भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर एंटी-ड्रोन सिस्टम से होगी निगरानी, गृह मंत्रालय का ऐलान, घुसपैठ पर लगेगी लगाम!

केंद्र सरकार ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है.

Anti-drone systems to monitor the India-Pakistan border Amit Shah
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि सीमापार से ड्रोन के जरिए होने वाली हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए आधुनिक तकनीक आधारित ‘स्मार्ट बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड’ विकसित किया जाएगा. इस व्यवस्था में विशेष एंटी-ड्रोन सुरक्षा प्रणाली भी शामिल होगी.

पिछले कुछ वर्षों में सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से हथियारों और ड्रग्स की तस्करी की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई है. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, खासकर पंजाब और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में ऐसे मामलों ने गंभीर चुनौती पैदा की है. नई सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है.

स्मार्ट तकनीक से होगी निगरानी

गृह मंत्रालय की योजना के तहत सीमा क्षेत्रों में आधुनिक सेंसर, स्मार्ट फेंसिंग और उन्नत निगरानी प्रणालियों को तैनात किया जाएगा. इन तकनीकों की मदद से सीमा पर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान पहले से अधिक तेजी और सटीकता से की जा सकेगी.

स्मार्ट बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड का मकसद सीमा सुरक्षा को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना और सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया क्षमता को बेहतर करना है.

लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम भी बनेगा हिस्सा

इस पहल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा शुरू किया गया लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (LPMS) भी शामिल होगा. यह एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे देश के विभिन्न भूमि बंदरगाहों पर माल ढुलाई और यात्रियों की आवाजाही से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए तैयार किया गया है.

यह प्रणाली कार्गो और यात्री प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विभागों और एजेंसियों को एक साझा डिजिटल ढांचे से जोड़ने का काम करेगी.

अमित शाह ने बताई योजना की अहमियत

LPMS के शुभारंभ के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह प्रणाली भविष्य में विकसित किए जाने वाले स्मार्ट सिक्योरिटी ग्रिड का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगी. उनके अनुसार, यह व्यवस्था देश की आर्थिक और भौतिक सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी.

उन्होंने कहा कि सभी संबंधित एजेंसियों और डेटा प्रणालियों को एक मंच पर लाने से समन्वय और सूचनाओं के आदान-प्रदान की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी.

एजेंसियों के बीच बढ़ेगा तालमेल

गृह मंत्री के मुताबिक, नई व्यवस्था लागू होने के बाद विभिन्न सुरक्षा और प्रशासनिक एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा. इससे सीमा प्रबंधन से जुड़े निर्णय तेजी से लिए जा सकेंगे और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकेगा.

उन्होंने यह भी कहा कि स्मार्ट बॉर्डर कॉन्सेप्ट और LPMS के संयुक्त उपयोग से सीमाओं की सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी.

कम होगा समय और कागजी प्रक्रिया

सरकार का दावा है कि LPMS लागू होने के बाद कागजी कार्यवाही में लगभग 90 प्रतिशत तक कमी आएगी. इसके अलावा मालवाहक ट्रकों के इंतजार का समय 22 से 35 प्रतिशत तक घट सकता है, जबकि सीमा चौकियों पर प्रोसेसिंग समय में 40 से 60 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी, सीमा पार आवागमन अधिक सुगम होगा और पर्यटन क्षेत्र को भी लाभ पहुंच सकता है.

सुरक्षा और व्यापार दोनों को मिलेगा फायदा

सरकार की इस पहल को सीमा सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्रबंधन और एंटी-ड्रोन सुरक्षा तंत्र के जरिए न केवल सीमाओं की निगरानी मजबूत होगी बल्कि व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की कार्यक्षमता में भी सुधार देखने को मिल सकता है.

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