'हम एक हैं, और अपने नेतृत्व के साथ खड़े हैं', सैन्य अफसरों की अंतिम विदाई पर ईरानी जनता ने दिया संदेश

Israel and Iran: मध्य पूर्व इस वक्त भयानक भूचाल से गुजर रहा है. एक ओर ईरान-इज़राइल के बीच छिड़ा युद्ध, तो दूसरी तरफ अमेरिका की ओर से ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए हमले—इन दोनों के बीच बुरी तरह झुलसे ईरान ने फिर भी अपनी एकजुटता और राष्ट्रप्रेम की मिसाल पेश की है.

Khamenei influence impact many people gathered at farewell of millitary officers
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Israel and Iran: मध्य पूर्व इस वक्त भयानक भूचाल से गुजर रहा है. एक ओर ईरान-इज़राइल के बीच छिड़ा युद्ध, तो दूसरी तरफ अमेरिका की ओर से ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए हमले—इन दोनों के बीच बुरी तरह झुलसे ईरान ने फिर भी अपनी एकजुटता और राष्ट्रप्रेम की मिसाल पेश की है. इसकी सबसे बड़ी झलक राजधानी तेहरान की सड़कों पर उस वक्त देखने को मिली जब जनरल हुसैन सलामी, जनरल आमिर अली हाजीजादेह और अन्य प्रमुख सैन्य अधिकारियों के जनाजे में लाखों लोग उमड़ पड़े.

तेहरान की सड़कों पर जनसैलाब, खामेनेई की तस्वीरें थामे दिखे लोग

13 जून को शुरू हुए इस युद्ध में ईरान ने कई शीर्ष सैन्य और वैज्ञानिक अधिकारियों को खो दिया. लेकिन जनाजे के दौरान ईरानी जनता ने साफ कर दिया कि उनके हौसले टूटे नहीं हैं. तेहरान की आज़ादी स्ट्रीट पर करीब 10 लाख से ज्यादा लोग जुटे और राष्ट्रनायकों को श्रद्धांजलि दी. हाथों में खामेनेई की तस्वीरें, तिरंगे झंडे और गूंजते नारों के साथ जनता ने एक स्पष्ट संदेश दिया—"हम एक हैं, और अपने नेतृत्व के साथ खड़े हैं."

इजरायली हमले में मारे गए थे ईरान के सैन्य दिग्गज

13 जून को इज़रायल द्वारा युद्ध की शुरुआत के तुरंत बाद ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए गए थे. इसी हमले में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स प्रमुख जनरल हुसैन सलामी, मिसाइल कार्यक्रम के प्रमुख जनरल हाजीजादेह, और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिक मारे गए. इज़राइल ने दावा किया कि यह ऑपरेशन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के मकसद से किया गया था.

“अमेरिका-इज़राइल मुर्दाबाद” के नारों से गूंजा माहौल

जनाजे के दौरान भीड़ ने अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ खुली नाराज़गी जाहिर की. सड़कें ‘मुर्दाबाद’ के नारों और ईरानी झंडों से पट गईं. इस दिन को ‘राष्ट्रीय शोक’ मानते हुए सरकारी कार्यालयों को बंद रखा गया और कर्मचारियों को अंतिम यात्रा में शामिल होने की अनुमति दी गई.

खामेनेई रहे गैरहाज़िर, लेकिन असर हर जगह दिखा

हालांकि सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई सार्वजनिक रूप से जनाजे में मौजूद नहीं थे, लेकिन माना जा रहा है कि उन्होंने बंद कमरे में विशेष नमाज़ अदा की. उनकी लोकप्रियता इस जनसैलाब के रूप में सामने आई. जनाजे में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची, क़ुद्स फोर्स के प्रमुख जनरल इस्माइल कानी और अन्य कई बड़े चेहरे शामिल हुए. जनरल अली शामखानी, जो पहले हमले में घायल हुए थे, लाठी के सहारे सार्वजनिक रूप से नजर आए.

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