Spike missile ये छुटकू मिसाइल PAK बॉर्डर पर दुश्‍मन में पैदा कर रही दहशत, मुनीर-शहबाज की हवा टाइट!

आधुनिक युद्धों में तेजी, सटीकता और दूरी से हमला करने की क्षमता निर्णायक साबित होती है. ऐसे में इज़रायल की बनाई गई स्पाइक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (Spike ATGM) एक ऐसा हथियार बनकर उभरी है, जिसने जंग के मैदान में बैलेंस पूरी तरह बदल दिया है.

Israel Spike missile india buys tensions in pakistan know its power
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आधुनिक युद्धों में तेजी, सटीकता और दूरी से हमला करने की क्षमता निर्णायक साबित होती है. ऐसे में इज़रायल की बनाई गई स्पाइक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (Spike ATGM) एक ऐसा हथियार बनकर उभरी है, जिसने जंग के मैदान में बैलेंस पूरी तरह बदल दिया है. यह सिर्फ एक मिसाइल नहीं, बल्कि एक बहुआयामी हथियार प्रणाली है, जो पैदल सैनिक से लेकर वायुसेना और नौसेना तक के लिए बेहद असरदार है.

साल 2019 में भारत ने तत्कालीन सामरिक ज़रूरतों को देखते हुए, खासकर पाकिस्तान और चीन की चुनौतियों को ध्यान में रखकर, इमरजेंसी खरीद प्रक्रिया के तहत इज़रायल से लगभग 210 स्पाइक मिसाइलें और 12 लॉन्चर सिस्टम मंगवाए थे. इस सौदे की कुल लागत करीब ₹280 करोड़ रही.

भारत में स्पाइक मिसाइल की एंट्री और साझेदारी

इसके बाद भारत और इज़रायल ने इस मिसाइल के देश में निर्माण को लेकर भी कदम बढ़ाए. DRDO और इज़रायल की 'Rafael Advanced Defense Systems' कंपनी के बीच साझेदारी के तहत “मेक इन इंडिया” योजना के अंतर्गत इसका उत्पादन भारत में शुरू किया गया है. हालांकि भारत अपनी घरेलू मिसाइल प्रणालियां जैसे नाग और हेलिना पर भी काम कर रहा है, लेकिन स्पाइक मिसाइल अपनी खास क्षमताओं के चलते एक मजबूत पूरक बनी हुई है.

स्पाइक मिसाइल की बनावट और क्षमता

  • लंबाई: लगभग 1.2 मीटर
  • कुल वजन: 28 किलो (मिसाइल: 14 KG लॉन्चर: 12-14 KG) इसका हल्का वजन और पोर्टेबल डिज़ाइन इसे पैदल सैनिकों के लिए भी बेहद उपयोगी बनाता है. एक अकेला सैनिक इस मिसाइल को कंधे पर रखकर टैंक जैसे भारी दुश्मन को खत्म कर सकता है.

क्या बनाता है स्पाइक को खास?

फायर एंड फॉरगेट टेक्नोलॉजी: एक बार लक्ष्य लॉक करके मिसाइल छोड़ दी जाए, तो ऑपरेटर को आगे कुछ करने की जरूरत नहीं होती. फायर-ऑब्जर्व-अपडेट मोड: उड़ान के दौरान भी लक्ष्य को बदला जा सकता है. डे-नाइट क्षमता: थर्मल इमेजिंग की मदद से यह दिन और रात, दोनों समय सटीक निशाना लगाती है. मल्टी-प्लेटफॉर्म: इसे सैनिक, हेलिकॉप्टर, ड्रोन, नौसेना जहाज़ या बख्तरबंद वाहनों से भी लॉन्च किया जा सकता है. 

GPS और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल गाइडेंस: टारगेट की लोकेशन और दिशा का सटीक पता चलता है. Spike-NLOS वर्जन लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग कर सकता है, जिससे ऑपरेटर को मैदान का रियल-टाइम इंटेलिजेंस मिलता है. टॉप-अटैक क्षमता: टैंकों पर ऊपर से वार करता है, जहां इनका कवच सबसे कमजोर होता है.

स्पाइक मिसाइल के प्रकार – ज़रूरत के मुताबिक वैरिएंट

  • वैरिएंट    रेंज
  • Spike-SR (शॉर्ट रेंज)    50 मीटर – 1.5 किमी
  • Spike-MR (मीडियम रेंज)    2.5 किमी
  • Spike-LR (लॉन्ग रेंज)    4 किमी
  • Spike-LR II    5.5 किमी (वायरलेस, फायर-एंड-फॉरगेट)
  • Spike-ER (एक्सटेंडेड रेंज)    8 किमी
  • Spike-NLOS (नॉन लाइन ऑफ साइट)    25 किमी (हेलिकॉप्टर/ड्रोन/वाहन से दागी जाती है)

कहां-कहां साबित हुई है इसकी ताकत?

मध्य पूर्व में: इज़रायल ने लेबनान, गाज़ा पट्टी और सीरिया में हुए सैन्य अभियानों में स्पाइक मिसाइल का व्यापक उपयोग किया. 2020 का अजरबैजान-आर्मेनिया संघर्ष: नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र में अजरबैजान ने इसी मिसाइल से आर्मेनिया के टैंकों को ध्वस्त किया. यूरोपीय देशों में: लिथुआनिया, पोलैंड और रोमानिया ने रूस की गतिविधियों के मद्देनज़र इसे अपनी रक्षा प्रणाली में जोड़ा है.

किन देशों के पास है यह मिसाइल?

भारत, जर्मनी, स्पेन, इटली, लिथुआनिया, कोलंबिया, पेरू, सिंगापुर, फिलीपींस, वियतनाम, अज़रबैजान, दक्षिण कोरिया, चिली, और लगभग 30 से अधिक देशों की सेनाओं में यह मिसाइल शामिल है.

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