Madhaura Rail Engine In Guinea: सारण जिले के मढ़ौरा में स्थित रेल इंजन निर्माण संयंत्र एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है. इस संयंत्र में निर्मित लोकोमोटिव्स अब अफ्रीकी देश गिनी में सफलतापूर्वक संचालन में हैं. इस सफलता से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और लोग इसे गर्व की बात बता रहे हैं.
झांझारपुर के विधायक और पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर यह वीडियो साझा करते हुए खुशी जाहिर की. उन्होंने लिखा कि मढ़ौरा में निर्मित ये लोकोमोटिव्स पहली बार बिहार से निकलकर विश्व के किसी अन्य देश में सफलतापूर्वक संचालन में हैं.
“अफ्रीकी देश गिनी में सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं मढ़ौरा निर्मित लोकोमोटिव्स”
— Nitish Mishra (@mishranitish) December 18, 2025
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मुझे इस वीडियो को देखकर अत्यधिक प्रसन्नता हुई है कि पहली बार बिहार में बने रेल इंजन विश्व के किसी दूसरे देश में चल रहे हैं। सारण जिलान्तर्गत मढ़ौरा स्थित WLPL Marhowra Locomotive… pic.twitter.com/bVvq83u4RI
नीतीश मिश्रा ने क्या कहा?
पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा अपने पोस्ट में लिखा, "अफ्रीकी देश गिनी में सफलतापूर्वक मढ़ौरा निर्मित लोकोमोटिव्स संचालित हो रहे हैं. मुझे इस वीडियो को देखकर अत्यधिक प्रसन्नता हुई है कि पहली बार बिहार में बने रेल इंजन विश्व स्तर पर दौड़ रहे हैं. सारण जिले के मढ़ौरा स्थित WLPL Marhowra Locomotive Plant (अमेरिकी कंपनी Wabtec और भारत सरकार के रेल मंत्रालय का संयुक्त उपक्रम) में निर्मित ये लोकोमोटिव्स गिनी में सफलतापूर्वक चल रहे हैं."
‘Make in India’ से ‘Make for the World’ तक
विधायक ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जमकर प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि यह बिहार के लिए गर्व का क्षण है और यह दिखाता है कि भारत में बने उत्पाद अब केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विश्व स्तर पर भारत का नाम और तकनीकी दक्षता बढ़ा रहे हैं. नीतीश मिश्रा ने लिखा:
"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के कुशल नेतृत्व में 'Make in India' से आगे बढ़कर 'Make for the World' की दिशा में बिहार की धरती विश्व की प्रगति का इंजन बन रही है."
पीएम मोदी ने किया रेल इंजनों का उद्घाटन
इस परियोजना का औपचारिक उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 जून 2025 को सारण दौरे के दौरान किया था. उसी दिन मढ़ौरा संयंत्र में निर्मित रेल इंजनों की पहली खेप को अफ्रीकी देश गिनी के लिए रवाना किया गया. इसके पहले, 26 मई 2025 को गिनी के तीन मंत्री इस संयंत्र का दौरा कर चुके थे.
‘कोमो डील’ और बड़े आर्थिक महत्व
मढ़ौरा रेल इंजन कारखाने और गिनी के बीच हुए इस सौदे को ‘कोमो डील’ के नाम से जाना जा रहा है. इसके तहत तीन हजार करोड़ रुपये की लागत से 140 लोकोमोटिव इंजनों की आपूर्ति तय हुई है. यह समझौता भारत की रेल निर्माण तकनीक और बिहार की औद्योगिक क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि मढ़ौरा संयंत्र का यह उपलब्धि भारत के रेल इंजन निर्माण और निर्यात क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी. यह न केवल रोजगार सृजन में मदद करेगा बल्कि भारतीय उद्योग की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में भी मजबूती लाएगा.
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