IPS Rajeev Krishna Boigraphy: उत्तर प्रदेश पुलिस को आखिरकार चार साल बाद अपना पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मिल गया है. राज्य सरकार ने कार्यवाहक डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे राजीव कृष्ण को प्रदेश पुलिस का स्थायी मुखिया नियुक्त कर दिया है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कानून-व्यवस्था, साइबर अपराध और आधुनिक पुलिसिंग जैसी चुनौतियों के बीच पुलिस नेतृत्व की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है. लंबे प्रशासनिक अनुभव और तकनीक आधारित पुलिसिंग की समझ रखने वाले राजीव कृष्ण अब प्रदेश की सबसे बड़ी पुलिस फोर्स की कमान संभालेंगे.
तीन वरिष्ठ अधिकारियों के पैनल में चुना गया नाम
डीजीपी पद के लिए शासन स्तर पर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का एक पैनल तैयार किया गया था. इस सूची में 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी रेणुका मिश्रा और पियूष आनंद के साथ 1991 बैच के आईपीएस राजीव कृष्ण का नाम शामिल था. अंतिम निर्णय में सरकार ने राजीव कृष्ण पर भरोसा जताते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस का पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त किया.
शुरुआती सेवाकाल से ही दिखी नेतृत्व क्षमता
1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण ने अपने करियर की शुरुआत विभिन्न जिलों में सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में की थी. उन्होंने इलाहाबाद, बरेली, कानपुर और अलीगढ़ जैसे महत्वपूर्ण शहरों में सेवाएं दीं. अगस्त 1995 से अक्टूबर 1996 तक वह अलीगढ़ में एसपी सिटी के पद पर तैनात रहे, जहां उनके कार्यों को काफी सराहा गया.
फिरोजाबाद से शुरू हुआ जिला पुलिस प्रमुख का सफर
राजीव कृष्ण को पहली बार जिले की कमान फिरोजाबाद में मिली थी. 10 मई 1997 को उन्हें वहां पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया. इसके बाद उन्होंने कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण जिलों में नेतृत्व किया. वह इटावा, मथुरा, फतेहगढ़, बुलंदशहर, नोएडा और आगरा जैसे जिलों में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के रूप में कार्य कर चुके हैं. इन जिलों में उनकी कार्यशैली को सख्त लेकिन परिणामोन्मुख माना गया.
दो बार लखनऊ की कमान संभालने वाले इकलौते IPS
राजीव कृष्ण का नाम उत्तर प्रदेश पुलिस इतिहास में एक खास रिकॉर्ड के लिए भी दर्ज है. वह ऐसे एकमात्र आईपीएस अधिकारी हैं जिन्हें दो अलग-अलग अवसरों पर राजधानी लखनऊ का एसएसपी बनाया गया. पहली बार उन्हें 1 दिसंबर 2006 को लखनऊ की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और मार्च 2007 तक उन्होंने यह पद संभाला. बाद में जब प्रदेश के बड़े शहरों में डीआईजी व्यवस्था लागू की गई, तब एक बार फिर उन्हें राजधानी की कमान सौंपी गई. यह उनके प्रशासनिक कौशल और नेतृत्व क्षमता पर सरकार के भरोसे को दर्शाता है.
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद चुनी पुलिस सेवा
26 जून 1969 को जन्मे राजीव कृष्ण मूल रूप से गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) के निवासी हैं. उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (BE) की डिग्री हासिल की है. तकनीकी शिक्षा का लाभ उन्हें अपने पुलिस करियर में भी मिला, जहां उन्होंने आधुनिक तकनीक और संसाधनों के उपयोग पर विशेष जोर दिया. उनके पिता का नाम एच.के. मित्तल है.
यूपी एटीएस को आधुनिक स्वरूप देने में निभाई अहम भूमिका
राजीव कृष्ण का नाम उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) के विकास और आधुनिकीकरण से भी जुड़ा है. प्रदेश में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद जब तत्कालीन मायावती सरकार ने एटीएस के गठन का फैसला किया, तब राजीव कृष्ण को इसका डीआईजी नियुक्त किया गया. उन्होंने एटीएस को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और उन्नत संसाधनों से लैस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और आतंकवाद विरोधी अभियानों को मजबूत बनाने में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है.
अब यूपी पुलिस के सामने नई चुनौतियां
डीजीपी बनने के बाद राजीव कृष्ण के सामने कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने, साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण, महिला सुरक्षा, संगठित अपराध और तकनीक आधारित पुलिसिंग को नई दिशा देने जैसी कई महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी. उनके लंबे अनुभव और प्रशासनिक समझ से उम्मीद की जा रही है कि उत्तर प्रदेश पुलिस आने वाले वर्षों में आधुनिक और अधिक प्रभावी पुलिसिंग की दिशा में नए कदम उठाएगी.
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