India Israel Defense Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को इजरायल की दो दिवसीय यात्रा पर जा रहे हैं. यह उनकी नौ साल बाद दूसरी इजरायल यात्रा होगी. इससे पहले 2017 में उनकी ऐतिहासिक यात्रा हुई थी. इस साल की यात्रा का महत्व केवल राजनीतिक स्तर पर नहीं है, बल्कि यह भारत-इजरायल रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है.
पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत आ रहे थे, लेकिन वे दिल्ली नहीं आ पाए. इजरायली दूतावास ने बताया कि पीएम मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के पहले से मजबूत होते रिश्तों को और व्यापक रूप देने का संकेत है.
अरबों डॉलर की रक्षा डील की संभावना
सूत्रों के अनुसार, इस दौरे के दौरान भारत और इजरायल अरबों डॉलर की रक्षा डील पर बातचीत कर सकते हैं. इसमें शामिल होने वाले हथियार और उपकरण इस प्रकार हैं:
ये हथियार भारत की सीमाओं की सुरक्षा और आधुनिक रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने में मदद करेंगे.
भारत-इजरायल रक्षा संबंधों का इतिहास
भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग पिछले कई दशकों से मजबूत रहा है. पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी भारत ने इजरायली तकनीक और हथियारों का इस्तेमाल किया था. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशक में यह साझेदारी भारत की रणनीति और रक्षा नीति में बड़ा बदलाव ला सकती है.
इजरायली विशेषज्ञों के अनुसार, यह साझेदारी अब सिर्फ सप्लायर-कस्टमर के मॉडल तक सीमित नहीं है. भारत और इजरायल औद्योगिक सहयोग और तकनीकी विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर सुरक्षा क्षमताएं विकसित करना चाहते हैं.
भारत का रक्षा बजट और तकनीकी निवेश
भारत ने 2027 के रक्षा बजट में एआई, स्वायत्त तकनीक और आत्मनिर्भरता पर खर्च बढ़ाने की योजना बनाई है. इस साल कुल रक्षा बजट 93.5 अरब डॉलर रखा गया है.
इस बजट में शामिल प्रमुख बिंदु हैं:
विशेषज्ञों का कहना है कि यह निवेश केवल हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है. इसका उद्देश्य भारत को डिजिटल ब्रेन और स्वायत्त निगरानी क्षमताओं के जरिए एक आत्मनिर्भर और प्रभावी सुरक्षा प्रदाता बनाना है.
ऑपरेशन सिंदूर का योगदान
पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सटीक हमले करने की क्षमता और उन्नत हथियार प्रणालियों के प्रभावी उपयोग को दर्शाया. इस अभियान में एकीकृत खुफिया निगरानी, हथियारबंद ड्रोन और एआई-सक्षम जासूसी प्रणाली का इस्तेमाल किया गया.
भारत-इजरायल साझेदारी के तहत आने वाले एयर डिफेंस सिस्टम, जैसे कि आयरन डोम और अन्य हाई-टेक मिसाइल सिस्टम, भारत के ‘सुदर्शन चक्र’ जैसे स्वदेशी सुरक्षा नेटवर्क को और मजबूत कर सकते हैं.
केवल हथियार नहीं, डिजिटल ब्रेन भी
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब केवल हथियारों का आयातक नहीं बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल करने वाला देश बनना चाहता है. इसका मकसद क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल को आकार देना और सभी सेनाओं में ऑपरेशनल एकरूपता बनाए रखना है.
पीएम मोदी इस यात्रा के माध्यम से यह दिखाना चाहते हैं कि भारत-इजरायल रक्षा सहयोग केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं है. बल्कि यह तकनीकी और औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा देने, आधुनिक हथियार प्रणालियों को अपनाने और डिजिटल ब्रेन के माध्यम से सशस्त्र बलों की क्षमताओं को उन्नत करने के लिए है.
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