दिवाली के मौके पर लोगों ने बाजार में दिल खोलकर खर्च किए पैसे, रिकॉर्ड 6.05 लाख करोड़ रुपये की हुई बिक्री

Diwali 2025: भारत में हर साल दीपावली का त्योहार केवल प्रकाश और उल्लास ही नहीं, बल्कि कारोबार और आर्थिक गतिविधियों का भी पर्व होता है. इस साल भी दीपावली ने देश की बाजारों को रौनक से भर दिया है.

lavishly in the market on the occasion of Diwali with sales reaching a record Rs 6.05 lakh crore
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Diwali 2025: भारत में हर साल दीपावली का त्योहार केवल प्रकाश और उल्लास ही नहीं, बल्कि कारोबार और आर्थिक गतिविधियों का भी पर्व होता है. इस साल भी दीपावली ने देश की बाजारों को रौनक से भर दिया है. व्यापारियों के संगठन कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इस बार दीपावली के मौके पर रिकॉर्ड 6.05 लाख करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज होने की घोषणा की है. यह संख्या पिछले साल की तुलना में करीब 42 प्रतिशत अधिक है, जो इस त्योहार के दौरान उपभोक्ताओं के उत्साह और खरीदारी क्षमता को दर्शाती है.

कैट की रिपोर्ट के मुताबिक इस 6.05 लाख करोड़ रुपये की कुल बिक्री में से लगभग 5.40 लाख करोड़ रुपये उत्पादों की बिक्री से आए हैं, जबकि सेवाओं का हिस्सा 65,000 करोड़ रुपये रहा. यह आंकड़ा बताता है कि सिर्फ वस्तुओं तक ही सीमित नहीं रहकर त्योहार के दौरान यात्रा, आतिथ्य, सजावट, कार्यक्रम आयोजन जैसी सेवाओं में भी तेजी से वृद्धि हुई है.

जीएसटी कटौती और मजबूत उपभोक्ता विश्वास ने बढ़ाई बिक्री

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. सी. भरतिया ने बताया कि हाल ही में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में की गई कटौती ने दीपावली के दौरान खरीदारी को नया बल दिया है. लगभग 72 प्रतिशत व्यापारियों ने इस कटौती को बिक्री बढ़ाने में सबसे बड़ा कारण माना है. इसके साथ ही, उपभोक्ता विश्वास की मजबूती और स्थिर मूल्य ने लोगों को अधिक खर्च करने के लिए प्रेरित किया.

क्षेत्रवार बिक्री में विविधता

दीपावली के दौरान जो बिक्री के क्षेत्र सबसे ज्यादा चमके, उनमें राशन और रोजमर्रा के सामान ने 12 प्रतिशत, सोना और आभूषण 10 प्रतिशत, इलेक्ट्रॉनिक्स और बिजली उपकरण 8 प्रतिशत का योगदान दिया. टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद, रेडिमेड कपड़े, उपहार, घरेलू सजावट, फर्नीचर, मिठाई-नमकीन, कपड़ा, पूजा सामग्री और फल-सूखे मेवे समेत कई अन्य क्षेत्रों ने भी उत्सव के रंगों को आर्थिक रूप से चमकाया.

छोटे व्यवसायों और ग्रामीण क्षेत्रों की वापसी

रोचक बात यह है कि इस साल छोटे व्यापारियों और पारंपरिक बाजारों ने ऑनलाइन शॉपिंग के दबदबे के बीच फिर से अपनी ताकत दिखाई है. मुख्यधारा की खुदरा बिक्री का 85 प्रतिशत हिस्सा गैर-कॉरपोरेट और पारंपरिक बाजारों से आया है, जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के व्यापार को बढ़ावा देता है. इन क्षेत्रों ने कुल बिक्री में 28 प्रतिशत का योगदान किया है.

दीपावली से रोजगार को भी मिला नया विस्तार

उत्सव के कारण व्यापार में बढ़ोतरी ने रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं. इस बार करीब 50 लाख अस्थायी रोजगार सृजित हुए, जो खासकर ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए द्वार खोलने का संकेत है. यह आंकड़ा यह भी दर्शाता है कि त्योहारों का आर्थिक महत्व सिर्फ बिक्री तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि इससे रोजगार और सामाजिक स्थिरता भी जुड़ी होती है.

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