पाकिस्तान में कुछ महीने पहले तक पानी की भारी कमी थी. अब मानसून शुरू होते ही वहां बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों को लेकर पाकिस्तान सरकार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.
गर्मी के दौरान देश के कई हिस्सों में पानी की कमी देखने को मिली. कराची समेत कई बड़े शहरों में लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ा. सरकार ने भी माना था कि सिंधु नदी से कम पानी मिलने की वजह से जल संकट पैदा हुआ.
चिनाब नदी में भी घटा पानी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पहले चिनाब नदी से पाकिस्तान को हर दिन करीब 21,887 क्यूसेक पानी मिल रहा था, लेकिन बाद में यह घटकर करीब 5,689 क्यूसेक रह गया. इसी तरह सिंधु और दूसरी नदियों में भी पानी की मात्रा कम होने की बात कही गई.
अब मानसून आने के बाद पाकिस्तान को उल्टा बाढ़ का डर सताने लगा है.
बाढ़ से बचने की तैयारी शुरू
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने सिंधु और दूसरी नदियों की सफाई कराने का फैसला किया है. इसके लिए बुलडोजर की मदद से नदी में जमा गाद हटाई जाएगी ताकि पानी का बहाव बेहतर हो सके.
इसके साथ ही नदियों के किनारों से अतिक्रमण हटाने की भी तैयारी की जा रही है. सरकार का मानना है कि इससे बाढ़ का खतरा कम किया जा सकेगा.
क्यों बढ़ी चिंता?
रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान का कहना है कि उसे भारत से नदियों के पानी का नियमित आंकड़ा नहीं मिल रहा है. ऐसे में उसे यह पता नहीं चल पाता कि कितनी मात्रा में पानी आएगा.
पाकिस्तान को आशंका है कि अगर बरसात के दौरान अचानक ज्यादा पानी आया तो कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बन सकती है.
पिछली बाढ़ से हुआ था भारी नुकसान
पिछले वर्षों में आई बाढ़ से पाकिस्तान को बड़ा नुकसान हुआ था. कई इलाके पानी में डूब गए थे और हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. पंजाब प्रांत में सेना के कुछ ठिकानों पर भी बाढ़ का असर पड़ा था.
इसी अनुभव को देखते हुए सरकार इस बार पहले से तैयारी कर रही है ताकि नुकसान को कम किया जा सके.
इस बीच भारत और पाकिस्तान के बीच पानी को लेकर विवाद भी बना हुआ है. इस मामले को लेकर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी प्रक्रिया का सहारा ले रहा है. रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में अब तक पाकिस्तान करोड़ों रुपये खर्च कर चुका है.
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