ईरान पर परमाणु हमला करने वाला था इजरायल... पूर्व CIA अधिकारी का बड़ा दावा, मचने वाली थी भीषण तबाही

जून 2025 में ईरान की भूमिगत परमाणु सुविधाओं पर अमेरिका द्वारा किए गए बड़े सैन्य हमले को लेकर अब एक ऐसा दावा सामने आया है जिसने वैश्विक राजनीति को हिला दिया है.

Israel was about to launch a nuclear attack on Iran
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जून 2025 में ईरान की भूमिगत परमाणु सुविधाओं पर अमेरिका द्वारा किए गए बड़े सैन्य हमले को लेकर अब एक ऐसा दावा सामने आया है जिसने वैश्विक राजनीति को हिला दिया है. अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व अधिकारी जॉन किरियाकू ने एक पॉडकास्ट में कहा कि इस पूरे ऑपरेशन के पीछे सबसे बड़ा दबाव इज़रायल की ओर से आया था. 

उनके मुताबिक इज़रायल ने वाशिंगटन को साफ चेतावनी दी थी कि यदि अमेरिका ने ईरान के परमाणु बंकरों को नष्ट नहीं किया, तो वह खुद परमाणु हथियार के इस्तेमाल तक की स्थिति में पहुंच सकता है. किरियाकू ने बताया कि इज़रायल की यह धमकी पहले कभी किसी अमेरिकी प्रशासन को नहीं दी गई थी और यह बात ट्रंप सरकार के लिए बेहद गंभीर थी.

चेतावनी के बाद अमेरिकी प्रशासन एक्टिव

किरियाकू ने दावा किया कि इस चेतावनी के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आशंका हुई कि अगर इज़रायल ने वास्तव में परमाणु विकल्प का इस्तेमाल किया तो पश्चिम एशिया में ऐसा विस्फोटक माहौल बन सकता है जो तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत जैसा दिखेगा. किरियाकू का कहना है कि ट्रंप को लगा कि अमेरिका का हमला इस बड़े संकट को टालने का तरीका हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि इज़रायल ने आधिकारिक मंचों पर कभी यह नहीं माना कि उसके पास परमाणु हथियार हैं, लेकिन अमेरिकी नेतृत्व के साथ निजी बातचीत में उसने यह स्वीकार कर लिया कि 1950 के दशक में इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी और 1960 के दशक के आखिर तक उसके पास यह क्षमता मौजूद थी.

ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकानों पर हमला

इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका ने जून 2025 में ईरान के सबसे सुरक्षित और गहरे भूमिगत परमाणु ठिकानों पर हमला किया. रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के फोर्दो फ्यूल एनरिचमेंट प्लांट पर GBU-57 ‘मैसिव ऑर्डनेंस पेनिट्रेटर’ बम गिराए, जिनका वजन लगभग 15,000 किलोग्राम बताया जाता है. ये बम जमीन के लगभग 100 मीटर नीचे तक घुसकर विस्फोट करने में सक्षम होते हैं और इनका उपयोग खास तौर पर उन ठिकानों के लिए किया जाता है जिन्हें साधारण हथियार नष्ट नहीं कर सकते. अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक इस हमले ने ईरान की परमाणु अवसंरचना को काफी नुकसान पहुंचाया और उसके कार्यक्रम को वर्षों पीछे धकेल दिया.

इस पूरे सैन्य अभियान को अमेरिका ने “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” नाम दिया था. यह हमला बेहद गुप्त तरीके से तैयार किया गया और दुनिया को इसकी भनक तक नहीं लगी. अभियान के दौरान अमेरिका की एक पनडुब्बी ने इस्फहान में स्थित एक अन्य परमाणु सुविधा पर टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दागीं, जबकि इज़रायल ने भी नौ दिनों तक ईरान के सैन्य ढांचे, हवाई सुरक्षा और कमांड सिस्टम पर कई हमले किए. पश्चिम एशिया में इन हमलों से तनाव अचानक बढ़ गया था और कई देशों ने स्थिति पर कड़ी नजर रखी.

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