Nepal Fuel Crisis: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब दुनिया के कई देशों पर साफ दिखाई देने लगा है. वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने से पेट्रोल और डीजल की कमी बढ़ती जा रही है. इसी कड़ी में पड़ोसी देश नेपाल भी इस संकट की चपेट में आ गया है. ईंधन की कमी से जूझ रही नेपाल सरकार ने हालात को संभालने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं.
ईंधन की खपत को कम करने के उद्देश्य से सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए सप्ताह में दो दिन छुट्टी घोषित करने का निर्णय लिया है. नई व्यवस्था के तहत अब सरकारी कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा. सरकार का मानना है कि इससे ईंधन की खपत में कमी आएगी और मौजूदा संकट को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा.
Nepal | In the cabinet meeting of the Nepal government, it was decided to give two days' holiday every week in view of the shortage of petroleum.
— ANI (@ANI) April 5, 2026
(Source: PMO) pic.twitter.com/p6CiVFQ3RB
दफ्तरों के समय में भी बदलाव
नेपाल सरकार के प्रवक्ता और शिक्षामंत्री सस्मित पोखरेल ने जानकारी दी कि सिर्फ छुट्टी ही नहीं, बल्कि कार्यालयों के कामकाज के समय में भी बदलाव किया गया है. अब सरकारी दफ्तर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित होंगे. यह नई व्यवस्था सोमवार से लागू कर दी जाएगी. उन्होंने बताया कि यह फैसला कैबिनेट की बैठक में पेट्रोलियम की कमी को देखते हुए लिया गया है.
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की तैयारी
सरकार ने सिर्फ तत्काल राहत के उपाय ही नहीं किए हैं, बल्कि लंबे समय के समाधान पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया है. पेट्रोल और डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई है. इसके लिए आवश्यक कानूनी ढांचे को तैयार करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि वाहन मालिकों को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े.
कानूनी अड़चनों को दूर करने के निर्देश
मंत्रिपरिषद की बैठक में यह भी तय किया गया कि इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी कानूनी बाधाओं को जल्द दूर किया जाएगा. वर्तमान में पंजीकरण, नवीकरण और तकनीकी मानकों की स्पष्ट व्यवस्था न होने के कारण लोगों को कई समस्याएं झेलनी पड़ रही थीं. सरकार ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि इन अड़चनों को खत्म कर एक स्पष्ट और सरल प्रणाली तैयार की जाए.
पर्यावरण और ईंधन बचत पर फोकस
सरकार का यह कदम सिर्फ ईंधन संकट से निपटने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देना है. इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल से जहां ईंधन पर निर्भरता कम होगी, वहीं स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी प्रोत्साहन मिलेगा. नेपाल अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करना चाहता है, ताकि भविष्य में ऐसे संकटों से बचा जा सके.
आगे की रणनीति पर नजर
सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए यह फैसले जरूरी थे. जैसे ही वैश्विक स्तर पर स्थिति सामान्य होगी, इन नियमों में बदलाव किया जा सकता है. फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान ईंधन की बचत और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने पर है.
कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव का असर अब छोटे देशों तक भी पहुंच चुका है और नेपाल का यह कदम दिखाता है कि संकट से निपटने के लिए नीतिगत बदलाव कितने जरूरी हो जाते हैं.
ये भी पढ़ें- IPL 2026: डबल हेडर में आज आमने-सामने होंगे CSK और RCB, जानें मैच के दौरान कैसा रहेगा बेंगलुरु का मौसम