गाजा पीस प्लान पर ट्रंप को मिला भारत का साथ, पीएम मोदी ने किया स्वागत, अब खत्म होगा इजरायल-हमास युद्ध!

अमेरिका ने गाजा में इजरायल और हमास के बीच जारी हिंसा को समाप्त करने के लिए एक व्यापक शांति रूपरेखा (20‑बिंदु) पेश की है और अब इस पहल को भारत का भी सार्वजनिक समर्थन मिल गया है.

Trump gets Indias support on Gaza peace plan
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

अमेरिका ने गाजा में इजरायल और हमास के बीच जारी हिंसा को समाप्त करने के लिए एक व्यापक शांति रूपरेखा (20‑बिंदु) पेश की है और अब इस पहल को भारत का भी सार्वजनिक समर्थन मिल गया है. अमेरिकी प्रस्ताव और उसके आसपास बन रही कूटनीतिक गतिशीलता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेज प्रतिक्रिया उकसाई है. इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए अमेरिका की कोशिशों के साथ एकजुटता का संकेत दिया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित गाजा शांति योजना का स्वागत किया और कहा कि यह पहल फिलिस्तीन व इजरायल दोनों ओर के लोगों के साथ‑साथ पश्चिम एशिया क्षेत्र के व्यापक शांति, सुरक्षा और विकास के लिए एक व्यवहार्य रास्ता दिखाती है. मोदी ने उम्मीद जताई कि सभी संबंधित पक्ष इस पहल के समर्थन में आगे आएँगे ताकि संघर्ष को समाप्त करके स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त किया जा सके.

किन देशों ने समर्थन दिया?

भारत के अलावा कई देशों ने भी ट्रम्प के प्रस्ताव का स्वागत किया. क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर कुछ प्रमुख देशों ने इस दिशा में सकारात्मक रुख अपनाया है, जिनमें क़तर, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र के प्रतिनिधियों ने बदस्तूर किसी न किसी रूप में सहयोग या समर्थन का संकेत दिया. (नोट: उपर्युक्त सूची उन्हीं देशों पर आधारित है जो सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दे चुके हैं.)

क्या कहता है 20‑बिंदु वाला एजेंडा?

ट्रंप द्वारा पेश की गई रूपरेखा में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं जिनका उद्देश्य युद्धविराम, बंधकों की रिहाई, गाजा का पुनर्निर्माण और दीर्घकालिक सुरक्षा व्यवस्था है. प्लान के प्रमुख अंशों का संक्षेप इस प्रकार है:

त्वरित बंधक रिहाई: यदि दोनों पक्ष सहमत हों तो 72 घंटों के भीतर शेष बंधकों की रिहाई का प्रावधान है.

कैदियों का आदान‑प्रदान: योजना में कुछ कैदियों की रिहाई और व्यापक कैदी अदला‑बदली के प्रावधान बताए गए हैं.

निरस्त्रीकरण: गाजा में सशस्त्र ढाँचों का विघटन और हथियारों का नियंत्रण सुनिश्चित किया जाना है, ताकि क्षेत्र भविष्य में खतरा न बने.

अस्थायी शांति‑प्रशासन: युद्ध के बाद गाजा के रोजमर्रा के प्रशासन और पुनर्निर्माण के लिए एक अस्थायी शांति बोर्ड गठित किया जाएगा. इस बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में प्रस्ताव में ट्रंप का नाम सामने आया है और इसमें अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भागीदारी होने का उल्लेख है.

पुनर्निर्माण व आर्थिक सहयोग: गाजा के बुनियादी ढांचे, अस्पतालों, बिजली व ईंधन की आपूर्ति, सड़क नेटवर्क और आवास की बहाली के लिये अंतरराष्ट्रीय निवेश और सहायता की व्यवस्था प्रस्तावित है.

हथियार तथा सुरंग ढाँचे का नाश: सुरंगों और हथियार निर्माण सुविधाओं को हटाने एवं भविष्य में उनका पुनर्निर्माण न हो इसे सुनिश्चित करने के प्रावधान हैं.

आख़िरी लक्ष्य, लोकल स्वशासन: आवश्यक सुरक्षा व राजनीतिक सुधारों के पूरा होने के बाद फिलिस्तीनी नेतृत्व को पूर्ण राजनीतिक और सुरक्षा जिम्मेदारियाँ सौंपने का लक्ष्य रखा गया है.

योजना की परिकल्पना यह है कि मानवीय राहत के साथ‑साथ एक स्पष्ट राजनीतिक सुरक्षा ढाँचे के जरिये स्थायी व्यवस्था लायी जाए.

क्या इस प्रस्ताव से संघर्ष तुरंत खत्म हो जाएगा?

हालांकि इजरायली प्रधानमंत्री ने इस रूपरेखा के साथ समझौते की बात कही है, पर सबसे निर्णायक पक्ष हमास ने अभी तक औपचारिक स्वीकृति नहीं दी है. इसलिए योजना के लागू होने और वास्तविक युद्धविराम के बीच बड़ा अनिर्णय बना हुआ है. अमेरिकी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यदि हमास प्रस्ताव को ठुकराता है तो इजरायल को हमास को हराने के लिये अमेरिका का पूरा समर्थन प्राप्त रहेगा, यानी कूटनीतिक दबाव के साथ मिलकर किसी भी विकल्प को भी सम्भव माना जा रहा है.

भारत-अमेरिका संवाद और भारतीय हित

प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन से इस पहल को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक वैधता मिली है. भारत का सकारात्मक रुख यह दर्शाता है कि देश क्षेत्रीय शांति‑पुनर्निर्माण और मानवीय राहत के लिये अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन कर रहा है. साथ ही भारत की भागीदारी से क्षेत्रीय साझेदारों के बीच संवाद को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

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