'भोजशाला में मंदिर के हिस्सों में बनाई गई है मस्जिद', ASI की रिपोर्ट में मिले सनातन धर्म के सबूत

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट सामने आई है. यह रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में पेश की गई और पक्षकारों को सौंपी गई.

Mosque has been built in parts of the temple in Bhojshala ASI Report
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Bhojshala ASI Report: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट सामने आई है. यह रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में पेश की गई और पक्षकारों को सौंपी गई.

रिपोर्ट में भोजशाला की संरचना और इतिहास को लेकर कई अहम दावे किए गए हैं, जिससे यह विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है.

मंदिर के हिस्सों से बनी मस्जिद का दावा

ASI की रिपोर्ट में कहा गया है कि भोजशाला का निर्माण 12वीं सदी में हुआ था. वहीं परिसर में मौजूद मस्जिद का निर्माण बाद में, करीब 1265 ईस्वी में बताया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, मस्जिद के निर्माण में पुराने मंदिर के हिस्सों का इस्तेमाल किया गया है. इसी कारण यह मुद्दा लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है.

हिंदू पक्ष भोजशाला को मां वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है.

परिसर में मिले धार्मिक प्रतीक

सर्वे के दौरान कई ऐसे अवशेष मिले हैं, जो प्राचीन मंदिर शैली की ओर इशारा करते हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि:

  • परिसर में देवी-देवताओं की मूर्तियों के निशान मिले
  • कई स्तंभों पर नक्काशी और कमल जैसी आकृतियां पाई गईं
  • संस्कृत भाषा के शिलालेख भी दर्ज किए गए
  • कुछ प्राचीन सिक्कों के प्रमाण भी मिले
  • ये सभी अवशेष 12वीं से 16वीं शताब्दी के बीच के बताए जा रहे हैं.

2100 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट

ASI की यह रिपोर्ट करीब 2100 पन्नों की है, जिसमें सर्वे के दौरान ली गई 500 से ज्यादा तस्वीरें भी शामिल की गई हैं.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भोजशाला का निर्माण मालवा क्षेत्र में मुगलों के आने से पहले हुआ था, जबकि कमाल मौला का आगमन बाद में हुआ.

याचिकाकर्ताओं की प्रतिक्रिया

रिपोर्ट सामने आने के बाद याचिकाकर्ताओं ने इसे अहम बताया है. आशीष गोयल ने कहा कि यह सर्वे दिखाता है कि पूरी संरचना परमार काल की है और इसका संबंध राजा भोज के समय से है.

वहीं अशोक जैन का कहना है कि उनकी मांग हमेशा साफ रही है, अगर यह मस्जिद है तो मुस्लिम पक्ष को दी जाए और अगर मंदिर है तो हिंदू पक्ष को.

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