्यूनतम 36 साल की जेल की सजा सुनाई है. लेकिन इस अपराध से उपजे दर्द और मानसिक घाव उसके परिवार, खासकर बहन लुईस के लिए हमेशा के लिए एक नासूर बन चुके हैं.

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