Yogi Adityanath Cabinet Decisions: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. बैठक में कृषि, परिवहन, कारागार, सिंचाई, आबकारी, स्टांप एवं पंजीकरण, नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति समेत कई विभागों से जुड़े फैसलों पर मुहर लगी.
सरकार ने किसानों, वाहन मालिकों, सरकारी अधिवक्ताओं और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से जुड़े कई अहम निर्णय लिए हैं, जिनका प्रभाव प्रदेश के लाखों लोगों पर पड़ने वाला है.
मक्का का समर्थन मूल्य तय, खरीद 5 जून से
कैबिनेट ने मक्का खरीद नीति को मंजूरी देते हुए इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,400 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है. सरकारी खरीद अभियान 5 जून से शुरू होकर 31 जुलाई तक चलेगा. प्रदेश के विभिन्न जिलों में खरीद केंद्र स्थापित किए जाएंगे ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके.
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— Government of UP (@UPGovt) June 3, 2026
जेलों में बंदियों की मृत्यु पर नई मुआवजा नीति
बैठक में कारागार विभाग से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई. इसके तहत जेलों में बंदियों की मृत्यु की स्थिति में मुआवजा भुगतान के लिए नई नीति लागू की जाएगी. सरकार का उद्देश्य ऐसे मामलों में स्पष्ट और व्यवस्थित प्रक्रिया सुनिश्चित करना है.
18 शहरों में चलेंगी इलेक्ट्रिक बसें
प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. कैबिनेट ने 18 शहरों में जीसीसी (GCC) मॉडल के तहत इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को मंजूरी दी है. बड़े शहरों में वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें भी चलाई जाएंगी, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी और प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी.
सरकारी वकीलों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी
कैबिनेट के सबसे अहम फैसलों में सरकारी अधिवक्ताओं की फीस और भत्तों में वृद्धि शामिल रही. जिला न्यायालयों से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक सरकार की पैरवी करने वाले वकीलों के मानदेय में लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई.
जिला न्यायालयों में तैनात सरकारी वकीलों की मासिक रिटेनरशिप 9,000 रुपये से बढ़ाकर 14,000 रुपये तक की जा सकती है. वहीं प्रति सुनवाई मिलने वाली फीस 1,650 रुपये से बढ़कर 2,500 रुपये तक हो सकती है. एडिशनल डिस्ट्रिक्ट गवर्नमेंट एडवोकेट्स की मासिक रिटेनरशिप 7,200 रुपये से बढ़ाकर 11,000 रुपये और प्रति सुनवाई शुल्क 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,300 रुपये तक किए जाने का प्रस्ताव है.
इसके अलावा एडवोकेट जनरल की मासिक रिटेनरशिप 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये तथा प्रति सुनवाई फीस 40,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये तक किए जाने को भी मंजूरी मिली है.
लाखों वाहन मालिकों के लिए ओटीएस योजना
परिवहन विभाग की प्रस्तावित एकमुश्त समाधान (OTS) योजना को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. इस योजना के तहत पहली बार वाहन मालिकों को सिर्फ पेनाल्टी में ही नहीं बल्कि मूल कर में भी राहत देने का निर्णय लिया गया है.
योजना के अनुसार पेनाल्टी को पूरी तरह माफ किया जाएगा और मूल कर में भी लगभग 35 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है. इससे प्रदेश के 8.48 लाख से अधिक बकायेदार वाहन मालिकों को लाभ मिलने की उम्मीद है.
1,853 करोड़ रुपये का बकाया वसूलने की तैयारी
परिवहन विभाग के अनुसार 30 जनवरी 2026 तक 7.5 टन तक के हल्के व्यावसायिक वाहनों की संख्या लगभग 29.15 लाख थी. इनमें से करीब 8.50 लाख वाहनों पर कुल 1,853 करोड़ रुपये का बकाया है.
इस बकाये में 1,073 करोड़ रुपये मूल कर और 780 करोड़ रुपये पेनाल्टी के रूप में शामिल हैं. सरकार को उम्मीद है कि नई राहत योजना के बाद बड़ी संख्या में वाहन मालिक बकाया राशि जमा करेंगे, जिससे राजस्व संग्रह में भी वृद्धि होगी.
लंबित मामलों के निस्तारण पर जोर
सरकार का मानना है कि मूल कर में आंशिक छूट देने से वर्षों से लंबित कर मामलों का समाधान तेजी से हो सकेगा. विभाग ने पहले लागू की गई विभिन्न राहत योजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह की पहलें बकाया वसूली को गति देने में प्रभावी साबित हुई हैं. नई योजना के जरिए जहां वाहन मालिकों को राहत मिलेगी, वहीं सरकार को लंबे समय से अटके राजस्व की प्राप्ति का रास्ता भी आसान होगा.
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