पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले करीब एक महीने से बड़ा विरोध प्रदर्शन चल रहा है. स्थानीय लोग महंगाई, बिजली के बढ़ते बिल और अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं. इसे PoK के इतिहास के सबसे बड़े जन आंदोलनों में से एक बताया जा रहा है.
जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने अब इस आंदोलन को और बड़ा करने का ऐलान किया है. संगठन ने 26 और 27 जुलाई को दो दिन के बड़े मार्च की घोषणा की है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. इस मार्च का मुख्य लक्ष्य मुजफ्फराबाद तक पहुंचना है.
मुजफ्फराबाद तक निकाला जाएगा बड़ा मार्च
आंदोलन से जुड़े नेताओं ने लोगों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से इस प्रदर्शन में शामिल हों और अपनी मांगों को सरकार के सामने रखें.
कार्यकर्ता उमर नजीर कश्मीरी और एडवोकेट ख्वाजा मेहरान ने लोगों से एकजुट होकर आंदोलन में हिस्सा लेने की अपील की है. उन्होंने खास तौर पर डडयाल इलाके में बंद और मीरपुर डिवीजन के लोगों से बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरने को कहा है.
आंदोलनकारियों का कहना है कि अलग-अलग जगहों पर चल रहे धरनों को अब एक साथ जोड़कर बड़ा मार्च निकाला जाएगा. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है.
दो दिन चलेगा बड़ा आंदोलन
आंदोलन की योजना के अनुसार, 26 जुलाई से इसका पहला चरण शुरू होगा. मीरपुर डिवीजन से प्रदर्शनकारियों के काफिले रावलाकोट में चल रहे धरने में शामिल होंगे. इसके बाद 27 जुलाई को नमाज के बाद सभी लोग एक साथ मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करेंगे.
आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका विरोध आम पुलिस या सुरक्षा बलों से नहीं है, बल्कि मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर है.
अपनी मांगों के लिए संघर्ष का दावा
प्रदर्शन के आयोजकों ने साफ किया है कि उनका मकसद किसी तरह की हिंसा या टकराव पैदा करना नहीं है.
उनका कहना है कि वे सरकार से जवाबदेही, आर्थिक राहत और लोगों के अधिकारों की मांग कर रहे हैं. एडवोकेट ख्वाजा मेहरान ने डडयाल के लोगों से 27 जुलाई को बाजार और दुकानें बंद रखने की अपील की है.
उनके मुताबिक, यह आंदोलन इलाके के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसमें शामिल होना चाहिए.
क्यों भड़का है लोगों का गुस्सा?
PoK में लंबे समय से महंगाई, बिजली की समस्या और आर्थिक परेशानियों को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है.
लोगों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतों की चीजें महंगी हो गई हैं और बिजली के बिलों ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इसके अलावा वे प्रशासन से कई अन्य अधिकारों और सुविधाओं की मांग भी कर रहे हैं.
इन्हीं मुद्दों को लेकर डडयाल, रावलाकोट और मुजफ्फराबाद जैसे इलाकों में विरोध तेज हो गया है.
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
आंदोलन बढ़ने के साथ ही स्थानीय प्रशासन पर लोगों की मांगों को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है.
आंदोलन के नेताओं का कहना है कि 26 और 27 जुलाई का यह मार्च PoK में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा और संगठित जन आंदोलन बन सकता है. उनका दावा है कि यह पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन लोगों की मांगों को मजबूती से उठाया जाएगा.
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