THE JC Show Live : 'भारत-सेशेल्स... रिश्तों का MAHASAGAR'

कैसे सेशल्स भारत की नेबरहुड फर्स्ट और महासागर नीति का अभिन्न स्तंभ बन गया है. आज इसी को समझने की कोशिश करेंगे 'द जेसी शो' में और हमारे साथ मौजूद हैं भारत 24 के सीईओ और एडिटर इन चीफ और फर्स्ट इंडिया के सीएमडी और एडिटर इन चीफ डॉ. जगदीश चंद्र.

Bharat 24

नई दिल्ली: कहते हैं कि रिश्ते सिर्फ नक्शों से नहीं बनते हैं, रिश्ते बनते हैं भरोसे से, विश्वास से और साझा भविष्य के संकल्प से. हिंद महासागर के बीच बसे एक छोटे से द्वीप राष्ट्रीय सेशल्स में भारत सिर्फ रिश्ते नहीं बना रहा, बल्कि इतिहास लिख रहा है. जब दुनिया इंडोपेसिफिक में अपना प्रभाव बढ़ाने की होड़ में है तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सेशल्स दौरा एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत सिर्फ एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि भरोसेमंद वैश्विक साझेदार है. समुद्र से सुरक्षा तक ब्लू इकॉनमी से रणनीतिक साझेदारी तक... आखिर कैसे सेशल्स भारत की नेबरहुड फर्स्ट और महासागर नीति का अभिन्न स्तंभ बन गया है. आज इसी को समझने की कोशिश करेंगे 'द जेसी शो' में और हमारे साथ मौजूद हैं भारत 24 के सीईओ और एडिटर इन चीफ और फर्स्ट इंडिया के सीएमडी और एडिटर इन चीफ डॉ. जगदीश चंद्र.

सवाल- सर आज के जेसी शो की हेडलाइन है 'भारत-सेशेल्स... रिश्तों का MAHASAGAR', इसके मायने क्या हैं?

डॉ. जगदीश चंद्र का जवाब- इसके मायने क्लियर हैं. यह रिश्तों का सागर दोनों देश हैं. महासागर का पार्ट है. एक तरह से इंडियन ओशन का पार्ट है, इंडियन ओशन के किनारे पर हैं. नरेंद्र मोदी की इस यात्रा से यह दोस्ती या रिश्ता बहुत मजबूत हुआ है. यह रिश्ता आज का नहीं है, यह रिश्ता सदियों पुराना है. नरेंद्र मोदी दूसरी बार सेशल्स गए और इस रिश्ते को मजबूत करके आए. हिंद महासागर में भारत की भूमिका, सेशल्स की भूमिका इस पर चर्चा हुई. दोनों देशों ने एक दूसरे के संबंध मजबूत करने का फैसला लिया और यह सोचा कि किस तरह हम चीन को आंख दिखा सकते हैं. सारे संसार को एक मैसेज दे सकते हैं कि भारत और सेशल्स के रिश्ते सदियों पुराने हैं. वो आज के नहीं हैं. संकट में और खुशी में हम दोनों राष्ट्र एक साथ हैं और हमारा यह रिश्ता जो है यह जीवन भर का है. यही संदेश नरेंद्र मोदी वहां देकर आए हैं.

सवाल- विदेशों में नरेंद्र मोदी को सम्मानित करने की इस होड़ में इस बार सेशल्स ने भी अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से उनको सम्मानित किया. आप इसे कैसे देखते हैं?

जवाब- ये सच है, होड़ तो है ही. संसार में जहां भी नरेंद्र मोदी जाते हैं तो देखते हैं वहां का राष्ट्रीय सर्वोच्च पुरस्कार उन्हें दिया जाता है. ये उनका 34वां अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है. विश्व में कोई ऐसा नेता नहीं है जिसका ब्रांड इतना मजबूत हो. जिसकी लोकप्रियता इतनी मजबूत हो कि 34 राष्ट्र अपने सर्वोच्च सम्मान से उसे सम्मानित करें. तो इट्स ओनली अ नरेंद्र मोदी मिरेकल और जिसे कहते हैं प्राउड फॉर 140 करोड़ इंडियंस. जो उन्होंने कहा कि मैं ये जो पुरस्कार है सम्मान है ये देशवासियों को समर्पित करता हूं और उन राष्ट्रों को समर्पित करता हूं जो क्लाइमेट चेंज के लिए दुख उठा रहे हैं, पीड़ा उठा रहे हैं और संघर्ष कर रहे हैं. तो यह मेरा पुरस्कार उन सभी राष्ट्रों के लिए भी है.

सवाल- सर मैंने सुना है एक वक्त पर भारत ने सेशल्स को तख्ता पलट से बचाया था, क्या आपको इस बारे में कोई जानकारी है?

जवाब- हां, मैंने पढ़ा था कहीं की 1986 में उस समय राजीव गांधी प्राइम मिनिस्टर थे. वहां जो सेशल्स के रक्षा मंत्री थे उन्होंने तख्ता पलटने की कोशिश की थी. वहां से डिस्ट्रेस कॉल आया था. तो यहां से एक दो युद्धपोत चले गए थे, उनको बचा लिया था. तो वो राष्ट्र उस समय से एहसान मानता है भारत का. इरेस्पेक्टिव ऑफ़ द फैक्ट कि प्रधानमंत्री कोई भी हो. भारत ने उनकी मदद की और नरेंद्र मोदी इस बार गए तो नरेंद्र मोदी के प्रति भारत के प्रति जो एहसान का भाव था वो उनके चेहरे पे साफ दिखाई दे रहा था.

सवाल- सर आखिर 11 साल बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने क्यों जरूरी समझा सेशल्स जाना? और सर आखिर क्या है नरेंद्र मोदी का यह महासागर डॉक्ट्रिन?

जवाब- सच में यह सागर जो है, ये जो आईडिया है नरेंद्र मोदी का, यह 2015 में सेशल्स गए थे तो एक डॉक्ट्रिन दिया था- सागर. इस बार उसे बढ़ा के कुछ समय पहले कर दिया- महासागर. महासागर का अर्थ यह है कि सुरक्षा और विकास में साथ-साथ. सिक्योरिटी और डेवलपमेंट में एक साथ-साथ रहेंगे. और ये हमारी जो दोस्ती है या हमारा जो विकास का एजेंडा है यह सभी राष्ट्रों के लिए है. केवल इन दो राष्ट्रों के लिए नहीं है.

और जहां तक रही बात सेशल्स की तो इनका पहला एक्सपेरिमेंट था इंडियन ओशन में. सेशल्स की जो स्ट्रेटेजिक पोजीशन है और सेशल्स यात्रा में प्रधानमंत्री को जो रिस्पांस मिला, जिस तरह से, तो उन्हें समझ में आ गया कि मेरा ये हिंद महासागर और यह महासागर का जो एजेंडा है, यह सक्सेस है. पहला पड़ाव सेशल्स पर था. अब दूसरे पड़ाव की प्रतीक्षा नरेंद्र मोदी को रहेगी और फिर किसी दूसरे राष्ट्र में भी वहां उनकी जो थ्योरी है, जो उनका डॉक्ट्रिन है महासागर का, उसको मजबूत करने फिर वहां जाएंगे. कुल मिला के हम ये कह सकते हैं कि नरेंद्र मोदी की विदेश नीति का ये जो डॉक्ट्रिन है इसकी एक और अग्नि परीक्षा इस सेशल्स में हुई और उसमें वह डॉक्ट्रिन जो है वो सफल रहा.

सवाल- सर नरेंद्र मोदी की इस यात्रा का सबसे बड़ा पॉलिटिकल और स्ट्रेटेजिक टेक अवे क्या है?

जवाब- स्ट्रेटेजिक टेक अवे यह है कि छोटा सा देश है लेकिन हम आपके साथ खड़े हैं. हमारे रिश्ते आपसी विश्वास भरोसे और कॉन्फिडेंस पर आधारित हैं.

दूसरा यह भी है इसका जो मैसेज है वो यह है कि नो स्मॉल नेशंस जो है हम जो है एक कलेक्टिव लीडरशिप में भरोसा करते हैं और कलेक्टिव लीडरशिप में जो एक साथ चलते हैं. और चाइना के लिए मैसेज बहुत क्लियर है कि बी केयरफुल हम यहां भी मौजूद हैं. या हस्तक्षेप करने की कोशिश नहीं करें. भारत सेशस के साथ खड़ा है.

तो पॉलिटिकल मैसेज इस तरह से क्लियर है. वी आर आल्सो द गार्डियन ऑफ़ सेशल्स. नरेंद्र मोदी इस आल्सो द गार्डियन ऑफ़ सेशल्स. तो जो कोई इस राष्ट्र की तरफ देखे तो ये सोच ले पहले कि इसके पीछे भारत खड़ा है, इसके पीछे नरेंद्र मोदी खड़ा है. तो एक स्ट्रेटेजिक मैसेज है भारत की तरफ से संसार के दूसरे देशों के लिए.

सवाल- अपनी सेशंस यात्रा के दौरान में पीएम मोदी ने कहा हम आकार से रिश्ता तय नहीं करते हैं. आखिर पीएम मोदी कहना क्या चाहते थे?

जवाब- वो कहना चाहते हैं कि हम बुली नहीं करते. हमारे रिश्ते संबंधों से तय होते हैं. आकार से तय नहीं होते. हम बुली राष्ट्र नहीं है. हम बिग ब्रदर नहीं हैं. हम तो एक नॉर्मल जो होता है नेबर पड़ोसी उसकी तरह व्यवहार करना चाहते हैं. सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं. किसी राष्ट्र को यह नहीं कहना चाहते कि तुम इस कैंप में जाओ कि इस कैंप में जाओ.

बस इतना सा ध्यान रखो. तुम पे कभी संकट आए तो हमें याद कर लेना. दिस इज द ओनली थ्योरी एंड फिलोसफी ऑफ़ नरेंद्र मोदी फॉर दी कंट्रीज.

सवाल- सर आखिर नरेंद्र मोदी बार-बार इंडियन ओशन पर इतना ध्यान क्यों दे रहे हैं?

जवाब- इसलिए दे रहे हैं क्योंकि वह यह जानते हैं कि ग्लोबल साउथ का भी एक तरह से द्वार है और इतना स्ट्रेटेजिक इसकी पोजीशन है. इसकी ज्योग्राफी ऐसी है. इस राष्ट्र को अगर हम भरोसे में नहीं रखेंगे तो हमारी मेरिटाइम सिक्योरिटी को खतरा पैदा हो सकता है.

इसलिए अगर हमें अपनी समुद्री सीमाओं को सुरक्षित रखना है तो सेशल्स जैसे राष्ट्रों को जिसे कहते हैं अपने इनडायरेक्ट कंट्रोल में रखना होगा. उनके साथ हमारे संबंध मधुर होंगे. इसी नाते सेश का इतना महत्व है और नरेंद्र मोदी गए वहां पे.

सवाल- क्या इस बार भी सेशंस में प्रधानमंत्री मोदी ग्लोबल साउथ की आवाज बने?

जवाब- 100% वो तो आजकल है ना कि ग्लोबल साउथ की जो नई लीडरशिप है वो नरेंद्र मोदी के पास है. पिछले कुछ वर्षों से आप देख रहे हैं. वहां भी उन्होंने मुद्दा उठाया और जो क्लाइमेट चेंज है इसका सबसे ज्यादा सफर करते हैं जो राष्ट्र और ग्लोबल साउथ के देश हैं जिनको क्लाइमेट चेंज का खामियाजा उठाना पड़ता है. इसलिए जो इनका कष्ट है सारे दूसरे राष्ट्रों को साथ जोड़ना चाहिए और इनकी जो पीड़ा है या इनका इकोनमिक बर्डन है उसको शेयर करना चाहिए और क्लाइमेट चेंज के जो नेगेटिव आस्पेक्ट हैं उनको हैंडल करने के लिए उन राष्ट्रों को भी इसके साथ आना चाहिए.

इस प्रकार से ग्लोबल साउथ की आवाज उन्होंने उठाई और उनकी आवाज बहुत दूर तक गई क्योंकि ग्लोबल साउथ के राष्ट्र काफी हैं और विकसित राष्ट्रों से परेशान है. नरेंद्र मोदी ऐसे हैं जो इन गरीब राष्ट्रों की आवाज इंटरनेशनल फोरम पे उठाते हैं और फिर बड़े देशों को मजबूर होकर नरेंद्र मोदी की बात को सुनना पड़ता है. उसका नोटिस लेना पड़ता है.

सवाल- सर भारत और सेशल्स के बीच 19 समझौते होने पर चर्चा है, आपकी नजर में कौन से बड़े समझौते हैं?

जवाब- मेन तो आप कह दीजिए इसको कि हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल पेमेंट्स और डिफेंस आउटकम्स. डिफेंस का मतलब यह है कि दो तो युद्धपत दे दिए उनको छह पनडुबियां वो दे दी. वहां 15-20 गाड़ियां दे दी. एक दर्जन मिलिट्री के वाहन उनको दे दी और काफी जिसे कहना चाहिए आर्थिक सहायता वहां पे मिली. तो उनको ऐसा लगा कि यह ठीक है. अब इसके साथ-साथ फिर जो है मेडिकल फैसिलिटीज की बात है. उसमें कुछ पैसा वहां पे गया. एग्रीकल्चर की बात वहां पे हुई तो इसकी यूपीआई पेमेंट्स की बात वहां पे हुई.

तो कुल मिला के ये जो नरेंद्र मोदी ने पैकेज दिया वहां पे जो है 19 समझौते कहने के लिए हैं. लेकिन ये पांच सात सेक्टर इतने प्रॉमिनेंट हैं जिससे कि एक तरह से कहा जाना चाहिए मोदी हैज़ ओबलाइज्ड सेशंस विद ऑल दीज़ एग्रीमेंट्स.

सवाल: सर आखिर क्या है भारत और सेशंस के मौजूदा व्यापारिक रिश्ते और क्या इसे बल मिलेगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा से?

जवाब- मैंने पढ़ा कि 765 करोड़ का बिजनेस है दोनों देशों के बीच में लास्ट ईयर था. तो 720 करोड़ जो है एक तरह से एक्सपोर्ट है यहां से. फिर वह बाकी इंपोर्ट है तो जो ट्रेड बैलेंस है वह भारत के पक्ष में है.

और दूसरी सबसे बड़ी बात यह है इस यात्रा में नरेंद्र मोदी ने उदारता दिखाते हुए जो है 175 मिलियन डॉलर का एक आर्थिक पैकेज है वो सेशंस को दिया है.

तो रिश्ते दोनों देशों के बीच में अच्छे हैं. आने वाले समय में इस यात्रा के बाद वो रिश्ते और बढ़ेंगे मजबूत होंगे.

सवाल- सर क्या प्रधानमंत्री की इस यात्रा में चाइना के लिए भी कोई स्ट्रेटेजिक मैसेज है?

जवाब- चाइना के स्ट्रेटेजिक मैसेज यह है स्पष्ट तौर पर. चाइना देख रहा है. चाइना तो कभी राष्ट्रों में घुसता है, लोन देता है, फिर लोन चुका नहीं पाते, फिर उनकी संपत्ति को एक्वायर कर लेता है. तो चाइना देख रहा है नरेंद्र मोदी से में क्या कर रहे हैं और इतना सम्मान कैसे हो रहा है.

चाइना इस यात्रा का निश्चित तौर पे नोटिस लिया होगा पर नरेंद्र मोदी की जिसे कहना चाहिए पार्ट ऑफ डिप्लोमेसी है तो उसको छोड़ नहीं सकते. बट चाइना मस्ट हैव टेकन ए कॉग्निजेंस एंड नोटिस ऑन नरेंद्र मोदी विजिट, एस्पेशली द अमाउंट ऑफ रिसेप्शन, द क्वांटम ऑफ रिसेप्शन गिवन टू नरेंद्र मोदी बाय दैट कंट्री.

सवाल: सर क्या यह सच है कि नरेंद्र मोदी की सेशल्स यात्रा के बाद भारत को चीन के जहाजों की पल-पल की अपडेट मिलेगी?

जवाब- ऑफकोर्स वो सिस्टम ऐसा बना दिया ना मैरिटाइम का. आपस में समझौता हो गया डिफेंस का. डिफेंस आउटकम मैंने जो आपसे कहा था. तो सारे के सारे पकड़ में रहते हैं. तो इंडियन नेवी के पकड़ में रहेंगे. बाय प्रोक्सी इंडियन नेवी के रहेंगे. और वैसे उनके पकड़ में रहेंगे तो एक एक्सचेंज हो गया ना डिफेंस सिस्टम का आपस में जो है डिफेंस डील हो गई है.

तो निश्चित तौर पे भारत को हर पल की निगाह रहेगी चाइना के जहाज वहां से कहां निकल रहे हैं, कहां जा रहे हैं, क्या कर रहे हैं. तो एक स्ट्रेटेजिक पॉइंट है सेशर्स का जहां भारत ने उसके साथ में समझौता किया है.

सवाल- आखिर सेशेल्स में ऐसा क्या है कि अमेरिका, चीन, भारत की इस छोटे से आइलैंड कंट्री पर नजर रहती है?

जावब- बस ज्योग्राफी ऐसी है उसकी, उसकी स्ट्रेटेजिक लोकेशन ऐसी है. जितना तेल जाता है गल्फ देशों से वहां पे जो यूरोप में जाता है, अफ्रीका में जाता है और एशियन कंट्री में जाता है, वो सारे जहाज वहां से होके गुजरते हैं. और फिर सबसे बड़ी बात वहां पे क्या है कि करीब-करीब एक बहुत बड़ा जिसे कहना चाहिए 1.4 मिलियन एरिया का जो है सारा एक वहां पे एसजेड है, स्पेशल जो सेशेल्स के पास है. तो स्ट्रेटेजिक उसकी लोकेशन है. तो सारे राष्ट्र देखते रहते हैं कि कल को ये हो बन जाए, यहां पे कोई नया झगड़ा नहीं पैदा हो जाए. तो एवरीबडी इज ट्राइंग टू हैव एन आई ऑन दिस एरिया एंड ट्राइंग टू प्लीज एंड हैव गुड रिलेशंस विद सेशेल्स.

सवाल- इस पूरे घटनाक्रम के बाद होर्मुज स्ट्रेट और वैश्विक तेल व्यापार पर क्या असर पड़ेगा?

जवाब- देखिए, सबसे बड़ा मुद्दा यही है कि होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल का गुजरता है. अगर वहां पर तनाव बढ़ता है तो इसका सीधा असर ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ेगा.
टैंकर निकल रहे हैं, लेकिन कितने सुरक्षित निकल रहे हैं, किस रास्ते से निकल रहे हैं, और किस परिस्थिति में निकल रहे हैं—यह सब अनिश्चित है.

किसी के पास पूरी तरह से क्लियर डेटा नहीं है कि कितना ट्रैफिक सामान्य है और कितना डाइवर्ट हो रहा है. तो यह स्थिति अभी एक तरह से “watch and wait” की है.

सवाल- सर क्या सचमुच ट्रंप 2027 के आरंभ में भारत आने वाले हैं और भारत को फिर ट्रंप के आने वाली इस यात्रा से क्या आशाएं होनी चाहिए?

जवाब- यह तो सच है कि ट्रंप आ रहे हैं. वैसे ट्रंप के आने की खबर मैं तो उसे बहुत अच्छी खबर नहीं मानता. अनपेबल आदमी है. उसे घर में बुलाना रिस्की है. आपके घर में बैठ के क्या बात बोल दे? क्या कह दे कहीं हमलेट कर दे बैठ के कहीं कुछ ए्ंबलेलेंस कर दे. आपको कुछ पता नहीं. लेकिन क्या करो? और शासन की मजबूरियां हैं. आना है तो ट्रंप बहरहाल आ रहे हैं. 

वहां के विदेश मंत्री ने और भारत में जो उनके एंबेसडर हैं उन्होंने कहा है कि ट्रंप आ रहे हैं. तो 26 जनवरी को जो गणतंत्र दिवस है. हो सकता है उसके मुख्य अतिथि यहां पे वो बने. तो अभी के अनुमान के हिसाब से ट्रंप आ रहे हैं. पर आपको मालूम है अनप्रिडिक्टेबल है सिचुएशन. तो कब आएंगे? आएंगे तो क्या करेंगे? कुछ पता नहीं है. इसलिए मेरा विचार है कि आए ना आए भाई हमारे काम कर दो. वहां जो रुके हुए हैं दैट वे जो है तो अब सबसे बड़ा काम तो ट्रेड डील का रुका हुआ है. कितने टाइम से सुन रहे हैं कि वह कहते हैं वेरी नियर वेरी क्लोज और ना तो नियर कभी दिखाई दिया ना कभी क्लोज दिखाई दिया और जहां थी वहीं के खड़े हुए हैं. 

पीयूष गोयल थक गए ड्राफ्ट बना बना के अप्रूव करके और फिर कुछ नहीं होता वहां पे. तो ये तो एक उनका आश्वासन टाइप है इस तरह से कि मैं आऊंगा तो ये इससे मिलेगा. फिर एक वो वेनेजुला कहा तेल की बात है. ट्री पार्टी एग्रीमेंट हो जाए दोनों के साथ में. फिर क्वड वगैरह की बातें हो जाएंगी. फिर आएंगे जनरल सब बातें होती हैं. फाइनेंस की डिफेंस की सब ये बातें चलेंगी. तो ये है कि वो आ रहे हैं. लेकिन भारत के आम नागरिक में ट्रंप की यात्रा को लेके कोई उत्साह नहीं है. क्योंकि भारत के नागरिकों का ट्रंप से विश्वास उठ चुका है. 

अब वक्त की बात है कि वो अपने नरेंद्र मोदी प्रेम का ध्यान रखते हुए उन्हें कभी ये सेंस प्रवेल हो जाए कि मैं किससे बात कर रहा हूं. मैं 140 करोड़ लोगों के व्यक्ति से बात कर रहा हूं. नेता से बात कर रहा हूं जो मेरे मित्र हैं जो मेरे को इतना सम्मानित करते हैं जिनका मैं इतना गुणगान करता हूं लेकिन जैसे मैंने कहा वाशिंगटन की कुर्सी पे बैठ के दिमाग खराब हो जाता है वरना सारा दिन नरेंद्र मोदी का गुणगान करते हैं वो एनी हाउ हमें उम्मीद करनी चाहिए कि ट्रंप आएंगे जनवरी में बहुत अच्छे से फंक्शन अटेंड करेंगे दिल्ली में गणतंत्र दिवस पे नरेंद्र मोदी के साथ अच्छे से लंच डिनर होंगे और भारत के लिए कुछ अच्छा करके जाएंगे ऐसी आशा की जानी चाहिए.

सवाल- सर अयोध्या के राम मंदिर में करोड़ों के चंदा चोरी प्रकरण को इन टोटिटी कैसे देखते हैं आप?

जवाब- यह दुर्भाग्यपूर्ण है. इज ए बिटल टू द ट्रस्ट ऑफ करोड़ ऑफ डिवोटीज. बहुत धक्का लगा है विश्वास का लोगों के और ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए. लेकिन अच्छी बात है कि अयोध्या में वहां जो लोकल एसआईटी बनी तो योगी सरकार और यहां से मोदी सरकार जिस तरह से गंभीरता से ले रहे हैं इस विषय को. हम लेकिन कुल मिलाके है कि बड़ा धक्का एक तरह से जो है ना श्रद्धालुओं को इस सारी घटना से लगा है और बस अच्छी बात यह है कि उसका जो फॉलो अप है जो डिटेक्शन है उसका जो है वो इन्वेस्टिगेशन है वो प्रॉपर हो रहा है. दिस इज ऑल.

सवाल- अब सर ऐसे में एक सवाल और ये भी है कि देश के दूसरे जो बड़े-बड़े मंदिर हैं उनको मिलने वाले चंदे और चढ़ावे की भी क्या अब जांच होगी?

जवाब- देखो प्रश्न तो खड़ा हो ही गया है. आज बड़े-बड़े मंदिर हैं. आप तिरुपति बालाजी देख लीजिए. 3 लाख करोड़ की संपत्ति है. जब तक डोनेशन मैनेजमेंट सिस्टम नहीं होगा प्रॉपर उसका ऑडिट नहीं होगा तो ऐसी घटनाएं होती रहेंगी वहां पे. और फिर तिरुपति बालाजी के बाद में केरल का एक बहुत बड़ा मंदिर है. फिर आप देख लीजिए उधर वो साईं बाबा का मंदिर है. शिरडी में वहां एक बंबई में मंदिर है. वैष्णो देवी मंदिर है और मंदिर हैं. 

बहुत सारे जो है ये तो सवाल खड़ा हो गया है और देश के लोगों के मन में एक आशंका पैदा हो गई है कि जहां वो दान दे रहे हैं, श्रद्धालु जा रहे हैं, जो चंदा दे रहे हैं, सोना दे रहे हैं, चांदी दे रहे हैं, उसे डाल रहे हैं. क्या इसका उपयोग हो रहा है? से चोरी तो नहीं हो रही है तो देश की जनता का विश्वास हिल गया है. लेकिन अबकि इस घटना में सरकार कठोर एक्शन ले रही है यूपी सरकार और सब लोग जो हैं तो शायद वो वापस रेस्टोर हो जाएगा कॉन्फिडेंस लोगों का. लेकिन थोड़ा इसमें वक्त लगेगा कॉन्फिडेंस रेस्टोर होने में. लेकिन सुझाव अच्छा है. अगर सरकार सेलेक्टिवली बिना रिलीजियस इंडिपेंडेंस को डिस्टर्ब किए हुए अगर कुछ ऐसा हो सके और मंदिर प्रशासन से सहमति बन सके तो ये कमेटियां इस तरह की बन जाए. कई राज्यों में कमेटियां ऑलरेडी है इसकी. ऐसा नहीं कि मंदिर सारे फ्री फॉर ऑल हैं. कमेटियां हैं. लेकिन एक ऐसा मैकेनिज्म अगर बन जाए तो स्वागत योग्य होगा.

सवाल- सर आज हमारे देश में कोई तेल संकट तो नहीं है?

जवाब- नहीं मुझे नहीं दिखाई देता. मैंने पढ़ा 74 डेज तक कोई क्राइसिस नहीं है. कट सी 60 डेज यूएस वेवर ऑन परचेस ऑफ ईरान एंड रशियन ऑयल एंड अदर ऑयल जो है और अब क्या है कि ईरान से काफी मात्रा में तेल आता था. अब 60 दिन तो आपका कोई बैन नहीं है. आपका रेस्ट्रिक्शन नहीं है. तो इस समय कंफर्टेबल पोजीशन में है इंडिया और बेसिक उसका कारण यह एक है कि 60 दिन का जो यूएस वेवर है उसके कारण से रिलीफ है और 74 दिन का स्टॉक आकर इसमें पड़ा हुआ है और हॉर्मोज का मुझे ऐसा लगता नहीं कि एकदम से बंद होने वाला है. वो आधा अधूरा चलता रहेगा.