South Korea Hyunmoo-5 Ballistic Missile: उत्तर कोरिया की बढ़ती मिसाइल ताक़त और परमाणु धमकियों के बीच दक्षिण कोरिया ने एक ऐसा दांव चला है, जो पूरे एशिया में सैन्य संतुलन को चुनौती दे सकता है. दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्रालय ने ऐलान किया है कि उसकी ‘मॉन्स्टर मिसाइल’ ह्यूनमू-5 (Hyunmoo-5) इस साल के अंत तक सक्रिय सेवा में तैनात कर दी जाएगी. यह मिसाइल न केवल अपने आठ टन वजनी वारहेड के लिए जानी जाती है, बल्कि इसकी मारक क्षमता इसे परमाणु हथियारों के बराबर विनाशकारी बनाती है, वो भी बिना रेडियोएक्टिव खतरे के.
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आह्न ग्यूबैक ने योनहाप न्यूज से बातचीत में साफ कर दिया कि यह मिसाइल किसी आम हमले के लिए नहीं, बल्कि उत्तर कोरिया के गहरे बंकरों और रणनीतिक ठिकानों को ध्वस्त करने के इरादे से तैयार की गई है. यह मिसाइल कोरिया की त्रि-स्तरीय रक्षा रणनीति किल चेन, केएएमडी (KAMD), और केएमपीआर का अहम स्तंभ बन चुकी है. आह्न ग्यूबैक ने कहा, "ह्यूनमू-5 की 15 से 20 मिसाइलों की बौछार परमाणु हमले जितना असर छोड़ सकती है."
परमाणु के बिना परमाणु जैसी ताक़त
ह्यूनमू-5 को वर्ष 2022 में कोरियाई सशस्त्र बल दिवस पर प्रदर्शित किया गया था. इसकी डिज़ाइन विशेष रूप से उत्तर कोरियाई नेतृत्व के भूमिगत कमांड बंकरों को टारगेट करने के लिए की गई है. इसकी 8 टन की वॉरहेड कैपेसिटी इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली नॉन-न्यूक्लियर मिसाइलों की श्रेणी में लाती है. ये मिसाइल सटीकता (precision strike) और गहराई तक मार करने की अपनी क्षमता से खतरे के स्तर को कई गुना बढ़ा देती है.
सीधा जवाब उत्तर कोरिया को
यह तैनाती ऐसे समय पर हो रही है, जब उत्तर कोरिया अपनी ह्वासोंग-20 ICBM मिसाइल के टेस्ट की तैयारी कर रहा है.दक्षिण कोरिया इस तैनाती के ज़रिए न केवल रणनीतिक जवाबी हमला (deterrence) की नीति को मज़बूत कर रहा है, बल्कि यह संदेश भी दे रहा है कि वह किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूर्णत: तैयार है. आह्न ने यह भी संकेत दिया कि दक्षिण कोरिया भविष्य में और भी अगली पीढ़ी की मिसाइलों पर काम कर रहा है, जो देश की सैन्य क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगी.
नए दौर की मिसाइल रेस?
दक्षिण कोरिया की ह्यूनमू-5 तैनाती को केवल सुरक्षा कदम नहीं माना जा सकता. यह एक स्पष्ट संकेत है कि एशिया में एक नया सैन्य संतुलन बन रहा है, जहां पारंपरिक सैन्य उपकरणों के स्थान पर सटीक, भारी और हाई-इंटेंसिटी वेपन सिस्टम का बोलबाला होगा.
अब देखने वाली बात यह होगी कि इस कदम के जवाब में उत्तर कोरिया, चीन और अन्य पड़ोसी देश कैसी रणनीतिक चालें चलते हैं, और यह भविष्य की कूटनीतिक समीकरणों को कैसे प्रभावित करता है.
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