नई दिल्ली: कंप्यूटर के माउस का इस्तेमाल तो हम सब रोजाना करते हैं. यह केवल कर्सर को हिलाने या फाइल्स को सिलेक्ट करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब यह आपकी निजी बातचीत भी सुन सकता है. सुनकर हैरानी होगी, लेकिन कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसे ‘माइक-ई-माउस’ कहा जा रहा है. यह तकनीक आपके माउस को एक माइक्रोफोन की तरह काम करने में सक्षम बना देती है.
माइक-ई-माउस तकनीक क्या है?
माउस में लगे सेंसर बेहद संवेदनशील होते हैं, जो छोटे-छोटे कंपनों को महसूस कर सकते हैं. आपकी आवाज से उत्पन्न कंपन भी इन्हें पकड़ में आ जाते हैं. इस नई तकनीक में इन कंपनों को रिकॉर्ड करके उन्हें आवाज में बदला जाता है. इसके लिए हैकर्स माउस के सेंसर से कंपन डेटा निकालते हैं और उसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए शब्दों में परिवर्तित करते हैं. रिसर्च के अनुसार, इस प्रक्रिया की सटीकता लगभग 61% है, जिससे आपके नंबर और पिन जैसे महत्वपूर्ण डेटा भी चुराए जा सकते हैं.
हैकर्स कैसे कर सकते हैं इसका दुरुपयोग?
इस तकनीक का फायदा उठाने के लिए हैकर्स को आपके कंप्यूटर में विशेष सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करना होगा. यह प्रोग्राम माउस के सेंसर से कंपन इकट्ठा करता है, फिर इसे साफ़ करके शोर कम किया जाता है. अंत में, साफ डेटा को AI सिस्टम में डालकर बातचीत को समझा जाता है. इस तरह से हैकर्स आपके निजी और संवेदनशील डेटा को आसानी से हासिल कर सकते हैं.
माउस के जरिए जासूसी रोकने के उपाय
माउस से जासूसी तभी संभव है जब वह किसी सख्त, सपाट सतह पर रखा हो. अगर माउस किसी माउस पैड या कपड़े पर रखा गया हो तो कंपन डेटा इकट्ठा करना मुश्किल हो जाता है. इसलिए, हमेशा माउस का इस्तेमाल किसी नरम सतह पर करें. इसके अलावा, आसपास ज्यादा शोर होने पर भी इस तकनीक की प्रभावशीलता कम हो जाती है. टीवी, म्यूजिक या अन्य आवाजें आपकी बातचीत को सुनने से रोक सकती हैं.
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