DRS Rules Change: IPL 2026 की शुरुआत भले ही अभी कुछ ही मैचों के साथ हुई है, लेकिन इस बार टूर्नामेंट में लागू किए गए नए नियम धीरे-धीरे चर्चा का विषय बनते जा रहे हैं. कुछ नियम पूरी तरह नए हैं, जबकि कुछ पुराने नियमों में अहम बदलाव किए गए हैं.
सबसे ज्यादा ध्यान जिस बदलाव ने खींचा है, वह है डिसीजन रिव्यू सिस्टम यानी DRS से जुड़ा नया नियम. BCCI ने इस सिस्टम में ऐसा बदलाव किया है, जिससे अब टीमों द्वारा चालाकी से फायदा उठाने की संभावना काफी हद तक खत्म हो जाएगी.
DRS में क्या बदला और क्यों है अहम?
अब तक DRS के इस्तेमाल के दौरान थर्ड अंपायर एक अपील के साथ जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर सकता था. उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कैच को लेकर अपील की गई और वह खारिज हो गई, तो उसी DRS में वाइड बॉल जैसी अन्य संभावनाओं को भी चेक किया जाता था.
लेकिन नए नियम के अनुसार अब ऐसा नहीं होगा. अब थर्ड अंपायर सिर्फ उसी फैसले की समीक्षा करेगा, जिसके लिए DRS लिया गया है. यानी एक रिव्यू में सिर्फ एक ही पहलू पर फैसला होगा. इस बदलाव का सीधा असर यह होगा कि टीमें अब DRS का इस्तेमाल ज्यादा रणनीतिक और सोच-समझकर करेंगी, क्योंकि एक बार में कई फायदे लेने की गुंजाइश खत्म हो गई है.
बल्लेबाज के लिए भी बदले नियम
अगर बल्लेबाज को लगता है कि गेंद उसके बल्ले से नहीं लगी और उसे वाइड दिया जाना चाहिए था, तो अब उसे खुद DRS लेना होगा. यहां एक अहम शर्त भी रखी गई है. बल्लेबाज को यह अपील तय समय सीमा यानी 15 सेकेंड के भीतर ही करनी होगी.
एक बार थर्ड अंपायर अपना फैसला सुना देता है, तो उसके बाद उसी गेंद के लिए नया रिव्यू लेने का मौका नहीं मिलेगा. इससे खेल में पारदर्शिता तो बढ़ेगी ही, साथ ही अनावश्यक विवाद भी कम होने की उम्मीद है.
कप्तानों को पहले ही दी गई जानकारी
सीजन शुरू होने से पहले सभी 10 टीमों के कप्तानों की बैठक में इस नियम की जानकारी दी गई थी. इस दौरान मैच रेफरी के प्रमुख Javagal Srinath और अंपायरिंग प्रमुख Nitin Menon ने विस्तार से बताया कि नए नियम कैसे लागू होंगे और उनका इस्तेमाल किस तरह किया जाना है.
कनकशन सब्स्टीट्यूट नियम में भी बदलाव
DRS के अलावा कनकशन सब्स्टीट्यूट के नियम में भी बदलाव किया गया है. अब अगर किसी खिलाड़ी को सिर पर चोट लगने के कारण बाहर होना पड़ता है, तो उसकी जगह वैसा ही खिलाड़ी टीम में शामिल किया जाएगा, जिसे पहले से इम्पैक्ट सब्स्टीट्यूट के विकल्पों में चुना गया हो. अगर विकेटकीपर को बदलने की जरूरत पड़ती है, तो टीम को अपने चुने गए खिलाड़ियों में से ही किसी को यह जिम्मेदारी देनी होगी.
विदेशी खिलाड़ियों के मामले में भी नियम स्पष्ट किया गया है. अगर कोई विदेशी खिलाड़ी चोटिल होता है, तो उसकी जगह विदेशी खिलाड़ी तभी आ सकेगा जब टीम की प्लेइंग-11 में पहले से चार विदेशी खिलाड़ी न हों. अगर चार खिलाड़ी पहले से खेल रहे हैं, तो फिर भारतीय खिलाड़ी ही उसकी जगह लेगा.
नए नियमों से बदलेगा खेल का अंदाज
इन बदलावों का मकसद खेल को और ज्यादा निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है. खासतौर पर DRS में किए गए बदलाव से अब टीमों को हर रिव्यू का इस्तेमाल सोच-समझकर करना होगा. आने वाले मैचों में यह देखना दिलचस्प होगा कि टीमें इन नए नियमों के अनुसार अपनी रणनीति किस तरह बदलती हैं और मैदान पर इसका क्या असर देखने को मिलता है.
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