महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. श्रीरामपुर तहसील के एक वरिष्ठ डॉक्टर को व्हाट्सऐप कॉल के जरिए ठगों ने ऐसी मनोवैज्ञानिक जाल में फंसाया कि उन्होंने करीब ₹7.17 करोड़ रुपये अपनी जेब से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए. इस पूरे घटनाक्रम को "डिजिटल अरेस्ट" का नाम दिया गया — एक नई साइबर ठगी की रणनीति.
फर्जी पहचान, नकली नोटिस और कानून का डर
ठगों ने डॉक्टर से खुद को सुप्रीम कोर्ट, ईडी, दिल्ली पुलिस और सीबीआई का अधिकारी बताकर संपर्क किया. उन्हें झूठी FIR, अश्लील विज्ञापन और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे संगीन आरोपों में फंसाने की धमकी दी गई. फर्जी समन, कोर्ट नोटिस और पहचान पत्र व्हाट्सऐप पर भेजे गए. डॉक्टर को कहा गया कि वे डिजिटल रूप से गिरफ्तार हैं और अब हर पल उनकी निगरानी हो रही है.
धमकी और दबाव से की गई करोड़ों की वसूली
डॉक्टर को लगातार मानसिक दबाव में रखा गया. उन्हें धमकाया गया कि अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उनके बच्चों के भविष्य और अस्पताल की मान्यता पर खतरा आ जाएगा. डर के माहौल में डॉक्टर ने 7 सितंबर से 10 अक्टूबर के बीच धीरे-धीरे ₹7.17 करोड़ की राशि अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी.
पैसे की जांच में निकला अंतरराष्ट्रीय रैकेट
जांच में पता चला कि ट्रांसफर की गई रकम भारत के कई राज्यों के म्यूल अकाउंट्स में भेजी गई और फिर वहां से यह पैसा लाओस, कंबोडिया, दुबई और हांगकांग जैसे देशों में पहुंचाया गया. पुलिस को शक है कि यह पूरा ऑपरेशन विदेशों में स्थित कॉल सेंटरों से चलाया जा रहा था, जो भारत में ठगी के लिए डिजिटल अरेस्ट जैसी नई स्क्रिप्ट इस्तेमाल कर रहे हैं.
पुलिस का एक्शन और शुरुआती सुराग
अहिल्यानगर के पुलिस अधीक्षक सोमनाथ घार्गे ने बताया कि यह अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल अरेस्ट मामला है. उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि कॉल इंटरनेशनल IP एड्रेस से किए गए थे. पुलिस ने कई बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है और साइबर फॉरेंसिक टीमें पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं.
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