Mahashivratri: महादेव की नगरी वाराणसी इन दिनों महाशिवरात्रि की तैयारियों में डूबी हुई है. काशी विश्वनाथ मंदिर में उत्सव जैसा माहौल है. महाशिवरात्रि से पहले यहां बाबा विश्वनाथ की हल्दी की रस्म निभाई गई, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे.
शादी से पहले जैसे दूल्हे-दुल्हन को हल्दी लगाई जाती है, उसी परंपरा के तहत बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती की अचल प्रतिमा पर हल्दी चढ़ाई गई. महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाए और पूरे मंदिर परिसर में भक्तिभाव का माहौल नजर आया. इस रस्म का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है.
डमरू, शंख और 'हर-हर महादेव' के जयकारे
हल्दी की रस्म के दौरान डमरुओं की थाप और शंखनाद के बीच “हर-हर महादेव” के जयकारे गूंजते रहे. हल्दी के रंग में रंगे बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर भक्त भावुक होते दिखे. मंदिर परिसर में शिवभक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला.
महाशिवरात्रि पर 26 घंटे खुले रहेंगे कपाट
इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी. इसी दिन सुबह 4 बजे मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे. भक्त इस दौरान बाबा के दर्शन कर जलार्पण कर सकेंगे और झांकियों के दर्शन भी होंगे.
खास बात यह है कि महाशिवरात्रि के मौके पर बाबा के कपाट लगातार करीब 26 घंटे खुले रहेंगे. कपाट 16 फरवरी की सुबह 6 बजे तक खुले रहेंगे, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु भी दर्शन कर सकें.
महाशिवरात्रि के बाद 27 फरवरी को एक और महत्वपूर्ण आयोजन होगा. इस दिन बाबा विश्वनाथ की अचल प्रतिमा महंत आवास से मंदिर तक मां गौरा के गौना के साथ लाई जाएगी. इस परंपरा को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है.
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