Avoid Neck Pain: आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में मोबाइल और लैपटॉप के बिना एक दिन की कल्पना भी मुश्किल है. सुबह आंख खुलते ही फोन चेक करना, ऑफिस या पढ़ाई के लिए घंटों लैपटॉप पर काम करना और फिर मनोरंजन के लिए दोबारा स्क्रीन पर लौट आना, यह सब हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है. लेकिन इस डिजिटल सुविधा की एक बड़ी कीमत भी है, जो धीरे-धीरे हमारे शरीर को चुकानी पड़ रही है.
लंबे समय तक स्क्रीन देखने की वजह से गर्दन लगातार झुकी रहती है और आंखों पर लगातार दबाव पड़ता है. नतीजा यह होता है कि गर्दन में जकड़न, दर्द और आंखों में जलन, भारीपन या थकान महसूस होने लगती है. शुरुआत में लोग इसे मामूली परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय के साथ यही समस्या गंभीर रूप ले सकती है.
स्क्रीन का असर सिर्फ आंखों तक सीमित नहीं
मोबाइल और लैपटॉप का अधिक इस्तेमाल केवल आंखों और गर्दन तक ही नुकसान नहीं पहुंचाता. लगातार स्क्रीन देखने से नींद का पैटर्न भी बिगड़ने लगता है. देर रात तक मोबाइल चलाने की आदत दिमाग को आराम नहीं करने देती, जिससे नींद पूरी नहीं हो पाती. इसके साथ ही सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और थकान की शिकायत आम हो जाती है.
अगर समय रहते इन संकेतों को गंभीरता से न लिया जाए, तो यह दर्द रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करने लगता है. काम पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है और शरीर हमेशा थका हुआ महसूस करता है.
गलत पोस्चर और दूरी से बढ़ता खतरा
फोन को आंखों के बहुत पास लाकर देखने की आदत आंखों पर अतिरिक्त दबाव डालती है. इससे आंखों में सूखापन, जलन और धुंधलापन महसूस हो सकता है. इसके अलावा, काम करते समय कुर्सी और टेबल की ऊंचाई अगर सही न हो, तो गर्दन और पीठ पर सीधा असर पड़ता है.
गलत पोस्चर लंबे समय में मांसपेशियों को कमजोर करता है और दर्द को बढ़ा देता है. इसलिए जरूरी है कि बैठने की स्थिति, स्क्रीन की ऊंचाई और देखने की दूरी पर खास ध्यान दिया जाए.
नज़रअंदाज करने पर हो सकती हैं गंभीर बीमारियां
अगर गर्दन और आंखों के दर्द को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए, तो यह कई गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है. गर्दन में सर्वाइकल पेन, मांसपेशियों में खिंचाव और रीढ़ से जुड़ी दिक्कतें बढ़ सकती हैं. कुछ मामलों में हाथों में झनझनाहट या सुन्नपन भी महसूस होने लगता है.
आंखों की बात करें तो लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की रोशनी कमजोर हो सकती है. ड्राई आई सिंड्रोम, बार-बार सिरदर्द और आंखों में जलन की समस्या आम हो जाती है. नींद की कमी और लगातार तनाव मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है.
छोटी आदतें, बड़ा फायदा
डॉक्टरों का मानना है कि अगर समय रहते कुछ छोटी-छोटी आदतों को सुधार लिया जाए, तो इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है. नियमित अंतराल पर आंखों को आराम देना, स्क्रीन टाइम सीमित रखना और सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल कम करना बेहद फायदेमंद होता है. इसके साथ ही गर्दन और आंखों की हल्की एक्सरसाइज करना, सही दूरी से स्क्रीन देखना और दिनचर्या में डिजिटल ब्रेक शामिल करना शरीर को राहत देता है.
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