Artificial Intelligence: डिएगो फेलिक्स डॉस सैंटोस ने कभी सोचा भी नहीं था कि वह अपने पिता की आवाज़ फिर से सुन पाएंगे. पिता के जाने के बाद बचा केवल एक वॉयस नोट था, जिसे सुनकर वह अपने पिता की यादों में खो जाते थे. लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से यह मुमकिन हो पाया है. उन्होंने अपने पिता की आवाज़ से नए संदेश बनवाए, जिससे वह ऐसा महसूस करते हैं मानो पिता सच में उनके सामने हों.
AI ने जीवंत की यादें
डॉस सैंटोस ने जुलाई में Eleven Labs नामक AI प्लेटफॉर्म का सहारा लिया. इस वॉयस जेनरेटर टूल के ज़रिए उन्होंने केवल 22 डॉलर मासिक शुल्क देकर पिता की आवाज़ से नए संदेश तैयार करवाए. अब जब वे ऐप पर पिता की आवाज़ सुनते हैं, तो वह पल जैसे सच में जी उठा हो. पिता की आदत, आवाज़ का टोन और यहां तक कि उनके द्वारा दिया गया निकनेम “बॉसी” भी बिल्कुल वैसे ही सुनाई देता है.
परिवार की सोच और बदलाव
शुरुआत में धार्मिक और सांस्कृतिक कारणों से परिवार ने इस तकनीक को स्वीकार करने में हिचकिचाहट दिखाई. पर समय के साथ परिवार ने इसे अपनाया और अब डॉस सैंटोस और उनकी पत्नी भी सोच रहे हैं कि वे अपने डिजिटल वॉइस क्लोन बनवाएं ताकि उनके जाने के बाद भी परिवार उनके साथ जुड़ा रहे.
‘Grief Tech’ का उभरता क्षेत्र
यह कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं है, बल्कि “Grief Tech” नामक नए क्षेत्र की झलक है. यह वह तकनीक है जो प्रियजनों के जाने के बाद शोक में डूबे लोगों को भावनात्मक सहारा देती है. अमेरिका में StoryFile और HereAfter AI जैसी कंपनियां इस दिशा में काम कर रही हैं. 2024 में लॉन्च हुई Eternos कंपनी के फाउंडर रॉबर्ट लोकेसियो ने भी इस तकनीक को आगे बढ़ाया है, जहां 400 से अधिक लोग अपने डिजिटल अवतार बना चुके हैं.
नैतिक और भावनात्मक पहलू
हालांकि यह तकनीक शोक से उबरने का नया रास्ता खोलती है, लेकिन इसके साथ नैतिक सवाल भी उठते हैं. डेटा की सुरक्षा, सहमति, और व्यावसायिक दांव-पेंच जैसे मुद्दे चर्चा का विषय बने हुए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक सांत्वना जरूर देती है, लेकिन क्या यह वास्तविक शोक की प्रक्रिया को प्रभावित तो नहीं कर रही?
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