भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए लैंड पूलिंग एक्ट को वापस ले लिया है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है. इस एक्ट को सिंहस्थ 2028 के आयोजन की तैयारी के मद्देनजर लाया गया था, लेकिन भारतीय किसान संघ और राज्य के भाजपा विधायक इसका विरोध कर रहे थे. इस फैसले के बाद किसान संगठन ने इसे एक सकारात्मक कदम बताया है और सरकार की सराहना की है.
सिंहस्थ 2028 के लिए लाया गया था लैंड पूलिंग एक्ट
साल 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ मेले के आयोजन को लेकर सरकार ने बड़े पैमाने पर विकास योजनाओं की शुरुआत की थी. उज्जैन विकास प्राधिकरण के तहत लाए गए लैंड पूलिंग एक्ट का उद्देश्य किसानों की भूमि का विकास कर उसे मेले के आयोजन के लिए उपयुक्त बनाना था. इसके तहत सरकार ने किसानों को एक साथ दो फायदे देने का आश्वासन दिया था— एक तो भूमि का विकास और दूसरा, भूमि के बदले मुआवजा.
किसानों का विरोध और सरकार का निर्णय
हालांकि, लैंड पूलिंग एक्ट को लेकर किसानों के बीच असंतोष था. उन्हें यह योजना पूरी तरह से संतोषजनक नहीं लगी, और विरोध तेज हो गया. भारतीय किसान संघ ने पहले ही सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर यह एक्ट वापस नहीं लिया गया, तो वे 26 दिसंबर से उज्जैन में "घेरा डालो, डेरा डालो" आंदोलन शुरू करेंगे, जिसमें हजारों किसान शामिल होने की योजना बना रहे थे.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले ही इस एक्ट को समाप्त करने का संकेत दिया था, और अब सरकार ने औपचारिक रूप से आदेश जारी कर दिया है कि सिंहस्थ 2028 का आयोजन उसी तरीके से होगा, जैसा 2016 में हुआ था. इस निर्णय के बाद सरकार ने लैंड पूलिंग एक्ट को पूरी तरह निरस्त कर दिया है.
सरकार का नया आदेश और किसान संगठन की प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश सरकार के नगरीय विकास और आवास विभाग की ओर से जारी आदेश में उप सचिव सी के साधव ने कहा कि सरकार द्वारा प्रस्तावित नगर विकास सीमा स्कीम को अब पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है. इस आदेश के बाद, सिंहस्थ 2028 के आयोजन की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा, और उज्जैन विकास प्राधिकरण के माध्यम से पूर्ववर्ती योजना के तहत ही मेले का आयोजन किया जाएगा.
भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी भारत सिंह देश ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि अगर सरकार अपना आदेश वापस नहीं लेती तो वे आगामी आंदोलन के लिए तैयार थे. उन्होंने कहा कि अब किसानों को अपनी भूमि के लिए कोई अतिरिक्त दबाव नहीं होगा और सरकार का यह निर्णय किसानों के पक्ष में है.
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