नागौर (राजस्थान): भारत में अब लिथियम के आयात पर निर्भरता खत्म करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है. राजस्थान के नागौर जिले में स्थित डेगाना क्षेत्र में लिथियम के विशाल भंडार का पता चला है. यह खोज भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, खासकर बैटरी उत्पादन में.
डेगाना की रेवंत पहाड़ियों में अनुमानित रूप से करीब 14 मिलियन टन लिथियम मौजूद है. लिथियम को 'व्हाइट गोल्ड' कहा जाता है क्योंकि यह एक दुर्लभ, मूल्यवान और ऊर्जा स्टोरेज में इस्तेमाल होने वाली धातु है. इसका उपयोग मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), और रिचार्जेबल बैटरियों के निर्माण में किया जाता है.
चीन पर निर्भरता होगी खत्म
भारत वर्तमान में लिथियम की आपूर्ति के लिए लगभग 70-80% तक चीन पर निर्भर है. लेकिन नागौर में मिले इस भंडार के बाद यह स्थिति बदल सकती है. घरेलू उत्पादन से भारत लिथियम आयात पर निर्भरता कम कर सकता है और बैटरी निर्माण जैसे उद्योगों को बढ़ावा दे सकता है.
औद्योगिक विकास और रोजगार में होगी वृद्धि
इस खोज से न केवल राजस्थान के राजस्व में इजाफा होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे. जैसे ही खनन कार्य शुरू होगा, इससे संबंधित उद्योगों, तकनीकी विशेषज्ञों, और निर्माण कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर मानव संसाधन की आवश्यकता होगी.
खनन के लिए नीलामी प्रक्रिया शुरू
भारत सरकार के खनन मंत्रालय ने इस लिथियम भंडार के दोहन के लिए नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी है. इच्छुक कंपनियों के लिए बोली लगाने की अंतिम तिथि 1 दिसंबर 2025 तय की गई है. इसके बाद खनन अधिकार प्रदान करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
लिथियम: हल्की और प्रतिक्रियाशील धातु
लिथियम का रासायनिक प्रतीक Li है. यह सबसे हल्की धातु मानी जाती है और चांदी जैसी सफेद, चमकदार होती है. इसकी एक विशेषता यह भी है कि यह वायु में ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही तेज़ प्रतिक्रिया करता है, जिससे यह आग पकड़ सकता है. यही कारण है कि इसे विशेष सावधानी से हैंडल किया जाता है.
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