रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत पहुंचने वाले हैं. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी अहम मुलाकात होगी. दोनों नेताओं की बातचीत में रक्षा सहयोग सबसे बड़े मुद्दों में से एक रह सकता है. रूस ने साफ संकेत दिया है कि भारत को Su-57 लड़ाकू विमान देने का प्रस्ताव भी बातचीत का हिस्सा होगा.
रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि भारत विमान निर्माण से जुड़ी तकनीक हासिल करना चाहता है. रूस दोनों देशों के मजबूत रणनीतिक रिश्तों को देखते हुए इस मुद्दे पर आगे बातचीत के लिए तैयार है. उन्होंने बताया कि इस विषय पर दोनों देशों के बीच पहले से चर्चा चल रही है.
यूक्रेन युद्ध पर भी मोदी को जानकारी देंगे पुतिन
पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात में रूस-यूक्रेन संघर्ष का मुद्दा भी उठ सकता है. पेस्कोव ने कहा कि रूस युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है और इसे खत्म करने की कोशिशों में भारत की किसी भी पहल का स्वागत करेगा.
रूस का कहना है कि संघर्ष को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से खत्म करने की दिशा में भारत की भूमिका अहम हो सकती है. पुतिन प्रधानमंत्री मोदी को युद्ध की मौजूदा स्थिति और इससे जुड़े घटनाक्रम की जानकारी भी दे सकते हैं.
शी जिनपिंग के आने पर अभी तस्वीर साफ नहीं
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना भी जताई जा रही है, हालांकि अभी उनकी यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
वहीं, रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की अमेरिका की प्रस्तावित योजना पर पेस्कोव ने कड़ा विरोध जताया. उन्होंने इसे गैरकानूनी और स्वीकार नहीं किए जाने वाला कदम बताया.
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और रूस इस बात से सहमत हैं कि ब्रिक्स किसी पश्चिमी देश के खिलाफ बनाया गया संगठन नहीं है. इसका मकसद सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है.
रूस और भारत की सोच में कितनी समानता?
यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस ने भारत की सोच का समर्थन किया है. पेस्कोव के मुताबिक दोनों देश संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं. भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए युद्ध खत्म करने की बात करता रहा है.
ऐसे में पुतिन की भारत यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत अहम मानी जा रही है.
ब्रह्मोस मिसाइल में भी होंगे नए बदलाव
भारत और रूस मिलकर ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम पर भी काम कर रहे हैं. पेस्कोव ने बताया कि दोनों देश मिसाइल में नई क्षमताएं जोड़ने और इसे पहले से ज्यादा प्रभावी बनाने पर काम कर रहे हैं.
ब्रह्मोस भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में सबसे सफल संयुक्त परियोजनाओं में से एक है. इसके नए रूप और बढ़ी क्षमताओं को लेकर दोनों देशों का सहयोग आगे भी जारी रहने की उम्मीद है.
Su-57 क्यों है भारत के लिए खास?
Su-57 रूस का पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है. इसमें स्टील्थ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे दुश्मन के रडार के लिए इसे पकड़ना मुश्किल हो जाता है.
अगर भारत और रूस के बीच Su-57 को लेकर कोई बड़ी सहमति बनती है तो इससे दोनों देशों के रक्षा रिश्ते और मजबूत हो सकते हैं. खास बात यह है कि भारत केवल विमान खरीदने के बजाय उसके निर्माण से जुड़ी तकनीक में भी रुचि रखता है. ऐसे में पुतिन के दौरे के दौरान इस मुद्दे पर होने वाली बातचीत पर सबकी नजर रहेगी.
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