Meerut Army Jawan News: देश की रक्षा करने वाले जवानों को जब अपने ही देश में अपमान और अत्याचार झेलना पड़े, तो यह किसी भी संवेदनशील नागरिक के लिए चिंता की बात होनी चाहिए. मेरठ के भूनी टोल प्लाजा पर जो कुछ हुआ, उसने न सिर्फ मानवता को शर्मसार किया, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि आखिर अनुशासन और सेवा के प्रतीक सैनिकों की इज्जत सड़क पर क्यों रौंदी जा रही है?
यह मामला है मेरठ के गोतका गांव के रहने वाले सेना के जवान कपिल सिंह का, जो श्रीनगर में तैनात हैं और ड्यूटी पर लौटने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट जा रहे थे. रात के अंधेरे में जब वह भूनी टोल प्लाजा पर पहुंचे, तो वहां कर्मचारियों से मामूली कहासुनी हुई, जो कुछ ही देर में हिंसा में तब्दील हो गई. टोल कर्मचारियों ने कपिल सिंह को बेरहमी से पीटा, डंडे बरसाए, और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने पूरे घटनाक्रम को देशभर में सुर्खियों में ला दिया.
क्या है पूरा मामला?
कपिल सिंह कुछ दिन की छुट्टियों पर घर आए थे और सोमवार सुबह की फ्लाइट पकड़नी थी. इसी सिलसिले में रविवार रात को वह एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए. भूनी टोल प्लाजा पर भीड़ और ट्रैफिक की वजह से उन्होंने कर्मचारियों से अनुरोध किया कि उन्हें निकलने दिया जाए, क्योंकि वह सेना के जवान हैं और ड्यूटी पर जा रहे हैं. अपनी पहचान भी उन्होंने बताई, लेकिन कर्मचारियों ने न सिर्फ अनदेखी की, बल्कि बहस के बाद उन पर हमला कर दिया.
वीडियो वायरल, जनता में उबाल
सोशल मीडिया पर जैसे ही यह वीडियो सामने आया, पूरे मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आक्रोश की लहर दौड़ गई. बड़ी संख्या में लोग टोल प्लाजा पर जुट गए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे. मामला इतना गंभीर हो गया कि पुलिस को तत्काल एक्शन लेना पड़ा. सात आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, और उन पर भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया.
कौन-कौन सी धाराएं लगीं?
एफआईआर में जिन धाराओं का जिक्र है, उनमें से मुख्य हैं:
धारा 115(2) – जान से मारने की नीयत से हमला; अधिकतम 10 साल की सजा
धारा 191(2) – सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकना; 3 साल तक की सजा
धारा 191(3) – ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी को चोट पहुंचाना; 7 साल की सजा
इसके अलावा, धारा 190, 352, और 109(1) जैसी धाराएं भी जोड़ी गईं हैं.
एनएसए की मांग और कंपनी पर कार्रवाई
जैसे-जैसे मामला तूल पकड़ता गया, लोगों की मांग बढ़ने लगी कि आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि यह हमला न सिर्फ एक व्यक्ति पर था, बल्कि यह समाज और देश के रक्षकों के मनोबल पर हमला था. दबाव के बीच NHAI ने टोल प्लाजा संचालक कंपनी का ठेका रद्द कर दिया और 20 लाख रुपये का जुर्माना भी ठोका.
कानून क्या कहता है?
वकीलों की मानें तो यह हमला पूर्वनियोजित और संगठित तरीके से हुआ, जो लोक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है. ऐसे मामलों में अगर जिला मजिस्ट्रेट चाहें, तो आरोपियों को एक साल तक की नजरबंदी (प्रिवेंटिव डिटेंशन) में भी रखा जा सकता है.
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