ईरान द्वारा सऊदी अरब और बहरीन पर हमलों की चेतावनी देने के बाद, सऊदी अरब ने किंग फहद कॉजवे को सुरक्षा कारणों से अचानक बंद कर दिया. यह पुल सऊदी अरब को बहरीन से जोड़ता है और खाड़ी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. अधिकारियों का कहना है कि यह कदम ईरान की बढ़ती धमकियों को देखते हुए लिया गया है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की सुरक्षा स्थिति से बचा जा सके.
किंग फहद कॉजवे का महत्व
किंग फहद कॉजवे का निर्माण 1981 और 1986 के बीच हुआ था, और यह पुल लगभग 25 किलोमीटर लंबा है. यह पुल न केवल सऊदी अरब और बहरीन के बीच व्यापार का मुख्य मार्ग है, बल्कि इसे दुनिया के सबसे व्यस्त पुलों में से एक माना जाता है. हर साल, इस मार्ग से सऊदी अरब और बहरीन के बीच 5.2 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है. इस मार्ग से बहरीन अन्य देशों को भी अपना सामान निर्यात करता है. सऊदी अरब के लिए यह रास्ता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसका 90 प्रतिशत स्थलीय व्यापार इसी मार्ग से होता है, और यह समुद्री मार्ग की तुलना में कहीं अधिक सुविधाजनक और सस्ता है.
बहरीन और सऊदी अरब के लिए यह बंद क्यों बड़ा संकट?
किंग फहद कॉजवे का बंद होना न केवल व्यापार बल्कि पर्यटन उद्योग को भी नुकसान पहुंचा सकता है. बहरीन के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि सऊदी अरब से बहरीन आने वाले पर्यटकों का एक बड़ा हिस्सा इस पुल का इस्तेमाल करता है. 2024 में बहरीन को पर्यटन से 3.4 बिलियन डॉलर की आय हुई थी, और इस मार्ग के बंद होने से इस उद्योग को भी नुकसान हो सकता है.
ईरान का बहरीन के खिलाफ रवैया
ईरान और बहरीन के बीच विवाद कई दशकों पुराना है. 1602 तक ईरान का बहरीन पर कब्जा था, लेकिन 1971 में बहरीन एक स्वतंत्र राष्ट्र बन गया. इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है. 1927 में ईरान ने फिर से बहरीन पर अपना दावा किया था, लेकिन बहरीन ने इसे नकारते हुए अपनी स्वतंत्रता कायम रखी. इसके अलावा, बहरीन खाड़ी का एकमात्र ऐसा देश है जिसने दो बार ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें होर्मुज के नियंत्रण के लिए अंतरराष्ट्रीय सैन्य बल गठित करने की मांग की गई है. इस मामले में अमेरिका भी बहरीन के साथ खड़ा है, जो ईरान के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात करता है.
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