नई दिल्ली: भारत और रूस के रिश्तों को नई दिशा देने वाली एक अहम मुलाकात जल्द होने जा रही है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आने वाले हैं और इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक होगी. माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत का केंद्र व्यापार, आर्थिक सहयोग और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना होगा.
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पुतिन की भारत यात्रा से पहले इस बैठक को लेकर अहम जानकारी साझा की है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के नेताओं के बीच बेहद करीबी और व्यावहारिक संबंध हैं, जिसकी वजह से वे द्विपक्षीय रिश्तों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी खुलकर बातचीत कर सकते हैं.
भारत-रूस संबंधों पर होगी व्यापक चर्चा
पेस्कोव के मुताबिक, पुतिन की भारत यात्रा दोनों देशों को अपने द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का अवसर देगी. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच व्यक्तिगत संबंधों को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया. उनके अनुसार, दोनों नेताओं के बीच बातचीत ईमानदार और रचनात्मक रहती है, जिससे सहयोग के नए रास्ते तलाशने में मदद मिलती है.
रूस ने नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए भारत को शुभकामनाएं भी दी हैं. भारत 12 और 13 सितंबर 2026 को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है, जिसमें सदस्य देशों के बीच आर्थिक, वित्तीय, राजनीतिक और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा होने की उम्मीद है.
यूक्रेन संकट के शांतिपूर्ण समाधान पर भी भारत की भूमिका
भारत की कूटनीतिक भूमिका को लेकर भी रूस ने सकारात्मक रुख दिखाया है. रूस ने यूक्रेन संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान तलाशने की कोशिशों में भारत के योगदान देने की इच्छा का स्वागत किया है. ऐसे में मोदी-पुतिन मुलाकात के दौरान वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर भी चर्चा होने की संभावना है. भारत लंबे समय से यूक्रेन संकट के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का समर्थन करता रहा है. ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक में इस मुद्दे पर भी नजरें टिकी रहेंगी.
न्यूक्लियर पावर और Su-57 पर भी होगी बातचीत
मोदी-पुतिन बैठक का एजेंडा केवल व्यापार और आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहने वाला है. रूस भारत के साथ नए न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने को लेकर बातचीत आगे बढ़ाना चाहता है. पेस्कोव ने संकेत दिया है कि परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के एजेंडे में अहम स्थान रखता है. इसके अलावा रूस के Su-57 फाइटर जेट की भारत को संभावित बिक्री का मुद्दा भी बातचीत में शामिल हो सकता है. ऐसे में बैठक के दौरान रक्षा सहयोग से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों या नई संभावनाओं पर भी नजर रहेगी.
BRICS में वित्तीय सहयोग पर रूस का जोर
रूस ने ब्रिक्स के वित्तीय क्षेत्र में सहयोग को भी बेहद अहम बताया है. पेस्कोव ने कहा कि रूस और ब्रिक्स देशों के बीच भुगतान तथा लेनदेन में राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल का स्तर काफी बढ़ा है. उनके मुताबिक, रूस के ब्रिक्स देशों के साथ होने वाले करीब 90 प्रतिशत भुगतान और लेनदेन अब राष्ट्रीय मुद्राओं में किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि रूस सभी स्वीकार्य भुगतान माध्यमों के लिए तैयार है, लेकिन कुछ देशों द्वारा अपनी राष्ट्रीय मुद्रा के जरिए राजनीतिक दबाव और प्रतिबंध लगाने की स्थिति में वैकल्पिक भुगतान व्यवस्थाओं का महत्व बढ़ जाता है.
भारत के लिए क्यों अहम है पुतिन का दौरा?
पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दोनों देश व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, परमाणु सहयोग और वित्तीय लेनदेन समेत कई क्षेत्रों में अपने संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत को वैश्विक मंच पर विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच अपनी भूमिका मजबूत करने का अवसर भी देगी.
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