नई दिल्ली: भारत ने हाल ही में अपनी हवाई सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक बहुस्तरीय एयर डिफेंस नेटवर्क विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पेश की है. इस योजना में इजरायली निर्मित बराक-8 मिसाइल प्रणाली को प्रमुख स्थान दिया गया है, जिसे भारत की वायु रक्षा ढांचे में एक मजबूत स्तंभ माना जा रहा है. बराक-8, जिसे LR-SAM (लॉन्ग रेंज सतह-से-हवा मिसाइल) और MR-SAM (मीडियम रेंज सतह-से-हवा मिसाइल) के नाम से भी जाना जाता है, का उद्देश्य सभी प्रकार के हवाई खतरों से रक्षा करना है. इसमें फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, क्रूज मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल सहित कई प्रकार के हमलों का मुकाबला करने की क्षमता मौजूद है.
यह मिसाइल प्रणाली इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) और भारत के बीच सहयोग से विकसित की गई है. भारत ने अप्रैल 2017 में इस सिस्टम के लिए करीब 1.6 अरब डॉलर का बड़ा सौदा किया था, जिसके बाद लगभग एक महीने में नौसैनिक संस्करण के लिए भी 630 मिलियन डॉलर का अनुबंध हुआ. बराक-8 मिसाइलें अब भारतीय नौसेना के कई युद्धपोतों और एयरक्राफ्ट कैरियरों पर स्थापित हैं, जिससे समुद्री सुरक्षा की मजबूती भी बढ़ी है. इजरायल ने इसी वर्ष जर्मनी को एरो-3 मिसाइल रक्षा प्रणाली की सप्लाई के लिए 3.5 अरब डॉलर के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं, जो इस क्षेत्र में इजरायल के तकनीकी नेतृत्व को दर्शाता है.
भारत का एयर डिफेंस नेटवर्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान कई मौकों पर देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही है. लाल किले से दिए गए भाषण में उन्होंने देश के प्रमुख शहरों, औद्योगिक केंद्रों और रणनीतिक सैन्य बेसों में उच्च स्तरीय एयर डिफेंस तैनात करने की बात कही. इसके तहत बराक-8 मिसाइल प्रणाली को एक केंद्रीय भूमिका दी गई है. हालांकि यह प्रणाली इजरायली मूल की है, लेकिन भारत ने इसे स्थानीय उत्पादन के साथ-साथ तकनीकी हस्तांतरण के तहत अपने रक्षा उत्पादन में शामिल करना शुरू कर दिया है. इसका उद्देश्य 2035 तक देश की सभी संवेदनशील और रणनीतिक जगहों को सम्पूर्ण हवाई सुरक्षा कवरेज देना है.
बराक-8 की क्षमताओं का एक जीवंत उदाहरण मई 2023 में देखने को मिला, जब पाकिस्तान की तरफ से दागी गई फतह मिसाइल को हरियाणा के सिरसा क्षेत्र में बराक-8 सिस्टम ने सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया था. इस घटना ने भारत की हवाई सुरक्षा प्रणाली की दक्षता और विश्वसनीयता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया.
DRDO की पहल: प्रोजेक्ट 'कुशा'
भारत की रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भी अपनी ओर से इस क्षेत्र में सक्रिय है. उन्होंने प्रोजेक्ट 'कुशा' के तहत Extended Range Air Defence System (ERADS) पर काम शुरू किया है, जिसका लक्ष्य 150 से 400 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाले आधुनिक इंटरसेप्टर मिसाइल विकसित करना है. इस नई मिसाइल प्रणाली को बराक-8 और रूसी S-400 प्रणाली के साथ इंटीग्रेट करने की योजना है, जिससे भारत की एयर डिफेंस प्रणाली और भी अधिक प्रभावी और व्यापक हो जाएगी.
इस प्रोजेक्ट से भारत को न केवल अपनी रक्षा प्रणाली में आत्मनिर्भरता मिलेगी, बल्कि विदेशी रक्षा उपकरणों पर निर्भरता कम होगी. इससे रक्षा क्षेत्र में भारत की क्षमता और मजबूत होगी, और यह रणनीतिक तौर पर एक बड़ा कदम साबित होगा.
भारत की हवाई सुरक्षा का भविष्य
बराक-8 मिसाइल सिस्टम की तैनाती और DRDO की स्वदेशी मिसाइल परियोजनाओं के संयोजन से भारत आने वाले दशकों में दुनिया के सबसे सशक्त एयर डिफेंस नेटवर्क वाले देशों की कतार में शामिल हो जाएगा. 2030 के दशक तक इस बहुस्तरीय रक्षा कवच के जरिए देश की राजधानी, औद्योगिक हब, सैन्य ठिकाने और महत्वपूर्ण बुनियादी संरचनाओं को उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रदान की जाएगी.
साथ ही, S-400 जैसी अत्याधुनिक रूसी मिसाइल प्रणालियों के साथ बराक-8 को संयोजित करने की रणनीति भारत के हवाई सुरक्षा नेटवर्क को वैश्विक मानकों के अनुरूप और भी अधिक सक्षम बनाएगी. इस तरह भारत न केवल अपने क्षेत्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी रक्षा तकनीकी और उत्पादन क्षमता को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा.
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