मुंबई में 26/11 से भी बड़े हमले की प्लानिंग, चीन से आया था बारूद; बेरूत पोर्ट की तरह हो सकती थी बड़ी तबाही

मुंबई के तीन बड़े पोर्ट – न्हावा शेवा पोर्ट, मुंद्रा पोर्ट और कांडला स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (एसईजेड) पोर्ट – में एक बड़ा हादसा होने से बच गया.

Mumbai gunpowder came from China devastation like Beirut Port
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo: Freepik

मुंबई के तीन बड़े पोर्ट – न्हावा शेवा पोर्ट, मुंद्रा पोर्ट और कांडला स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (एसईजेड) पोर्ट – में एक बड़ा हादसा होने से बच गया. इन पोर्ट्स से करीब 35 करोड़ रुपये मूल्य के 1 लाख किलोग्राम अवैध पटाखे जब्त किए गए, जो चीन से अवैध रूप से आयात किए गए थे. यह घटना उस समय हुई जब राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई की. यदि ये पटाखे पकड़ में नहीं आते, तो मुंबई के ये प्रमुख पोर्ट भी बेरूत के पोर्ट की तरह तबाह हो सकते थे.

यहां पर हमें याद करना होगा 4 अगस्त 2020 का वह दिन, जब बेरूत पोर्ट पर एक भयावह विस्फोट हुआ था. उस विस्फोट ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था और यह घटना उस समय हुई जब अधिकारियों की लापरवाही ने बेरूत पोर्ट को एक खतरनाक स्थिति में पहुंचा दिया था.

बेरूत पोर्ट का हादसा: एक चेतावनी

बेरूत पोर्ट पर 4 अगस्त 2020 को गोदाम में रखे 2,750 टन अमोनियम नाइट्रेट में आग लगने से एक भयंकर विस्फोट हुआ था. यह विस्फोट करीब 0.5 से 1.1 किलोटन टीएनटी के बराबर था, यानी 500 से 1,100 टन डाइनामाइट एक साथ फट गया. यह विस्फोट पास के गोदाम में लगी एक छोटी सी आग से हुआ, जो संभवतः आतिशबाजी के कारण हुई थी.

2014 से यह खतरनाक अमोनियम नाइट्रेट बेरूत पोर्ट के गोदाम नंबर 12 में पड़ा हुआ था, लेकिन अधिकारियों ने इसे हटाने या सुरक्षित तरीके से नष्ट करने के लिए की गई कई चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया था. इस दुर्घटना के बाद, मानवाधिकार संगठनों ने लेबनान सरकार और सुरक्षा अधिकारियों की नाकामी की आलोचना की, लेकिन किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया गया.

विस्फोट के बाद के नतीजे

बेरूत विस्फोट के कारण पूरे शहर का आधे से अधिक हिस्सा बर्बाद हो गया था. विस्फोट में 218 लोगों की मौत हुई और 7,000 से अधिक लोग घायल हुए. इसके अलावा लगभग 3 लाख लोग विस्थापित हो गए. संपत्ति का नुकसान 15 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा अनुमानित किया गया था. विस्फोट के बाद 124 मीटर चौड़ा और 43 मीटर गहरा गड्ढा बन गया था, और इसके प्रभाव से 10 किलोमीटर दूर तक घरों को नुकसान हुआ.

विस्फोट के कारण बेरूत में खाद्य संकट भी उत्पन्न हो गया था, और हवा में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के रिसाव ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरे में डाल दिया. इसके राजनीतिक असर भी गंभीर थे, और इस घटना के बाद लेबनान के प्रधानमंत्री हसन दीब को इस्तीफा देना पड़ा.

मुंबई के पोर्ट्स में टला बड़ा खतरा

अब अगर हम मुंबई के पोर्ट्स की बात करें, तो यह देखा जा सकता है कि अधिकारियों की सक्रियता ने एक बड़े हादसे को टाल दिया. अगर ये अवैध पटाखे समय पर पकड़ में नहीं आते, तो इनमें से कोई भी पोर्ट बेरूत पोर्ट की तरह खतरनाक स्थिति में पहुंच सकता था. ऐसे अवैध माल की पकड़ और सुरक्षा व्यवस्था का महत्व बेहद बढ़ गया है, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही भी किसी बड़े संकट का कारण बन सकती है.

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