Auraiya News: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से सामने आई एक घटना ने हर किसी को हैरान कर दिया है. जिस व्यक्ति को परिवार ने मृत समझकर पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम विदाई दे दी, वही कुछ दिनों बाद अचानक अपने घर के दरवाजे पर खड़ा मिला. यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसा वास्तविक मामला है जिसने पुलिस जांच, शव की पहचान की प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सबसे बड़ा रहस्य यह बन गया है कि आखिर जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह किसका था और पहचान में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?
हाईवे किनारे मिला था अज्ञात शव
पूरा मामला अजीतमल कोतवाली क्षेत्र के भीखेपुर नेशनल हाईवे से जुड़ा है. 18 जुलाई को पुलिस को सड़क किनारे एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. मृतक की पहचान कराने के लिए पुलिस ने शव की तस्वीरें सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर भी साझा कीं, ताकि परिजन सामने आ सकें.
परिवार ने शव को कमल सिंह मान लिया
करीब दो दिन बाद सैदपुर अड्डा निवासी दशरथ पुलिस के पास पहुंचे और उन्होंने शव की पहचान अपने छोटे भाई कमल सिंह के रूप में की. पुलिस ने पहचान के आधार पर आगे की सभी औपचारिकताएं पूरी कीं और पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को सौंप दिया. अगले ही दिन पूरे धार्मिक रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया. परिवार शोक में डूबा था और घर में शांति पाठ की तैयारियां चल रही थीं.
पत्नी को नहीं हुआ यकीन
जहां पूरा परिवार कमल सिंह की मौत को स्वीकार कर चुका था, वहीं उसकी पत्नी सुनीता को शुरुआत से ही इस बात पर भरोसा नहीं था कि मिला हुआ शव उसके पति का है. परिवार के लोगों ने बताया कि कमल सिंह के पास अपना मोबाइल फोन नहीं था, लेकिन वह समय-समय पर एक परिचित के नंबर से अपनी पत्नी से बातचीत करता रहता था.
सुनीता ने उसी नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की और हैरानी की बात यह रही कि दूसरी तरफ से खुद कमल सिंह ने फोन उठाया. जब उसे बताया गया कि परिवार ने उसे मृत मान लिया है और उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है, तो वह खुद भी यह सुनकर स्तब्ध रह गया.
ग्वालियर से सीधे गांव पहुंचा कमल
पूरी घटना की जानकारी मिलने के बाद कमल सिंह बिना देर किए ग्वालियर से अपने गांव के लिए रवाना हो गया. जैसे ही वह घर पहुंचा, वहां शांति पाठ का आयोजन चल रहा था. दरवाजे पर उसे देखकर पहले तो लोगों को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ. कुछ पल के लिए पूरा माहौल सन्नाटे में बदल गया और फिर घर में अफरा-तफरी मच गई. जिन लोगों ने कुछ दिन पहले उसकी अंतिम यात्रा में हिस्सा लिया था, वे अब उसे अपने सामने जीवित देखकर अवाक रह गए.
पुलिस भी रह गई हैरान
कमल सिंह के घर पहुंचने की सूचना मिलते ही अजीतमल पुलिस भी मौके पर पहुंची. पुलिस अधिकारियों ने कमल सिंह और उसकी पत्नी से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. शुरुआती जांच में सामने आया कि कमल सिंह करीब डेढ़ साल से घर से बाहर रहकर मजदूरी कर रहा था. पहले उसने पंजाब में काम किया, फिर ट्रक पर हेल्पर बना और हाल के दिनों में ग्वालियर में प्लंबर के रूप में काम कर रहा था. बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले वह अपनी ससुराल भी गया था, लेकिन वहां कोई नहीं मिला, जिसके बाद वह वापस ग्वालियर लौट गया था.
ये भी पढ़ें: 'न कर्फ्यू, न दंगा... सब चंगा', मैनपुरी में सीएम योगी का सपा पर सीधा हमला, 682 करोड़ की योजनाओं की भी दी सौगात