पाकिस्तान में महंगाई ने तोड़े सभी रिकॉर्ड, दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे लोग, आएगी आर्थिक मंदी?

पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है. बढ़ती महंगाई, घटती क्रय शक्ति, और आवश्यक वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों ने देश की आम जनता के लिए जीवनयापन को बेहद कठिन बना दिया है.

Inflation breaks all records in Pakistan economic recession
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

इस्लामाबाद: पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है. बढ़ती महंगाई, घटती क्रय शक्ति, और आवश्यक वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों ने देश की आम जनता के लिए जीवनयापन को बेहद कठिन बना दिया है. खासकर खाद्य महंगाई का असर निचले और मध्यम वर्ग पर सीधा पड़ा है, जहां दो वक्त की रोटी भी अब एक संघर्ष बन चुकी है.

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि

हाल ही में प्रकाशित एक स्वतंत्र रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में खाद्य वस्तुओं, विशेष रूप से गेहूं की कीमतों में पिछले एक महीने के भीतर 30% से 50% तक की वृद्धि दर्ज की गई है. गेहूं, जो पाकिस्तान की बड़ी आबादी के लिए भोजन का मुख्य स्रोत है, उसकी कीमत में इतनी तेज़ बढ़ोतरी ने गरीब तबके को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है.

इसके साथ ही, टमाटर, आलू, दालें, दूध और मांस जैसी जरूरी वस्तुएं भी अब आम जनता की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं. महंगे दामों के चलते कई परिवारों ने मांस और सब्जियों की खपत में भारी कटौती की है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की परिस्थितियाँ देश में कुपोषण और स्वास्थ्य संकट को भी जन्म दे सकती हैं.

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में बढ़ोतरी

सितंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में साल-दर-साल आधार पर 5.6% की वृद्धि देखी गई. हालांकि यह आंकड़ा औसत है, लेकिन खाद्य श्रेणी में वास्तविक वृद्धि कहीं अधिक रही है.

इसका मतलब यह है कि एक औसत परिवार को अब अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक खर्च करना पड़ रहा है. आर्थिक असमानता और बेरोजगारी की समस्या ने इस स्थिति को और भी अधिक संवेदनशील बना दिया है.

जनता में सरकार के प्रति नाराज़गी

देश में लगातार बढ़ती महंगाई ने जनता के बीच सरकार के प्रति गुस्से को भी भड़का दिया है. आम लोग मानते हैं कि मौजूदा सरकार महंगाई पर नियंत्रण पाने में पूरी तरह असफल रही है.

हालांकि पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कुछ सप्ताह पहले यह कहा था कि सरकार कीमतों को स्थिर करने और आम जनता को राहत देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इन प्रयासों के ठोस परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं. रिपोर्टों में कहा गया है कि सरकारी घोषणाएं अधिकतर प्रतीकात्मक रही हैं, और आवश्यक वस्तुओं के दामों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पाया है.

महंगाई के पीछे के प्रमुख कारण-

1. बाढ़ और जलवायु परिवर्तन का असर

पाकिस्तान में पिछले कुछ वर्षों में आई भीषण बाढ़ ने कृषि उत्पादन को गहरी चोट पहुंचाई है. लाखों हेक्टेयर फसलें बर्बाद हो गईं, जिससे खाद्य आपूर्ति पर बुरा असर पड़ा. इसके साथ ही, जलवायु परिवर्तन के कारण बेमौसम बारिश और सूखे की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिसने देश की कृषि व्यवस्था को अस्थिर कर दिया है.

2. आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटें

बढ़ते परिवहन खर्च, खराब बुनियादी ढांचे, और सीमा पार व्यापार में रुकावटों ने आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है. इससे वस्तुओं की उपलब्धता में कमी आई है और कीमतें और अधिक बढ़ गई हैं.

3. मुद्रास्फीति और मुद्रा का अवमूल्यन

पाकिस्तानी रुपया लगातार डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा है. इससे आयातित वस्तुएं महंगी हो गई हैं, जिनमें खाद्य सामग्री, पेट्रोल, और रसोई गैस जैसे आवश्यक उत्पाद शामिल हैं. मुद्रा अवमूल्यन ने महंगाई को और बढ़ावा दिया है.

4. राजकोषीय घाटा और कर्ज बोझ

पाकिस्तान पहले से ही भारी विदेशी कर्ज के दबाव में है. सरकार को IMF जैसी संस्थाओं से राहत पैकेज तो मिलते रहे हैं, लेकिन बदले में मिलने वाली शर्तें जैसे सब्सिडी में कटौती और टैक्स वृद्धि आम जनता की जेब पर सीधा असर डालती हैं.

विश्व बैंक की चेतावनी और आर्थिक स्थिति

विश्व बैंक ने 2025-26 के लिए पाकिस्तान की जीडीपी वृद्धि दर केवल 2.6% रहने का अनुमान लगाया है. यह दर दक्षिण एशिया के अन्य देशों की तुलना में काफी कम है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति निकट भविष्य में बेहतर होने की संभावना कम ही है.

विश्व बैंक की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर पाकिस्तान जल्द ही आर्थिक सुधारों और राजकोषीय अनुशासन की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाता, तो उसे सामाजिक असंतोष, बेरोजगारी, और गरीबी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.

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