मध्य पूर्व में शांति की कोशिशें एक बार फिर अधर में लटक गई हैं. गाजा की धरती पर बुधवार सुबह फिर से धमाके गूंजे जब इजराइली सेना ने हवाई हमले किए. इस हमले में फिलिस्तीनी प्रशासन के अनुसार कुल 104 लोगों की जान चली गई, जिनमें 46 बच्चे और 20 महिलाएं शामिल थीं. यह हमला उस शांति समझौते के बाद सबसे बड़ा था जो 10 अक्टूबर को इजराइल और हमास के बीच हुआ था.
इजराइल का कहना है कि यह कार्रवाई जवाबी थी. फिलिस्तीनी उग्रवादियों के हमले में एक इजराइली सैनिक की मौत के बाद उसने जवाब दिया. लेकिन इस जवाब ने युद्धविराम की नाजुक डोर को फिर से हिला दिया है.
सीजफायर कायम रहेगा, लेकिन हम चुप नहीं रहेंगे
इजराइली सेना के प्रवक्ता ने बुधवार को कहा कि देश युद्धविराम समझौते का पालन जारी रखेगा, लेकिन किसी भी उकसावे का जवाब दिया जाएगा. उन्होंने दावा किया कि हमास ने “येलो लाइन”वह सीमा रेखा जिसे दोनों पक्षों ने युद्धविराम समझौते में तय किया था के भीतर घुसकर हमला किया. सेना के अनुसार, इस हमले में एक इजराइली सैनिक मारा गया और कई घायल हुए. इसके बाद इजराइल ने गाजा के उत्तरी और मध्य इलाकों पर कई हवाई हमले किए. वहीं, हमास ने किसी भी तरह की जिम्मेदारी से इनकार करते हुए कहा कि वह शांति समझौते पर कायम है और यह हमला उसकी ओर से नहीं था.
ट्रंप का बयान “शांति खतरे में नहीं”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युद्धविराम पर कोई खतरा नहीं है. उन्होंने कहा, “इजराइल ने अपने सैनिक की मौत के बाद जो कार्रवाई की, वह एक जवाबी कदम था. यह स्वाभाविक है कि वे अपने जवानों की रक्षा करेंगे.” ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि हमास को “संयम बरतना चाहिए” क्योंकि मध्य पूर्व की स्थिरता में उनका भी हिस्सा है.
10 अक्टूबर का समझौता और आज की स्थिति
10 अक्टूबर को हुआ इजराइल-हमास शांति समझौता उस समय उम्मीद की किरण लेकर आया था जब अक्टूबर 2023 से चली आ रही जंग ने दोनों तरफ तबाही मचा दी थी. समझौते के तहत दोनों पक्षों ने एक सीमित युद्धविराम, मानवीय सहायता और बंदियों की अदला-बदली पर सहमति जताई थी. लेकिन हाल की हिंसा ने यह साफ कर दिया है कि जमीनी हालात अब भी बेहद अस्थिर हैं. गाजा में लगातार ड्रोन निगरानी, सीमा पर गोलीबारी और राहत कार्यों में बाधा जैसी घटनाएं शांति प्रयासों को कमजोर कर रही हैं.
बंधकों के शव बने नई कूटनीतिक चुनौती
फिलहाल गाजा में 13 इजराइली बंधकों के शवों का पता नहीं चल पाया है. हमास का कहना है कि गाजा में तबाही इतनी बड़ी है कि शवों को ढूंढना मुश्किल हो गया है, जबकि इजराइल का आरोप है कि हमास जानबूझकर देरी कर रहा है. बंधकों के शवों की वापसी अब शांति वार्ता के अगले चरण की सबसे बड़ी अड़चन बन गई है. अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि जब तक यह मसला सुलझता नहीं, तब तक दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली लगभग असंभव है.
तनाव की जड़: सुरक्षा बनाम अस्तित्व
इजराइल कहता है कि गाजा से होने वाले रॉकेट हमले उसके नागरिकों के लिए “अस्तित्व का खतरा” हैं. दूसरी ओर हमास और फिलिस्तीनी समूहों का आरोप है कि इजराइली सेना लगातार नाकाबंदी और हवाई हमलों से गाजा की नागरिक आबादी को निशाना बना रही है. इन आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच सबसे ज्यादा कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ रही है—जो न तो हमास के लड़ाके हैं, न इजराइली सैनिक, बल्कि वे बच्चे और परिवार हैं जो सिर्फ शांति में जीना चाहते हैं.
यह भी पढ़ें: इस रिपोर्ट से अमेरिका और इजरायल की बढ़ेगी टेंशन, ईरान ने फिर शुरू किया परमाणु केंद्र