वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में पहले से जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच अब साइबर युद्ध भी तेजी से खतरनाक रूप लेता जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान से जुड़े माने जा रहे हैक्टिविस्ट ग्रुप Handala Hack ने अमेरिकी सैन्य बलों को निशाना बनाते हुए बड़ा साइबर हमला किया है, जिसमें हजारों सैनिकों की संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक किए जाने का दावा किया गया है.
2,379 अमेरिकी मरीन्स का डेटा लीक
जानकारी के अनुसार, इस साइबर हमले में करीब 2,379 US Marines का निजी और संवेदनशील डेटा लीक हुआ है. इसमें सैनिकों के नाम, फोन नंबर, घर के पते, तैनाती से जुड़े बेस लोकेशन और निजी जानकारी शामिल बताई जा रही है.
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि यह हमला खास तौर पर पर्शियन गल्फ क्षेत्र में तैनात अमेरिकी नौसेना और मरीन्स को निशाना बनाकर किया गया.
व्हाट्सएप पर धमकी भरे संदेश
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 और 29 अप्रैल के बीच हैकर्स ने कुछ अमेरिकी सैनिकों को व्हाट्सएप के जरिए धमकी भरे संदेश भी भेजे.
इन संदेशों में कहा गया कि हम तुम्हें जानते हैं और तुम्हारे परिवार सुरक्षित नहीं हैं, उन्हें आखिरी बार कॉल कर लो.
इसके साथ ही ईरानी हथियारों जैसे Shahed ड्रोन और Qadir मिसाइल का जिक्र करते हुए हमले की धमकी भी दी गई.
टेलीग्राम पर डेटा जारी करने का दावा
हैंडला ग्रुप ने दावा किया है कि उनके पास और भी अमेरिकी नौसेना कर्मियों का डेटा मौजूद है, जिसे आगे सार्वजनिक किया जा सकता है.
फिलहाल लीक किया गया डेटा टेलीग्राम चैनल और एक वेबसाइट के जरिए जारी किया गया है. ग्रुप ने इस कार्रवाई को ईरान के मिनाब क्षेत्र में एक स्कूल पर हुए हमले का बदला बताया है.
Handala ग्रुप कौन है?
यह समूह खुद को एक प्रो-फिलिस्तीनी हैक्टिविस्ट नेटवर्क बताता है, लेकिन अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों जैसे FBI और अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार यह ईरान के Ministry of Intelligence and Security (MOIS) से जुड़ा एक फ्रंट नेटवर्क हो सकता है.
इससे पहले भी इस ग्रुप पर कई साइबर हमलों में शामिल होने के आरोप लग चुके हैं, जिनमें मेडिकल संस्थानों पर हमला और अमेरिकी अधिकारियों के ईमेल सिस्टम को निशाना बनाना शामिल बताया जाता है.
अमेरिका की प्रतिक्रिया और सुरक्षा अलर्ट
इस साइबर हमले के बाद अमेरिकी रक्षा तंत्र सक्रिय हो गया है. Pentagon और US Cyber Command ने तुरंत अलर्ट जारी किया है और सैनिकों को अपने निजी डिवाइस और परिवार की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने इस हमले को ईरानी शासन की हताशा से जुड़ा कदम बताया है और कहा है कि साइबर सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा.
वहीं FBI ने इस नेटवर्क से जुड़े कई डोमेन भी जब्त किए हैं, हालांकि ग्रुप लगातार नए अकाउंट्स के जरिए सक्रिय बना हुआ है.
साइबर वॉर का बदलता चेहरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना सिर्फ डेटा चोरी का मामला नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित साइकोलॉजिकल ऑपरेशन भी हो सकता है, जिसका उद्देश्य सैनिकों और उनके परिवारों के बीच डर पैदा करना और उनका मनोबल कमजोर करना है.
आज के समय में युद्ध केवल हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि साइबर अटैक, डेटा लीक और डिजिटल धमकियां भी आधुनिक युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं.
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