गुरुवार रात इज़रायल की राजधानी यरुशलम में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू उस समय अपनी सुरक्षा कैबिनेट की गंभीर बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे, जिसमें गाज़ा में युद्धविराम और बंधकों की रिहाई को लेकर बड़े फैसले लिए जा रहे थे. लेकिन बैठक के बीच एक ऐसा क्षण आया जब नेतन्याहू ने सभी मंत्रियों और अधिकारियों को थोड़ी देर के लिए रोक दिया — वजह थी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन कॉल.
सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच करीब 10 मिनट की बातचीत हुई, जिसमें गाज़ा में हुए समझौते, मानवीय सहायता और आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख पर चर्चा की गई.
इज़रायली पीएमओ ने दी पुष्टि
टाइम्स ऑफ इज़रायल की रिपोर्ट के मुताबिक, इज़रायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस वार्ता की पुष्टि करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने गाज़ा में युद्धविराम और बंधकों की रिहाई पर चल रही बैठक के दौरान पीएम मोदी का फोन रिसीव किया. बयान में कहा गया कि पीएम मोदी ने समझौते पर इज़रायल को बधाई दी और इसे मानवीय दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण पहल बताया. साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत-इज़रायल के रिश्ते "हर परिस्थिति में मजबूत" बने रहेंगे.
पीएम मोदी ने ट्वीट कर साझा की बातचीत
बातचीत के कुछ ही देर बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर इस वार्ता की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि “मैंने प्रधानमंत्री नेतन्याहू से बात कर गाज़ा शांति योजना में हुई प्रगति के लिए बधाई दी. बंधकों की रिहाई और गाज़ा के लोगों के लिए बढ़ाई जा रही मानवीय सहायता का स्वागत किया. आतंकवाद किसी भी रूप में और कहीं भी स्वीकार्य नहीं है. यह बात हमने दोहराई.” इस ट्वीट को कुछ ही समय में लाखों बार देखा गया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी इसे खासा कवरेज मिला. विश्लेषकों का कहना है कि यह बातचीत भारत की पश्चिम एशिया में बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का संकेत है.
बंधकों की रिहाई पर ट्रंप का बड़ा ऐलान
इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि गाज़ा में हामास के कब्जे में रखे गए सभी बंधकों को सोमवार या मंगलवार तक रिहा कर दिया जाएगा. ट्रंप ने व्हाइट हाउस की कैबिनेट बैठक में जानकारी दी कि इस संबंध में एक तीन दिवसीय संघर्षविराम और पुनर्निर्माण योजना पर सहमति बन गई है. उन्होंने उम्मीद जताई कि मिस्र में होने वाले समझौते के औपचारिक हस्ताक्षर कार्यक्रम में वे स्वयं भी हिस्सा लेंगे. ट्रंप ने इसे "शांति की दिशा में एक सकारात्मक मोड़" करार दिया.
गाज़ा डील को लेकर इज़रायल में मतभेद
हालांकि यह समझौता अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वागत योग्य माना जा रहा है, लेकिन इज़रायल की आंतरिक राजनीति में इसे लेकर मतभेद हैं. कुछ नेताओँ का मानना है कि यह समझौता हामास के आगे झुकने जैसा है, जबकि कई इसे नागरिकों और बंधकों के हित में लिया गया जरूरी फैसला बता रहे हैं. ऐसे समय में नेतन्याहू द्वारा प्रधानमंत्री मोदी से सीधी बातचीत को केवल एक औपचारिक कूटनीतिक बातचीत न मानते हुए, इसे एक मजबूत रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है – कि भारत, इस क्षेत्रीय संकट पर नज़र बनाए हुए है और हर शांति प्रयास में अपनी भूमिका निभाने को तैयार है.
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