Maharashtra BMC Election: महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय राजनीति का आज सबसे अहम दिन है. राज्य के 29 नगर निगमों में हुए चुनावों के नतीजे आज घोषित किए जाएंगे. कुल 893 वार्डों के लिए मतदान हुआ था, जिसमें 15,931 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई है. चुनाव आयोग के अनुसार सुबह 10 बजे से मतगणना शुरू होगी, जबकि दोपहर बाद परिणाम आने की संभावना है.
इन चुनावों को लेकर राजनीतिक हलकों में जबरदस्त उत्सुकता है, क्योंकि कई बड़े शहरों की सत्ता का फैसला आज होने जा रहा है.
BMC चुनाव पर सबसे ज्यादा नजरें
इन नगर निगमों में सबसे ज्यादा चर्चा बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को लेकर है, जिसे देश ही नहीं बल्कि एशिया की सबसे बड़ी नगर निकाय माना जाता है. मुंबई को कुल 227 वार्डों में बांटा गया है और यहां बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है.
मतगणना से ठीक पहले आए तीन एग्जिट पोल में अनुमान जताया गया है कि भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना का गठबंधन बीएमसी में बहुमत हासिल कर सकता है.
एग्जिट पोल के मुताबिक:
हालांकि, असली तस्वीर मतगणना के बाद ही साफ होगी.
चार साल की देरी से हुए नगर निगम चुनाव
महाराष्ट्र में नगर निगम चुनाव आमतौर पर हर पांच साल में कराए जाते हैं. बीएमसी का पिछला चुनाव 2017 में हुआ था, ऐसे में अगला चुनाव 2022 में होना था.
लेकिन उस समय वार्ड परिसीमन और निर्वाचन प्रक्रिया में बदलाव का काम चल रहा था, जिसके चलते चुनाव टाल दिए गए.
दरअसल, बीएमसी में वार्डों की संख्या 227 से बढ़ाकर 236 करने का प्रस्ताव था. नए वार्ड नक्शे और सीटों के पुनर्विन्यास के कारण पुरानी संरचना पर चुनाव कराना संभव नहीं था. हालांकि, यह प्रस्ताव बाद में पास नहीं हो सका, लेकिन तब तक चुनाव में करीब चार साल की देरी हो चुकी थी.
BMC में किसने किसके साथ मिलाया हाथ?
बीएमसी की 227 सीटों पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा. भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) ने मिलकर चुनाव लड़ा
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने मनसे के साथ गठबंधन किया
कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के साथ गठबंधन किया
एनसीपी (अजित पवार गुट) ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया. कुल 94 सीटों पर उम्मीदवार उतारे
इस तरह बीएमसी चुनाव में लगभग सभी बड़े राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी.
BMC चुनाव क्यों बना साख की लड़ाई?
बीएमसी चुनाव सिर्फ नगर निगम का चुनाव नहीं है, बल्कि मुंबई की सत्ता पर पकड़ का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि यह चुनाव महायुति और महाविकास अघाड़ी, दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है.
करीब 74,000 करोड़ रुपये के बजट वाली बीएमसी एशिया की सबसे बड़ी सिविक बॉडी है. दिलचस्प बात यह है कि इसका बजट गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा जैसे कई राज्यों के कुल बजट से भी अधिक है.
1997 से 2017 तक, यानी 20 वर्षों तक अविभाजित शिवसेना ने बीएमसी पर शासन किया था, उस समय भाजपा उसकी सहयोगी पार्टी थी. लेकिन अब शिवसेना के दो गुटों में बंटने के बाद मुकाबला कहीं ज्यादा दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण हो गया है.
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