Pune Child Rape: 4 साल की मासूम को मिला इंसाफ, रेप और हत्या के दोषी भीमराव कांबले को होगी फांसी की सजा

Pune Child Rape: 4 साल की मासूम से दरिंदगी करने वाले दोषी को फांसी. अदालत बोली- 'इससे बड़ी सजा होती तो वही देते' , एक महीने के भीतर आया ऐतिहासिक फैसला.

Justice for 4 year old victim Bhimrao Kamble convicted of rape and murder to face the death penalty
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Pune Child Rape: महाराष्ट्र के पुणे जिले में चार वर्षीय बच्ची के साथ हुई हैवानियत और हत्या के मामले में अदालत ने दोषी को  फांसी की सजा सुनाई है. विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 65 वर्षीय भीमराव कांबले को फांसी देने का आदेश देते हुए कहा कि यह अपराध इतना अमानवीय है कि आजीवन कारावास जैसी सजा भी पर्याप्त नहीं मानी जा सकती. अदालत ने टिप्पणी की कि कानून में इससे कठोर दंड का प्रावधान होता तो वह भी विचार योग्य होता.

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने तेजी से पूरी की सुनवाई

विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश एस.आर. सालुंखे ने सोमवार, 29 जून को सजा सुनाई. फैसले के दौरान पीड़िता का परिवार भी अदालत में मौजूद रहा. यह मामला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि घटना के लगभग एक महीने के भीतर जांच, सुनवाई और सजा की प्रक्रिया पूरी कर ली गई.

मई में हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात

यह घटना मई 2026 में पुणे जिले के भोर तालुका के नसरपुर क्षेत्र में हुई थी. आरोप है कि भीमराव कांबले ने घर के बाहर खेल रही चार साल की बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया. इसके बाद उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और सबूत मिटाने के लिए उसकी बेरहमी से हत्या कर दी. जांच पूरी होने के बाद अदालत ने 25 जून को आरोपी को दोषी करार दिया था और सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. आखिरकार 29 जून को अदालत ने मृत्युदंड का आदेश सुनाया.

अदालत में भी नहीं दिखा पछतावा

सुनवाई के दौरान अदालत ने दोषी से उसके अपराध के बारे में सवाल किया. न्यायाधीश ने उससे पूछा कि उसे अपने किए पर क्या कहना है और उसके अनुसार उसे क्या सजा मिलनी चाहिए. बताया गया कि आरोपी ने पूरी घटना का जिक्र करते हुए भी अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं जताया. अदालत ने उसकी बात बीच में ही रोक दी. विशेष लोक अभियोजक एडवोकेट मिलिंद पवार ने भी कोर्ट को बताया कि पूरे मुकदमे के दौरान आरोपी के व्यवहार में कहीं भी अपराधबोध या पश्चाताप नहीं दिखाई दिया.

CCTV फुटेज बना अहम सबूत

पुलिस जांच के अनुसार, वारदात वाले दिन बच्ची अपने घर के बाहर खेल रही थी. आरोपी उसे उठाकर पास की एक गौशाला में ले गया, जहां उसने अपराध को अंजाम दिया. इसके बाद बच्ची के सिर पर पत्थर से हमला कर उसकी हत्या कर दी और शव को गोबर के ढेर के नीचे छिपा दिया. जब बच्ची काफी देर तक घर नहीं लौटी तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की. बाद में गौशाला से उसका शव बरामद हुआ. इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जांच का सबसे अहम सबूत बनी, जिससे आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी आसान हो गई.

परिवार की मांग पर मिला सख्त न्याय

पीड़ित परिवार की ओर से शुरू से ही दोषी के लिए फांसी की सजा की मांग की जा रही थी. अदालत ने मामले की गंभीरता, आरोपी के अमानवीय कृत्य और उसके व्यवहार को देखते हुए मृत्युदंड सुनाया. इस फैसले को न्याय व्यवस्था की त्वरित कार्रवाई और सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है.

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