रिटायरमेंट के बाद भी धोनी का जलवा बरकरार, टैक्स देने में सबको छोड़ा पीछे; बनाया ये खास रिकॉर्ड

MS Dhoni Income Tax: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हों, लेकिन उनकी लोकप्रियता, कमाई और प्रभाव आज भी कम नहीं हुआ है. मैदान पर अपने शांत स्वभाव, शानदार कप्तानी और बड़े-बड़े रिकॉर्ड के लिए मशहूर ‘कैप्टन कूल’ अब वित्तीय दुनिया में भी नया मुकाम हासिल कर चुके हैं.

ms Dhoni charisma continues even after retirement leaving everyone behind in paying taxes
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MS Dhoni Income Tax: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हों, लेकिन उनकी लोकप्रियता, कमाई और प्रभाव आज भी कम नहीं हुआ है. मैदान पर अपने शांत स्वभाव, शानदार कप्तानी और बड़े-बड़े रिकॉर्ड के लिए मशहूर ‘कैप्टन कूल’ अब वित्तीय दुनिया में भी नया मुकाम हासिल कर चुके हैं. ताजा आंकड़ों के अनुसार, महेंद्र सिंह धोनी बिहार और झारखंड क्षेत्र में सबसे ज्यादा टैक्स चुकाने वाले व्यक्तिगत करदाता बन गए हैं.

धोनी की यह उपलब्धि केवल उनकी कमाई का संकेत नहीं है, बल्कि यह भी दिखाती है कि खेल से संन्यास लेने के बाद भी उनका ब्रांड वैल्यू और कारोबारी प्रभाव लगातार मजबूत बना हुआ है.

50 करोड़ रुपये से ज्यादा एडवांस टैक्स जमा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महेंद्र सिंह धोनी ने पिछले वित्तीय वर्ष में 50 करोड़ रुपये से अधिक का एडवांस टैक्स जमा किया है. हालांकि आयकर विभाग किसी भी व्यक्ति के टैक्स भुगतान का सटीक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं करता, लेकिन बिहार-झारखंड क्षेत्र के मुख्य आयकर आयुक्त डॉ. डी. सुधाकर राव ने पुष्टि की है कि व्यक्तिगत श्रेणी में धोनी सबसे बड़े टैक्सपेयर के रूप में सामने आए हैं.

धोनी की आय के प्रमुख स्रोतों में आईपीएल, ब्रांड एंडोर्समेंट, विज्ञापन, बिजनेस निवेश और विभिन्न व्यावसायिक उपक्रम शामिल हैं. क्रिकेट से दूरी बनाने के बाद भी वह कई बड़े ब्रांड्स का चेहरा बने हुए हैं और उनकी मार्केट वैल्यू लगातार बढ़ती जा रही है.

संन्यास के बाद भी कमाई में लगातार इजाफा

महेंद्र सिंह धोनी आज भी भारत के सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय खेल सितारों में गिने जाते हैं. आईपीएल में उनकी मौजूदगी अब भी करोड़ों दर्शकों को आकर्षित करती है. इसके अलावा स्पोर्ट्स, फिटनेस, एग्रीकल्चर, हॉस्पिटैलिटी और लाइफस्टाइल सेक्टर में भी उन्होंने निवेश कर रखा है.

बिहार-झारखंड में रिकॉर्ड टैक्स कलेक्शन

महेंद्र सिंह धोनी की व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ बिहार और झारखंड में टैक्स संग्रह के आंकड़ों में भी इस बार बड़ा उछाल दर्ज किया गया है. आयकर विभाग के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में दोनों राज्यों से करीब 20 हजार करोड़ रुपये का रिकॉर्ड टैक्स कलेक्शन हुआ है.

इसमें झारखंड का योगदान सबसे ज्यादा रहा. राज्य से लगभग 12 हजार करोड़ रुपये टैक्स के रूप में जमा हुए, जो कुल संग्रह का बड़ा हिस्सा माना जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार, यह आंकड़ा क्षेत्र में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और बेहतर टैक्स अनुपालन को दर्शाता है.

टीडीएस से आया सबसे ज्यादा राजस्व

आयकर विभाग के मुताबिक, कुल टैक्स कलेक्शन का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा टीडीएस यानी टैक्स डिडक्शन एट सोर्स के जरिए प्राप्त हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि टीडीएस आधारित कलेक्शन में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि संगठित सेक्टर में वित्तीय लेन-देन ज्यादा पारदर्शी हो रहे हैं. इससे सरकार को समय पर राजस्व मिलने के साथ टैक्स चोरी पर भी नियंत्रण लगाने में मदद मिलती है.

सरकारी कंपनियों ने भी दिया बड़ा योगदान

इस रिकॉर्ड टैक्स कलेक्शन में सरकारी कंपनियों की भूमिका भी काफी अहम रही है. सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL), भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) और CMPDI जैसी बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने सरकारी खजाने में भारी टैक्स जमा किया है.

अधिकारियों के मुताबिक, कई इलाकों में भारी बारिश के कारण खनन गतिविधियां प्रभावित हुई थीं, इसके बावजूद इन कंपनियों से मिला टैक्स कलेक्शन संतोषजनक रहा. खनन और ऊर्जा क्षेत्र झारखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं और टैक्स संग्रह में इनका बड़ा योगदान लगातार बना हुआ है.

पैन कार्ड ज्यादा, ITR भरने वाले कम

आंकड़ों के अनुसार, बिहार और झारखंड में करीब 5.5 करोड़ लोगों के पास पैन कार्ड मौजूद हैं. लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल लगभग 40 लाख लोग ही इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करते हैं. पैन कार्ड धारकों और रिटर्न भरने वालों की संख्या में इतना बड़ा अंतर आयकर विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है.

जागरूकता अभियान चलाएगा आयकर विभाग

इस स्थिति को सुधारने के लिए आयकर विभाग अब विशेष जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी में है. विभाग की योजना लोगों को टैक्स रिटर्न फाइलिंग के फायदे समझाने और टैक्स अनुपालन बढ़ाने की है.

इसके लिए विभिन्न शहरों में आउटरीच प्रोग्राम, जागरूकता शिविर और डिजिटल अभियान शुरू किए जा सकते हैं. अधिकारियों का मानना है कि ज्यादा लोगों के टैक्स सिस्टम से जुड़ने पर राजस्व संग्रह और आर्थिक पारदर्शिता दोनों में सुधार होगा.

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