एक बार फिर ईरान पर कहर बरपाएगा इजराइल, अमेरिका के साथ मिलकर चल रही हमले की तैयारी!

दो महीने पहले खत्म हुई खामोशी अब फिर तूफान का संकेत दे रही है. ईरान और इजराइल के बीच हुए भीषण संघर्ष के बाद अब एक बार फिर माहौल गर्म होता दिख रहा है. अमेरिका, इजराइल और ईरान तीनों देशों से आ रहे संकेत यही बताते हैं कि आने वाले हफ्तों में एक नई जंग की चिंगारी भड़क सकती है.

Israel will attack on iran again soon know these 3 war signs
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दो महीने पहले खत्म हुई खामोशी अब फिर तूफान का संकेत दे रही है. ईरान और इजराइल के बीच हुए भीषण संघर्ष के बाद अब एक बार फिर माहौल गर्म होता दिख रहा है. अमेरिका, इजराइल और ईरान  तीनों देशों से आ रहे संकेत यही बताते हैं कि आने वाले हफ्तों में एक नई जंग की चिंगारी भड़क सकती है.

तीनों देशों के सैन्य और कूटनीतिक कदमों से तनाव साफ महसूस किया जा सकता है. खास बात यह है कि न तो ईरान और न ही अमेरिका या इजराइल ने अभी तक शांति के लिए कोई ठोस पहल की है. ऐसे में सवाल उठ रहा है — क्या वाकई जंग की जमीन फिर से तैयार हो चुकी है?

तीन बड़े संकेत, जो आने वाले खतरे की ओर इशारा करते हैं

1. डिएगो गार्सिया में अमेरिकी गतिविधियां तेज़


न्यूजवीक द्वारा जारी की गई एक सैटेलाइट रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने अपने रणनीतिक नौसेना अड्डे डिएगो गार्सिया पर फिर से सैन्य तैनाती शुरू कर दी है. यह वही जगह है जहां से अमेरिका ने इससे पहले भी ईरान पर अपने सैन्य अभियान को अंजाम दिया था.

यह अड्डा हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित है और ईरान व चीन से करीब 2000 किलोमीटर दूर है. यहां से दोनों देशों की गतिविधियों पर नज़र रखना बेहद आसान होता है. गौरतलब है कि चीन पर लंबे समय से ईरान को हथियार सप्लाई करने के आरोप लगते रहे हैं, हालांकि बीजिंग कभी खुलकर इसे स्वीकार नहीं करता.

2. ईरान के सैन्य नेतृत्व के बयान से मचा हड़कंप

ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के सैन्य सलाहकार याह्या रहीम सफवी ने दो टूक कहा है कि ईरान किसी युद्धविराम में नहीं है, बल्कि अब भी युद्ध की स्थिति में है. उनका साफ कहना है कि अमेरिका और इजराइल से किसी भी समय जंग की शुरुआत हो सकती है. ईरान के उपराष्ट्रपति ने भी बयान दिया है कि यदि युद्ध फिर से शुरू होता है, तो इस बार जीत ईरान की होगी. उन्होंने खुलेआम इजराइल को ‘बर्बाद करने’ की धमकी दी है. ऐसे बयानों ने मध्य-पूर्व में बेचैनी और बढ़ा दी है.

3. यूरेनियम पर बढ़ता दबाव और डेडलाइन का खतरा

अमेरिका और इजराइल ने ईरान को साफ शब्दों में अगस्त तक यूरेनियम की संवर्धन प्रक्रिया रोकने का समय दिया है. बीते सप्ताह इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के अधिकारी तेहरान गए थे, लेकिन ईरान ने न तो कोई स्पष्ट आंकड़ा दिया और न ही पारदर्शिता दिखाई. वहीं, यमन और लेबनान जैसे देशों ने भी ईरान पर क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाने के आरोप लगाए हैं. इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि मिडिल ईस्ट फिर से एक बड़े संघर्ष के मुहाने पर खड़ा है.

जून की जंग का असर अभी बाकी है

जून 2025 में ईरान और इजराइल के बीच 12 दिन तक चले युद्ध में दोनों देशों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था. ईरान ने इस जंग में 12 से अधिक परमाणु वैज्ञानिकों और सैन्य अधिकारियों को खोया था. करीब 600 आम नागरिकों की भी जान गई थी. इजराइल को भी सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर जबरदस्त चोट लगी थी. हालांकि, सीजफायर के बाद कुछ समय तक हालात शांत रहे, लेकिन अब जिस तरह से बयानबाजी, सैन्य तैयारियां और कूटनीतिक हलचलें हो रही हैं, उससे अंदेशा गहरा गया है कि यह खामोशी एक बार फिर बड़े विस्फोट में बदल सकती है.

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