क्या संसद को जलाना था साजिश? पहली मीटिंग में बोलीं सुशीला कार्की

नेपाल के राजनीतिक गलियारों में मची उथल-पुथल के बीच, एक चेहरा है जो आशा और स्थिरता का प्रतीक बनकर उभरा है — सुशीला कार्की. तीन दिन तक चले अराजक माहौल के बाद जब नेपाल की संसद और न्याय व्यवस्था ध्वस्त होने के कगार पर पहुंच गई.

Interim Government pm sushila karki first meeting after taking charge
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नेपाल के राजनीतिक गलियारों में मची उथल-पुथल के बीच, एक चेहरा है जो आशा और स्थिरता का प्रतीक बनकर उभरा है — सुशीला कार्की. तीन दिन तक चले अराजक माहौल के बाद जब नेपाल की संसद और न्याय व्यवस्था ध्वस्त होने के कगार पर पहुंच गई, तब देश को एक ऐसे नेतृत्व की जरूरत थी जो सिर्फ कुर्सी नहीं, जवाबदेही समझता हो. इसी मोड़ पर, कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में सुशीला कार्की ने आज औपचारिक रूप से सत्ता की बागडोर संभाली.

अपने पहले संबोधन में सुशीला कार्की ने स्पष्ट शब्दों में कहा यह कोई आम सत्ता परिवर्तन नहीं है. देश 27 घंटे तक धधकता रहा, और अब हमें मिलकर राख से फिर उम्मीद खड़ी करनी है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनकी उम्र अब राजनीति के रसास्वादन की नहीं, बल्कि देश की रक्षा और पुनर्निर्माण की है. अधिकारियों और नागरिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने साझा प्रयास और ईमानदार संवाद की अपील की.

भारत से गहरा रिश्ता, मिल रही है कूटनीतिक सराहना

सुशीला कार्की की भारत से नजदीकी सिर्फ राजनीतिक नहीं, शैक्षणिक भी रही है. उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर शिक्षा हासिल की थी. भारत सरकार की ओर से उनकी नियुक्ति पर खुले शब्दों में समर्थन आया है और यह भरोसा दिलाया गया है कि नेपाल को जो भी मदद चाहिए होगी, भारत साथ खड़ा रहेगा.

सड़कों से संसद तक जल उठा था देश, अब उठने की घड़ी

बीते सप्ताह नेपाल में जो कुछ हुआ, उसे सामान्य विरोध नहीं कहा जा सकता. संसद, सुप्रीम कोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी परिसरों में आगजनी हुई. सड़कों पर हत्या, लूट और दंगों का तांडव दिखा. सुशीला कार्की ने इसे एक सुनियोजित साजिश करार दिया और कहा कि नेपाल जैसे शांतिप्रिय देश में इस तरह की घटनाएं सामान्य नहीं हो सकतीं. यह देश की लोकतांत्रिक आत्मा पर हमला था.

कौन हैं सुशीला कार्की?

  • जन्म: 7 जून 1952, बिराटनगर, नेपाल
  • शिक्षा:स्नातक – बिराटनगर
  • पोस्ट ग्रेजुएट – बीएचयू, भारत (राजनीति विज्ञान)
  • कानून – त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल

करियर:

  • 1979 में वकालत की शुरुआत
  • 1985 में महेंद्र मल्टीपल कैंपस में सहायक प्रोफेसर
  • 2009 में सुप्रीम कोर्ट में अस्थायी न्यायाधीश
  • 2010 में स्थायी न्यायाधीश
  • 2016-2017 में नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश. उनकी छवि एक निडर, निष्पक्ष और सख्त प्रशासक की रही है, जो सत्ता के सामने झुकने के बजाय सत्य के पक्ष में खड़े रहना बेहतर समझती हैं.

नेपाल को चाहिए अब स्थिरता, न कि सत्ता की राजनीति

जैसे-जैसे देश धीरे-धीरे सामान्य होता जा रहा है, सीमाएं खुलने लगी हैं, पर्यटन फिर से रफ्तार पकड़ रहा है. ऐसे वक्त में सुशीला कार्की का नेतृत्व नेपाल को उस दिशा में ले जा सकता है जहां संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक संतुलन फिर से मजबूती से खड़े हो सकें.❝ देश को अब भाषण नहीं, समाधान चाहिए. और शायद, सुशीला कार्की उसी उम्मीद का नाम हैं.

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