कल्पना कीजिए, आप सर्जरी के बाद आंखें खोलते हैं. सब कुछ ठीक है, शरीर धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है, लेकिन जैसे ही आप बोलते हैं, आपकी आवाज़ और शब्द खुद आपको अजनबी लगते हैं. आप अपनी मातृभाषा नहीं, बल्कि ऐसी भाषा बोल रहे होते हैं जिसे आपने कभी ढंग से सीखा ही नहीं. अमेरिका में एक युवक के साथ कुछ ऐसा ही हुआ, जिसने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को भी कुछ देर के लिए उलझन में डाल दिया.
यह अनोखा मामला अमेरिका के यूटा राज्य के रहने वाले स्टीफन चेज का है. उस वक्त स्टीफन महज 19 साल के थे. फुटबॉल खेलते समय उनके घुटने में गंभीर चोट लग गई थी, जिसके बाद उन्हें सर्जरी करानी पड़ी. ऑपरेशन सफल रहा, लेकिन असली हैरानी तब शुरू हुई, जब उन्हें होश आया.
होश में आते ही बदली भाषा
रिकवरी रूम में नर्सों ने स्टीफन से सामान्य सवाल पूछे नाम, तबीयत और दर्द से जुड़ी बातें. लेकिन जवाब अंग्रेज़ी में नहीं, बल्कि धाराप्रवाह स्पेनिश में आने लगे. शुरुआत में लगा कि शायद वह मज़ाक कर रहे हैं, लेकिन जल्द ही साफ हो गया कि स्टीफन खुद भी इस स्थिति से उतने ही हैरान हैं जितने सामने खड़े लोग. चौंकाने वाली बात यह थी कि स्टीफन को स्पेनिश भाषा का खास ज्ञान नहीं था. स्कूल में उन्होंने बस एक बेसिक कोर्स किया था. न उन्होंने कभी स्पेनिश में बातचीत की थी और न ही इस भाषा में खुद को सहज महसूस किया था.
कुछ देर तक चला अजीब हाल
करीब 20 से 60 मिनट तक स्टीफन इसी हालत में रहे. जब उनसे अंग्रेज़ी में बोलने को कहा जाता, तो वे उलझ जाते थे, जैसे शब्द याद ही न आ रहे हों. बाद में जब पूरी तरह होश आया, तो उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की बहुत धुंधली-सी याद थी. डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि यह कोई सामान्य साइड इफेक्ट नहीं था. विशेषज्ञों ने इसे फॉरेन लैंग्वेज सिंड्रोम से जोड़ा एक बेहद दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल स्थिति, जिसमें एनेस्थीसिया के असर से दिमाग के भाषा-संबंधी हिस्से अस्थायी रूप से अलग तरह से सक्रिय हो जाते हैं.
एक बार नहीं, कई बार हुआ ऐसा
सबसे रोचक बात यह रही कि यह घटना सिर्फ एक बार तक सीमित नहीं रही. आगे चलकर जब भी स्टीफन की सर्जरी हुई. चाहे वह खेल से जुड़ी चोट हो या नाक की सर्जरी होश में आते ही वह फिर से स्पेनिश बोलने लगते थे. धीरे-धीरे यह उनके लिए भी एक “पहचानी हुई” अजीब स्थिति बन गई. हालात यहां तक पहुंच गए कि स्टीफन सर्जरी से पहले ही डॉक्टरों और नर्सों को आगाह करने लगे, ताकि कोई घबराए नहीं.
क्या दिमाग में छिपी रहती हैं भाषाएं?
डॉक्टरों का मानना है कि बचपन या किशोरावस्था में सुनी या थोड़ी-बहुत सीखी गई भाषाएं दिमाग में कहीं गहराई में दर्ज हो जाती हैं. एनेस्थीसिया के प्रभाव से दिमाग के कुछ दबे हुए हिस्से अचानक सक्रिय हो सकते हैं, और वही भाषा बाहर आ जाती है.विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना इस बात का सबूत है कि इंसानी दिमाग आज भी विज्ञान के लिए एक रहस्य है. उसमें ऐसी यादें और क्षमताएं छिपी हो सकती हैं, जिनके बारे में हमें खुद भी अंदाज़ा नहीं होता और कभी-कभी वे सबसे अनपेक्षित पल में सामने आ जाती हैं.
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