Greta Thunberg In Gaza: हाल ही में आयोजित ग्लोबल समूद फ्लोटिला (Global Sumud Flotilla) नामक एक मानवीय संदर्भ की नौकापरिवाह योजना को इज़राइल की नौसेना ने रोक दिया, जिसमें स्वीडन की जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग भी शामिल थीं. इस अंतरराष्ट्रीय अभियाने का उद्देश्य गाजा पट्टी की नाकेबंदी को चुनौती देना और आवश्यक सहायता सामग्री पहुँचाना था. लेकिन शुरुआत से ही मुद्दे उठे कि हिरासत के दौरान कार्यकर्ताओं के साथ किस स्तर के व्यवहार किए गए.
Global Sumud Flotilla लगभग 40‑50 से अधिक जहाजों की काफिला थी, जिसमें लगभग 500 कार्यकर्ता, सांसद, वकील एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल थे. ये जहाज़ स्पेन सहित अन्य देशों से रवाना हुए थे, ताकि गाजा की ओर मानवीय सहायताएँ पहुँचाई जा सकें और समुद्री नाकेबंदी के विरुद्ध आवाज बुलन्द की जा सके. इज़राइल के अनुसार इन जहाजों ने इज़राइल के युद्ध‑क्षेत्र (active combat zone) से बहुत निकट (लगभग 70 नॉटिकल मील) पहुँचने की कोशिश की, जो उसकी तट बंदी नीति का उल्लंघन मानी जा रही थी.
हिरासत में कथित दुर्व्यवहार
कार्यकर्ताओं और प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा लगाये गए कुछ प्रमुख आरोप निम्नलिखित हैं:
अपमानजनक व्यवहार व थाने‑जैसी स्थितियाँ
ग्रेटा थनबर्ग सहित कई कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि हिरासत के समय उन्हें बेडबग्स युक्त कोशिकाओं (cells) में रखा गया, सफाई, पर्याप्त खाना‑पानी और दवाइयों की कमी रही.
शारीरिक प्रताड़ना का आरोप
कुछ कार्यकर्ताओं ने बताया कि थनबर्ग को बालों से खींचा गया, धक्का‑मुक्की की गई, और झंडा पहनने, झंडे को चूमने जैसे कार्यों के लिए मजबूर किया गया. ये क्रियाएँ “प्रदर्शन” या “छवि निर्माण” (public humiliation) के रूप में हुईं, यह आरोप है.
आदर्श सुविधाओं की कमी
हिरासत में रहने वालों ने बताया कि उन्हें वकील से मिलने, शौचालय की सुविधा, पर्याप्त पानी‑भोजन और चिकित्सा सहायता देर से या नहीं दी गई. कुछ ने हैरानी जताई कि उनका संपर्क बाहरी दुनिया से बाधित था, लाइवस्ट्रीमिंग एवं संचार उपकरणों की कार्यक्षमता प्रभावित हुई.
राजनैतिक/प्रचार संबंधी दबाव
आरोप ये भी हैं कि कार्यकर्ताओं को झंडे पकड़ने/चूमने के लिए कहा गया और सुनिश्चित किया गया कि ये क्रियाएँ कैमरों के सामने हों, ताकि सार्वजनिक दबाव बढ़े.
इज़राइल का जवाब और विवाद
इज़राइल सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है, यह कहते हुए कि हिरासत में लिये गए सभी लोग सुरक्षित हैं, उन्हें कानूनी अधिकार प्राप्त हैं, और उन्हें ज़रूरी मानवीय सुविधाएँ दी जा रही हैं. विदेश मंत्रालय ने बताया कि निर्वासन की प्रक्रिया जल्द पूरी होगी, और कार्यकर्ताओं को अपने‑अपने देशों भेजा जाएगा.
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कानूनी पहल
स्वीडिश सरकार तथा अन्य देशों के प्रतिनिधियों ने इस मामले में सक्रियता दिखाई है, यह सुनिश्चित करने के लिए कि नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन न हो. मानवाधिकार संगठन जैसे Adalah ने कानूनी शिकायतें दर्ज की हैं, और दूतावासों से संपर्क किया गया है कि हिरासत का समय, परिस्थितियाँ और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो.
महत्वपूर्ण बिंदु और अनुमानित प्रभाव
इस घटना ने मानवीय गतिविधियों, समुद्री नाकेबंदी, और अंतरराष्ट्रीय कानून की सीमाओं पर बहस को फिर से जोर से उभारा है. कार्यकर्ताओं के कथित दुर्व्यवहार की बात यदि सत्य होती है, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन की गंभीर घटना होगी, और इज़राइल पर ऐसी कार्रवाइयों के लिये अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों एवं मानवाधिकार संस्थाओं से दबाव बढ़ेगा.
मीडिया कवरेज और जन‑मत सहित वैश्विक प्रतिक्रिया इस मामले को सिर्फ एक स्थानीय घटना नहीं रहने देगी, बल्कि उठेंगे सवाल कि कैसे युद्ध, नौसैनिक नीति और अंतरराष्ट्रीय सहायता के नाम पर नागरिकों के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए.
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