यूरोप में शिक्षा और रक्षा खर्च को लेकर बहस अब सड़कों तक पहुंच गई है. इटली में प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन चर्चा में है. प्रदर्शनकारी ‘No Weapons’ का नारा लगाते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रहे हैं. उनका आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के बजाय हथियारों और रक्षा क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है. इस आंदोलन में कम उम्र के युवाओं की भागीदारी भी चर्चा का विषय बनी हुई है. हालांकि, प्रदर्शन के दौरान हुई आगजनी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं ने आंदोलन के उद्देश्य के साथ-साथ कानून-व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
आगजनी और गिरफ्तारियों से बढ़ा विवाद
रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया. ANSA समाचार एजेंसी के हवाले से बताया गया है कि रविवार को पुलिस ने करीब 200 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें कई नाबालिग बताए गए हैं. कुछ गिरफ्तार युवाओं की उम्र लगभग 16 साल बताई गई है. इस बीच, प्रधानमंत्री मेलोनी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और आगजनी करने वालों को देश के हितों के खिलाफ काम करने वाला बताया. उन्होंने हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही. हालांकि, संपत्ति को हुए नुकसान की करीब 4,400 करोड़ रुपये की बताई जा रही राशि और गिरफ्तार लोगों की उम्र से जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है.
इस विरोध प्रदर्शन की बड़ी वजह शिक्षा और रक्षा क्षेत्र पर होने वाले खर्च का अंतर बताया जा रहा है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इटली ने 2024 में शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का करीब 4 प्रतिशत खर्च किया था, जबकि उसी साल हथियारों की खरीद पर लगभग 30 अरब डॉलर खर्च किए गए. देश का कुल रक्षा खर्च करीब 50 अरब डॉलर बताया गया है. प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकार शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों और युवाओं के भविष्य पर ज्यादा संसाधन खर्च करे. वहीं, रक्षा खर्च में बढ़ोतरी को यूरोप की सुरक्षा जरूरतों और NATO से जुड़ी प्रतिबद्धताओं के संदर्भ में देखा जा रहा है. इस मुद्दे पर सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर बहस तेज हो गई है.
मेलोनी ने वामपंथी नेताओं पर लगाए आरोप
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने प्रदर्शन के पीछे वामपंथी नेताओं की भूमिका होने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि युवाओं को भड़काने के कारण हालात बिगड़े और हिंसा की घटनाएं सामने आईं. दूसरी ओर, छात्रों का आंदोलन सरकार की शिक्षा और रक्षा नीतियों पर असंतोष को सामने ला रहा है. इटली में 2027 में आम चुनाव प्रस्तावित हैं, ऐसे में यह विवाद राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो सकता है. रिपोर्ट में फ्रांस में भी इसी तरह के विरोध और दुकानों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं का जिक्र किया गया है. फिलहाल इटली में चुनौती यह है कि छात्रों की मांगों पर चर्चा हो, लेकिन विरोध प्रदर्शन हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का माध्यम न बने.
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