Iran: दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच के मंच से उठा ईरान का मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय सियासत में तीखी बहस का रूप ले चुका है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के एक बयान ने न केवल यूरोप और अमेरिका की भूमिका पर सवाल खड़े किए, बल्कि ईरान को भी सीधे तौर पर निशाने पर ले लिया. जेलेंस्की के इन बयानों के बाद अब ईरान की ओर से भी कड़ा और तीखा जवाब सामने आया है, जिसने इस कूटनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है.
विश्व आर्थिक मंच में बोलते हुए राष्ट्रपति जेलेंस्की ने ईरान की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया इस बात की प्रतीक्षा कर रही है कि ईरान को लेकर अमेरिका अगला कदम क्या उठाएगा. उनके मुताबिक न तो वैश्विक समुदाय ने कोई ठोस पहल की है और न ही यूरोप ने अब तक कोई प्रभावी रणनीति तैयार की है. जेलेंस्की ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को हटाने की बात करते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो यह दुनिया के तमाम तानाशाहों के लिए खतरनाक संदेश होगा. उनके अनुसार, इससे यह धारणा मजबूत होगी कि सत्ता में बने रहने के लिए जनता पर अत्याचार करना भी जायज है.
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
जेलेंस्की के बयान पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तीखा पलटवार किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए जेलेंस्की पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया. अराघची ने कहा कि एक तरफ यूक्रेन संयुक्त राष्ट्र का हवाला देकर अंतरराष्ट्रीय मदद मांगता है और दूसरी तरफ UN चार्टर का उल्लंघन करते हुए ईरान पर हमलों का समर्थन करता है. ईरानी विदेश मंत्री ने आगे कहा कि ईरान को अपनी रक्षा के लिए किसी विदेशी ताकत या भाड़े के सैनिकों की जरूरत नहीं है. उन्होंने जेलेंस्की पर कटाक्ष करते हुए लिखा कि दुनिया ऐसे नेताओं से थक चुकी है जो दूसरों के सहारे अपनी लड़ाई लड़ते हैं, जबकि ईरान अपने दम पर खड़ा रहना जानता है.
ईरान पर जेलेंस्की के आरोप
WEF में अपने भाषण के दौरान जेलेंस्की ने ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब ईरान में आम लोग सड़कों पर उतरे और वहां खून-खराबा हुआ, तब दुनिया ने उतनी मदद नहीं की जितनी करनी चाहिए थी. शुरुआती दौर में वैश्विक शक्तियां लगभग खामोश रहीं. जेलेंस्की का आरोप था कि जब तक अंतरराष्ट्रीय नेता सक्रिय हुए और कोई रुख तय किया, तब तक ईरान में हजारों लोगों की जान जा चुकी थी. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर मौजूदा शासन बचा रहता है, तो भविष्य में दुनिया किस तरह के संदेश के साथ आगे बढ़ेगी.
यूरोप पर भी साधा निशाना
जेलेंस्की ने इस मुद्दे पर यूरोप को भी कठघरे में खड़ा किया. उन्होंने कहा कि इतने गंभीर हालात के बावजूद यूरोप ने न तो कोई ठोस प्रतिक्रिया दी और न ही ईरानी जनता या लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन में आगे आया. उनके मुताबिक, यह निष्क्रियता खुद यूरोप के लिए भी खतरनाक साबित हो सकती है.
अमेरिका की भूमिका पर नजर
ईरान को लेकर अमेरिका की संभावित कार्रवाई पर भी जेलेंस्की ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया यह देख रही है कि वॉशिंगटन क्या कदम उठाता है, लेकिन फिलहाल कोई स्पष्ट दिशा नजर नहीं आ रही है. इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस से लौटते समय ईरान को लेकर बयान दिया. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान की गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए हुए है और क्षेत्र की ओर एक बड़ा सैन्य बेड़ा रवाना किया जा रहा है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका इरादा किसी टकराव का नहीं है, लेकिन हालात पर बारीकी से नजर रखी जा रही है.
बढ़ता कूटनीतिक तनाव
जेलेंस्की और ईरान के बीच जुबानी जंग ने यह साफ कर दिया है कि ईरान का मुद्दा आने वाले समय में वैश्विक राजनीति का एक बड़ा केंद्र बनने वाला है. जहां एक ओर यूक्रेन अंतरराष्ट्रीय समर्थन की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान इसे अपनी संप्रभुता और आत्मनिर्भरता से जोड़कर देख रहा है. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि अमेरिका और यूरोप इस बढ़ते तनाव के बीच क्या रुख अपनाते हैं.
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