MP News: मध्य प्रदेश में नाम बदलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. पिछले कुछ वर्षों से सरकार लगातार जिलों, शहरों, गांवों और यहां तक कि इमारतों के नामों में बदलाव कर रही है. हाल ही में अलीराजपुर जिले का नाम बदलकर "आलीराजपुर" कर दिया गया है. इस बदलाव की आधिकारिक अधिसूचना राज्य सरकार के राजस्व विभाग ने जारी कर दी है. नाम बदलने के इस कदम ने राजनीतिक बहस को भी जन्म दे दिया है.
नाम बदलने की वजह और पुराना विवाद
अलीराजपुर जिले का नाम बदलने की मांग साल 2012 से उठ रही थी. स्थानीय लोगों और संगठनों ने जिला योजना समिति की बैठक में इसे सही उच्चारण और सांस्कृतिक भावनाओं के आधार पर बदलने का सुझाव दिया था. उस वक्त यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हो गया था. अब तक इस पर लंबा इंतजार हुआ, लेकिन अंततः राज्य सरकार ने गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद इस नाम बदलाव को अंतिम रूप दे दिया. हालांकि, विपक्ष के वरिष्ठ नेता इसे राजनीति से प्रेरित कदम बता रहे हैं.
भाजपा सरकार की नामकरण नीति
बीते 22 वर्षों में भाजपा की सरकार ने कई मुस्लिम नामों वाले इलाकों के नाम बदलने का काम किया है. मध्य प्रदेश में यह सिलसिला तब से शुरू हुआ जब 2008 में झाबुआ जिले से नया अलीराजपुर जिला बनाया गया. इसके बाद कई नाम बदले गए, जिनमें प्रमुख हैं:
मुख्यमंत्री मोहन यादव के नामकरण के फैसले
जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उज्जैन के बड़नगर में स्थित मौलाना गांव का नाम बदलकर विक्रम नगर रखा था. उन्होंने गजनी खेड़ी का नाम चामुंडा माता और जहांगीरपुर का नाम जगदीशपुर किया. इसके अलावा शाजापुर जिले के 11 स्थानों के नाम भी बदलने की घोषणा की गई, जिनमें प्रमुख हैं:
नाम बदलने के फैसले पर राजनीतिक विवाद
जहां सरकार इसे सांस्कृतिक और भाषाई कारणों से सही मानती है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति बता रहा है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि नाम बदलने के इस कदम से समाज में नकारात्मक भावनाएं उत्पन्न हो रही हैं और यह राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया एक कदम है.
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