'जब बांग्लादेश बन सकता है तो...', पाकिस्तान में सूबों के बंटवारे पर मौलाना डीजल की मुनीर को चेतावनी

पाकिस्तान में प्रांतों के बंटवारे को लेकर चल रही चर्चा का विरोध तेज हो गया है. जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व पर निशाना साधा है.

Maulana Diesel warns Munir over the division of provinces in Pakistan
Image Source: Social Media

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में प्रांतों के बंटवारे को लेकर चल रही चर्चा का विरोध तेज हो गया है. जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व पर निशाना साधा है. ‘मौलाना डीजल’ के नाम से मशहूर फजलुर रहमान ने आरोप लगाया कि सेना पाकिस्तान के चारों सूबों को तोड़कर उन्हें छोटे राज्यों में बांटने की योजना बना रही है.

लाहौर में खत्म-ए-नबूवत कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए फजलुर रहमान ने कहा कि पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार सिर्फ दिखावे के लिए है. उनके मुताबिक, देश से जुड़े बड़े फैसले असल में सेना ले रही है.

रहमान ने कहा कि पाकिस्तान में सरकार मुस्लिम लीग-नून की है, लेकिन इतने बड़े राष्ट्रीय मुद्दे सेना के हाथ में हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पीएमएल-एन सरकार की स्थिति एक कर्मचारी जैसी रह गई है. इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान के बनने के समय सामने रखे गए दो-राष्ट्र सिद्धांत का भी जिक्र किया.

पाकिस्तानी सेना को याद दिलाया बांग्लादेश

पाकिस्तानी सेना पर निशाना साधते हुए फजलुर रहमान ने कहा कि सैन्य नेतृत्व की नीतियों की वजह से पूर्वी पाकिस्तान के लोगों का भरोसा टूटा और बांग्लादेश का गठन हुआ.

उन्होंने सवाल उठाया कि जब बांग्लादेश बन सकता है, जो आबादी के हिसाब से पाकिस्तान का एक बड़ा हिस्सा था, तो इसका असर पश्चिमी पाकिस्तान के सूबों पर क्यों नहीं पड़ेगा.

फजलुर रहमान ने कहा कि राजनीतिक बंटवारे ने पाकिस्तान को कमजोर किया है. उन्होंने कहा कि वह सिद्धांत रूप से नए राज्य बनाने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रांतों के बारे में कोई भी फैसला लेते समय मौजूदा हालात और समय को ध्यान में रखना जरूरी है.

सैन्य नेतृत्व को दी बहस की सलाह

फजलुर रहमान ने कहा कि ऊपर से कोई फैसला थोपने के बजाय इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए. उन्होंने पाकिस्तान के 18वें संविधान संशोधन का भी जिक्र किया और कहा कि इसके तहत खनिज संसाधनों पर प्रांतों के अधिकार हैं.

उन्होंने कहा कि प्रांतों के बंटवारे को लेकर कोई फैसला एकतरफा तरीके से नहीं लिया जाना चाहिए. इस मुद्दे पर सभी पक्षों के बीच बहस और चर्चा जरूरी है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान आज तक एक मजबूत और साझा राष्ट्रीय पहचान बनाने में सफल नहीं हुआ है.