Makhunik Village Mystery: जोनाथन स्विफ्ट के प्रसिद्ध उपन्यास गुलिवर्स ट्रैवल्स में लिलिपुट नामक देश के छोटे कद के लोगों का जिक्र है. लिलिपुटियन की यह दुनिया काल्पनिक है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि असल जिंदगी में भी ऐसा एक गांव है, जहां के निवासी वास्तव में छोटे कद के थे? जी हां, यह गांव ईरान के पूर्वी हिस्से में स्थित मखुनिक है, जिसे कभी ‘बौनों का गांव’ भी कहा जाता था.
मखुनिक गांव अफगानिस्तान की सीमा से लगभग 75 किलोमीटर दूर स्थित है और इसकी उम्र लगभग 1,500 साल मानी जाती है. अतीत में इस गांव के लोग आज के ईरानी लोगों की तुलना में लगभग आधा मीटर छोटे हुआ करते थे. इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के अनुसार, यहां रहने वाले कई लोगों की हाइट मात्र एक मीटर के करीब होती थी.
मखुनिक का इतिहास और रहस्य
साल 2005 में मखुनिक के पास से एक ममीकृत शव मिलने से इस गांव की रहस्यमयी पहचान और मजबूत हुई. शव मात्र 25 सेंटीमीटर लंबा था, जिसे देखकर लोगों ने तुरंत यह निष्कर्ष निकाला कि मखुनिक सच में ‘बौनों का गांव’ रहा होगा. बाद में वैज्ञानिक जांच में पता चला कि यह ममीकृत शव वास्तव में किसी बच्चे का था, जिसकी मौत करीब 400 साल पहले हुई थी. इसके बावजूद, लोगों का मानना है कि मखुनिक और आसपास के गांवों में कभी बौने लोग ही रहते थे.
बौने लोगों के अनुसार बने घर
मखुनिक की अनोखी पहचान सिर्फ वहां के लोगों की हाइट तक ही सीमित नहीं थी. इस गांव में लगभग 70-80 घर ऐसे हैं, जिनकी ऊंचाई डेढ़ से दो मीटर के बीच है. इतना छोटा आकार यह साबित करता है कि इन घरों में रहने वाले लोग सामान्य हाइट के नहीं थे. ऐसे घरों में आम ईरानी परिवार का रहना नामुमकिन होता.
रोचक तथ्य यह भी है कि मखुनिक केवल अकेला गांव नहीं है. आसपास के कई गांवों के बारे में भी कहा जाता है कि वहां कभी छोटे कद के लोग ही निवास करते थे. यही वजह है कि इस पूरे इलाके को कभी-कभी ‘बौनों का शहर’ भी कहा जाता है.
बौनेपन की वजह क्या थी?
मखुनिक में बौनेपन की वजह प्राकृतिक और आर्थिक परिस्थितियों से जुड़ी हुई बताई जाती है. पुराने वक्त में यह इलाका काफी बंजर और उपजाऊ नहीं था. यहां अनाज और फल-बागवानियाँ मुश्किल से होती थीं. केवल बेर, शलजम और जौ जैसी चीजें उगाई जाती थीं.
ताप, मिट्टी की गुणवत्ता और पौष्टिक तत्वों की कमी ने यहां रहने वाले लोगों के शारीरिक विकास को प्रभावित किया. धीरे-धीरे यह आदत और वातावरण लोगों की ऊंचाई को घटाने में कारगर साबित हुआ. वैज्ञानिकों के अनुसार, लंबे समय तक लगातार पौष्टिक आहार की कमी होने से लोगों की हाइट में कमी आना स्वाभाविक था.
मखुनिक का आज का स्वरूप
आज मखुनिक गांव में बड़े पैमाने पर पर्यटक नहीं आते, लेकिन इतिहास और रहस्य में रुचि रखने वाले लोग इसे देखने जरूर आते हैं. यह गांव अपनी प्राचीन संस्कृति, छोटे घरों और बौनेपन की अनोखी कहानी के कारण शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
स्थानीय लोग आज भी मखुनिक को अपनी विरासत के रूप में मानते हैं और इसे बड़े सम्मान के साथ संजोए हुए हैं. गांव की सादगी और रहस्यमयी अतीत इसे अन्य ईरानी गांवों से अलग बनाता है.
मखुनिक का इतिहास और रहस्य यह दर्शाता है कि कैसे प्राकृतिक परिस्थितियां और भूगोल मानव जीवन और शरीर के विकास को प्रभावित कर सकते हैं. जबकि आज मखुनिक में आम लोगों की ऊंचाई सामान्य ईरानी लोगों के समान है, लेकिन इस गांव की कहानियां और पुराने घर आज भी उस ‘बौनों की दुनिया’ की झलक दिखाते हैं, जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाएगा.
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