भोपाल: मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक कई महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसलों की गवाह बनी. इस बैठक में कृषि, उद्योग, शहरी विकास और डिजिटल प्रशासन जैसे क्षेत्रों को गति देने के लिए कई नीतिगत बदलावों पर मुहर लगाई गई. सरकार का फोकस स्पष्ट रूप से जनकल्याण, रोजगार सृजन और आर्थिक ढांचे को मजबूत करने पर रहा.
कपास पर मंडी शुल्क में कटौती
कैबिनेट ने कपास पर मंडी फीस को 1% से घटाकर 0.5% करने का निर्णय लेकर किसानों और जिनिंग उद्योग को बड़ी राहत दी है. इस फैसले से प्रदेश की लगभग 158 जिनिंग मिलों को सीधा लाभ मिलेगा और उत्पादन लागत में कमी आएगी. सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिलेगी और पड़ोसी राज्यों की ओर होने वाला पलायन भी रुकेगा.
मंडी शुल्क संरचना में बदलाव
बैठक में केवल कपास ही नहीं, बल्कि सामान्य मंडी शुल्क में भी संशोधन किया गया है. इसे एक रुपये से बढ़ाकर 1.50 रुपये किया गया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस बढ़ी हुई राशि का एक बड़ा हिस्सा सीधे किसान कल्याण योजनाओं, सड़क निर्माण और कृषि अधोसंरचना विकास में लगाया जाएगा.
किसान सड़क निधि और कृषि विकास को मिलेगा फंड
नई व्यवस्था के तहत लगभग 500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय का उपयोग ग्रामीण सड़क नेटवर्क, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और कृषि प्रसंस्करण इकाइयों के विकास में किया जाएगा. इसके साथ ही कृषि अनुसंधान और आधुनिक तकनीक के विस्तार को भी प्राथमिकता दी जाएगी ताकि किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि सुनिश्चित की जा सके.
भोपाल मेट्रो परियोजना को मिली नई रफ्तार
राज्य सरकार ने भोपाल मेट्रो रेल परियोजना की संशोधित लागत को मंजूरी देकर शहरी परिवहन सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. परियोजना की लागत अब बढ़कर 10,033.62 करोड़ रुपये हो गई है. इससे राजधानी में तेज, आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल परिवहन प्रणाली विकसित होने की उम्मीद है.
मेट्रो परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्तीय व्यवस्था
कैबिनेट ने मेट्रो परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों को भी मंजूरी दी है. इसमें केंद्र और राज्य सरकार की इक्विटी, बैंक ऋण और अन्य वित्तीय संस्थानों से मिलने वाली राशि शामिल है. सरकार का लक्ष्य है कि यह परियोजना तय समय में पूरी हो और शहर के ट्रैफिक दबाव को कम किया जा सके.
डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने की पहल
राज्य आईटी संवर्ग परामर्श सेवाओं के लिए 235.63 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है. यह योजना राज्य में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को गति देने के साथ-साथ ई-गवर्नेंस प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी. इसका उद्देश्य प्रशासन को तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाना है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा पर जोर
आईटी योजना के तहत राज्य में एआई, बिग डेटा एनालिटिक्स और साइबर सुरक्षा जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों को मजबूत किया जाएगा. इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी बल्कि राज्य को डिजिटल इंडिया के लक्ष्यों के करीब लाने में भी मदद मिलेगी.
अधिकारियों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास पर फोकस
सरकार ने आईटी और ई-गवर्नेंस प्रशिक्षण के लिए 55.43 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं. इसके तहत अधिकारियों और कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण देकर उनकी तकनीकी क्षमता को बढ़ाया जाएगा. इससे सरकारी कामकाज अधिक तेज और प्रभावी हो सकेगा.
कृषि उपार्जन और वित्तीय गारंटी पर बड़ा फैसला
कैबिनेट ने आगामी विपणन वर्षों में गेहूं, धान और मोटे अनाजों के उपार्जन के लिए 8,600 करोड़ रुपये की शासकीय प्रत्याभूति देने की मंजूरी दी है. इसके अलावा एमपी स्टेट सिविल सप्लाई कारपोरेशन के लिए 29,500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त गारंटी को भी स्वीकृति मिली है.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि बाजार को मजबूती
इन वित्तीय फैसलों का उद्देश्य कृषि उपज खरीद प्रणाली को मजबूत बनाना और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलेगी और कृषि बाजार अधिक संगठित ढंग से काम कर सकेगा.
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