Iran Protest: ईरान में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं. सरकार के खिलाफ उठी असंतोष की लहर अब खुली बगावत का रूप लेती दिख रही है. देश के अलग-अलग शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं, जहां नारेबाजी, आगजनी और सुरक्षाबलों से झड़पों की खबरें सामने आ रही हैं. 28 दिसंबर से शुरू हुए ये प्रदर्शन अब और उग्र हो चुके हैं, जिनमें अब तक दर्जनों जानें जा चुकी हैं और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया है.
प्रदर्शनों के बढ़ते दबाव के बीच अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाला ईरानी शासन अब और कठोर रुख अपनाने के संकेत दे रहा है. देश के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने सार्वजनिक चेतावनी देते हुए कहा है कि विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों को “खुदा का दुश्मन” माना जाएगा. उनका कहना है कि ऐसे लोगों के खिलाफ ईरानी कानून के तहत सबसे सख्त सजा दी जा सकती है.
‘मोहारेब’ बताकर दी जा सकती है फांसी
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी कानून में इस तरह के अपराधों को बेहद गंभीर माना जाता है. सरकारी टीवी पर प्रसारित बयान में कहा गया है कि जो भी लोग दंगाइयों या प्रदर्शनकारियों की किसी भी रूप में मदद करते पाए जाएंगे, उन पर भी वही आरोप लगाए जाएंगे. ईरानी दंड संहिता की धारा 186 के तहत इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ सशस्त्र विरोध या उसके समर्थन को ‘मोहारेब’ यानी खुदा से युद्ध करने जैसा अपराध माना जाता है. इसके लिए धारा 190 में फांसी, अंग विच्छेदन या स्थायी निर्वासन जैसी कठोर सजाओं का प्रावधान है.
अब तक 116 लोगों की मौत, हजारों गिरफ्तार
बीते गुरुवार के बाद से विरोध प्रदर्शन और तेज हो गए, जिसके बाद सरकार ने देशभर में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दीं. इंटरनेट बंद होने से ईरानी नागरिक अंतरराष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से लगभग कट गए हैं. समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, अब तक जारी हिंसा और झड़पों में कम से कम 116 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,600 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. तेहरान से शुरू हुआ यह आंदोलन अब चहारमहल और बख्तियारी, इलाम, केरमानशाह, फार्स समेत कई प्रांतों में फैल चुका है.
अंतरराष्ट्रीय दबाव और ट्रंप का बयान
ईरान में उथल-पुथल के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए हस्तक्षेप के संकेत दिए हैं. ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान पहले से कहीं ज्यादा आज़ादी की ओर देख रहा है और अमेरिका मदद के लिए तैयार है. यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रंप पर ईरानी नागरिकों के खून से हाथ रंगे होने का आरोप लगाया था. ईरान में बढ़ती अशांति और शासन की सख्त चेतावनियों के बीच यह साफ है कि आने वाले दिनों में हालात और भी गंभीर मोड़ ले सकते हैं.
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